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ऑपरेशन शूटआउट में जख्मी दलवीर अहेरिया की मौत
Updated Sun, 12 Aug 2018 02:16 AM IST
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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
लुटेरों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन शूटआउट अभियान में 1 अगस्त की रात अतरौली में हुई पुलिस मुठभेड़ में जख्मी हुए दलवीर अहेरिया की शनिवार दोपहर जेएन मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। इससे पहले वह जेल के अस्पताल में इलाज पा रहा था। जहां तबियत बिगड़ने पर शनिवार सुबह ही उसे जेल से मेडिकल कॉलेज भेजा गया था। इस सूचना पर पहुंचे परिजनों ने उसकी साजिश के तहत हत्या का आरोप लगा दिया। परिजनों का कहना था कि वह शुक्रवार को ही उससे मिले थे। ऐसी हालत न थी कि उसकी मौत हो जाएगी। इधर, देर शाम पुलिस उसका पोस्टमार्टम कराने की तैयारी में जुटी थी।
1 अगस्त की रात डीजीपी के आदेश पर चले चेकिंग अभियान के दौरान इंस्पेक्टर अतरौली प्रवेश राणा अपनी टीम के साथ चौमुहां रोड 10 नंबर नलकूप के पास चेकिंग कर रहे थे। तभी नगरिया भूड़ की ओर से पैदल-पैदल आते तीन संदिग्धों को रोका गया तो उन्होंने सीधे फायरिंग शुरू कर दी। इस फायरिंग से उपनिरीक्षक योगेंद्र सिंह व चंद्रशेखर भारद्वाज गोली लगने से जख्मी हो गए थे। इस पर पुलिस ने आत्मरक्षार्थ फायरिंग की तो एक बदमाश के बाएं पैर में दो गोलियां लग गईं और वह वहीं गिर गया, जबकि अंधेरे में उसके दो अन्य साथी भाग जाने में सफल रहे।
बाद में जख्मी बदमाश को जिला अस्पताल पहुंचाया था, जहां से उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था। यहां पूछताछ में उसने अपना नाम दलवीर अहेरिया पुत्र सुभाष निवासी कोछोड़ क्वार्सी बताया था। फरार साथियों के नाम टिंकू उर्फ पूरन निवासी नगला माली धनीपुर मंडी गांधीपार्क व अशोक पुत्र श्यौदान जानकी नगर गांधीपार्क बताए। इस पर अतरौली की वर्ष 2017 की लूट के मुकदमे में 25 हजार रुपये का इनाम था। इस पर दो दर्जन आपराधिक मुकदमे जिले के विभिन्न थानों में दर्ज हैं। इसके बाद से 7 अगस्त तक उसका मेडिकल कॉलेज में इलाज चला। वहां से 7 अगस्त की दोपहर उसे जेल दाखिल किया गया। यहां भी उसे जेल अस्पताल में रखा गया, जहां 10 अगस्त को फिर अधिक खून बहने से तबियत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज लाया गया। यहां तीन-चार घंटे रहने के बाद वह वापस जेल भेजा गया।
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इसके बाद शनिवार सुबह फिर करीब साढ़े दस बजे उसे तबियत बिगड़ने पर मेडिकल ले जाया गया। जहां दोपहर करीब 12 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस सूचना पर इंस्पेक्टर सिविल लाइंस भी पहुंच गए। जहां पंचायतनामा आदि के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इंस्पेक्टर के अनुसार डॉक्टर फौरी तौर पर अधिक खून बहने से मौत होना बता रहे हैं। वहीं भाई मनवीर का कहना है कि शुक्रवार को ही उससे खुद उसकी व मां आदि परिजनों की मुलाकात हुई थी। इतनी तबियत खराब न थी। उसे साजिश के तहत मारा गया है। इंस्पेक्टर के अनुसार पोस्टमार्टम के आधार पर आगे कार्यवाही की जाएगी।
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लुटेरों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन शूटआउट अभियान में 1 अगस्त की रात अतरौली में हुई पुलिस मुठभेड़ में जख्मी हुए दलवीर अहेरिया की शनिवार दोपहर जेएन मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। इससे पहले वह जेल के अस्पताल में इलाज पा रहा था। जहां तबियत बिगड़ने पर शनिवार सुबह ही उसे जेल से मेडिकल कॉलेज भेजा गया था। इस सूचना पर पहुंचे परिजनों ने उसकी साजिश के तहत हत्या का आरोप लगा दिया। परिजनों का कहना था कि वह शुक्रवार को ही उससे मिले थे। ऐसी हालत न थी कि उसकी मौत हो जाएगी। इधर, देर शाम पुलिस उसका पोस्टमार्टम कराने की तैयारी में जुटी थी।
1 अगस्त की रात डीजीपी के आदेश पर चले चेकिंग अभियान के दौरान इंस्पेक्टर अतरौली प्रवेश राणा अपनी टीम के साथ चौमुहां रोड 10 नंबर नलकूप के पास चेकिंग कर रहे थे। तभी नगरिया भूड़ की ओर से पैदल-पैदल आते तीन संदिग्धों को रोका गया तो उन्होंने सीधे फायरिंग शुरू कर दी। इस फायरिंग से उपनिरीक्षक योगेंद्र सिंह व चंद्रशेखर भारद्वाज गोली लगने से जख्मी हो गए थे। इस पर पुलिस ने आत्मरक्षार्थ फायरिंग की तो एक बदमाश के बाएं पैर में दो गोलियां लग गईं और वह वहीं गिर गया, जबकि अंधेरे में उसके दो अन्य साथी भाग जाने में सफल रहे।
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बाद में जख्मी बदमाश को जिला अस्पताल पहुंचाया था, जहां से उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था। यहां पूछताछ में उसने अपना नाम दलवीर अहेरिया पुत्र सुभाष निवासी कोछोड़ क्वार्सी बताया था। फरार साथियों के नाम टिंकू उर्फ पूरन निवासी नगला माली धनीपुर मंडी गांधीपार्क व अशोक पुत्र श्यौदान जानकी नगर गांधीपार्क बताए। इस पर अतरौली की वर्ष 2017 की लूट के मुकदमे में 25 हजार रुपये का इनाम था। इस पर दो दर्जन आपराधिक मुकदमे जिले के विभिन्न थानों में दर्ज हैं। इसके बाद से 7 अगस्त तक उसका मेडिकल कॉलेज में इलाज चला। वहां से 7 अगस्त की दोपहर उसे जेल दाखिल किया गया। यहां भी उसे जेल अस्पताल में रखा गया, जहां 10 अगस्त को फिर अधिक खून बहने से तबियत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज लाया गया। यहां तीन-चार घंटे रहने के बाद वह वापस जेल भेजा गया।
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इसके बाद शनिवार सुबह फिर करीब साढ़े दस बजे उसे तबियत बिगड़ने पर मेडिकल ले जाया गया। जहां दोपहर करीब 12 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस सूचना पर इंस्पेक्टर सिविल लाइंस भी पहुंच गए। जहां पंचायतनामा आदि के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इंस्पेक्टर के अनुसार डॉक्टर फौरी तौर पर अधिक खून बहने से मौत होना बता रहे हैं। वहीं भाई मनवीर का कहना है कि शुक्रवार को ही उससे खुद उसकी व मां आदि परिजनों की मुलाकात हुई थी। इतनी तबियत खराब न थी। उसे साजिश के तहत मारा गया है। इंस्पेक्टर के अनुसार पोस्टमार्टम के आधार पर आगे कार्यवाही की जाएगी।