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साढ़े तीन वर्ष पुराने तिहरे हत्याकांड में आरोपी दोषमुक्त
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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
जुलाई 2015 तक लोधा के गांव सहरोई में रहने वाले रिटायर होमगार्ड पुरुषोत्तम के परिवार में सब कुछ ठीक ठाक था। लेकिन इसके बाद एक तिहरे हत्याकांड के आरोप में पुरुषोत्तम और उसका पूरा परिवार जेल गया और अब तक जेल में रहा। अब अदालत ने आरोपियों को दोषमुक्त किया है। 10 महीने पहले पुरुषोत्तम के भाई की जेल में ही मौत हो गई।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता दिनेश शर्मा एडवोकेट ने बताया कि गांव सहरोई में जमीनी विवाद के चलते तीन लोगों की हत्या के मामले में वादी गांव की ही रहने वाली प्रवेश देवी ने गांव के पुरुषोत्तम, उसका भाई घनश्याम, पुरुषोत्तम के दोनों बेटे कालू और मूला, इनकी पत्नियां रेखा, अंजू व नाबालिग पौत्र को नामजद किया था। विवेचना के बाद पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
तभी से आरोपी जेल में ही थे। जेल की अवधि में ही पुरुषोत्तम के छोटे भाई घनश्याम की कारागार में ही मौत हो गई। तीन वर्ष की सजा काटने पर नाबालिग पौत्र को जेल से रिहा कर दिया गया, क्योंकि अधिकतम अविधि की सजा वह काट चुका था। अब अदालत ने माना कि आरोपियों के खिलाफ हत्या के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं।
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इसके बाद पुरुषोत्तम सहित सभी आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया है। एडवोकेट दिनेश शर्मा कहते हैं कि आरोपी दोषमुक्त तो हो गए हैं लेकिन इस दौरान उनका पूरा जीवन ही बदल गया। सामाजिक दृष्टिकोण से लेकर रिश्तेदारी आदि में बहुत बदलाव आया है। साथ ही परिवार का एक सदस्य भी खो दिया है।
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जुलाई 2015 तक लोधा के गांव सहरोई में रहने वाले रिटायर होमगार्ड पुरुषोत्तम के परिवार में सब कुछ ठीक ठाक था। लेकिन इसके बाद एक तिहरे हत्याकांड के आरोप में पुरुषोत्तम और उसका पूरा परिवार जेल गया और अब तक जेल में रहा। अब अदालत ने आरोपियों को दोषमुक्त किया है। 10 महीने पहले पुरुषोत्तम के भाई की जेल में ही मौत हो गई।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता दिनेश शर्मा एडवोकेट ने बताया कि गांव सहरोई में जमीनी विवाद के चलते तीन लोगों की हत्या के मामले में वादी गांव की ही रहने वाली प्रवेश देवी ने गांव के पुरुषोत्तम, उसका भाई घनश्याम, पुरुषोत्तम के दोनों बेटे कालू और मूला, इनकी पत्नियां रेखा, अंजू व नाबालिग पौत्र को नामजद किया था। विवेचना के बाद पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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तभी से आरोपी जेल में ही थे। जेल की अवधि में ही पुरुषोत्तम के छोटे भाई घनश्याम की कारागार में ही मौत हो गई। तीन वर्ष की सजा काटने पर नाबालिग पौत्र को जेल से रिहा कर दिया गया, क्योंकि अधिकतम अविधि की सजा वह काट चुका था। अब अदालत ने माना कि आरोपियों के खिलाफ हत्या के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं।
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इसके बाद पुरुषोत्तम सहित सभी आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया है। एडवोकेट दिनेश शर्मा कहते हैं कि आरोपी दोषमुक्त तो हो गए हैं लेकिन इस दौरान उनका पूरा जीवन ही बदल गया। सामाजिक दृष्टिकोण से लेकर रिश्तेदारी आदि में बहुत बदलाव आया है। साथ ही परिवार का एक सदस्य भी खो दिया है।