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रेलवे रोड के चर्चित गोपी हत्याकांड के एक को उम्रकैद
Updated Thu, 13 Dec 2018 01:47 AM IST
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क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
महानगर के रेलवे रोड इलाके के एक दशक पुराने बहुचर्चित गोपी हत्याकांड में अपर सत्र न्यायालय-सात शाहिद रजा के न्यायालय से सजा सुनाई गई है। एक आरोपी को अदालत ने उम्रकैद व पचास हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। इस हत्याकांड का एक आरोपी मारा जा चुका है, जबकि एक अन्य सुरेश कचौड़ी वाले की पत्रावली अलग लंबित है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी गोपाल सिंह राना व रघुवंश शर्मा के अनुसार 22 सितंबर 2006 की रात शीला देवी निवासी सराय बैरागी गांधीपार्क ने यह मुकदमा बन्नादेवी थाने में दर्ज कराया था कि उसके बेटे गोपी की रेलवे रोड पर दुकान है, जिस पर सरदार निर्मल सिंह ने कब्जा कर लिया है। इसी विवाद में सरदार निर्मल सिंह ने अमित उर्फ कालू, भीम उर्फ वसीम व सुरेश कचौड़ी वाले को सुपारी देकर उसके बेटे की हत्या की साजिश रची है।
घटना की शाम करीब सात बजे यह तीनों उसके बेटे को घर से बहाने से बुलाकर ले गए और चंद्र मार्केट में ले जाकर गोली मारकर हत्या कर दी। इसकी जानकारी घर में जब परिजनों को हुई तो परिजन मौके पर दौड़ पड़े। पुलिस ने मुकदमे के आधार पर सुरेश का नाम विवेचना में निकाल दिया, जबकि अमित उर्फ कालू व भीम उर्फ वसीम के खिलाफ चार्जशीट दायर की। दौरान-ए-सत्र परीक्षण 7 अगस्त 2017 को भीम उर्फ वसीम व उसके भाई की रेलवे रोड पर ही सुरेश कचौड़ी वाले ने हत्या कर दी। इस पर अदालत ने अकेले आरोपी अमित उर्फ कालू को साक्ष्यों व गवाही के आधार पर उम्रकैद व 50 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।
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सुरेश के खिलाफ अभी फैसला बाकी
आपसी विवाद में भीम उर्फ वसीम व उसके भाई की हत्या के आरोप में जब सुरेश कचौड़ी वाला जेल चला गया, तब गोपी की मां ने सुरेश के खिलाफ धारा 319 के तहत अदालत में याचिका दायर की, जिसमें अपील की गई कि पुलिस ने गोपी की हत्या में सुरेश का नाम उसकी मर्जी के खिलाफ निकाला है। इस पर अदालत ने सुरेश को फिर से गोपी की हत्या में तलब कर लिया है। अभी उसकी पत्रावली लंबित है। इसमें अदालत में परीक्षण जारी है और फैसला आना है।
अमर उजाला की खबर से शहर में थमी थी हलचल
सुरेश कचौड़ी वाले द्वारा दिनदहाड़े भीम उर्फ वसीम व उसके भाई की हत्या के बाद बेशक सुरेश को पांच ही घंटे में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। मगर शहर में सांप्रदायिक माहौल बिगड़ गया था। दोहरे हत्याकांड के विरोध में ऊपरकोट पर पुलिस से टकराव हुआ था। मगर पड़ताल करते हुए अमर उजाला ने यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी कि वसीम उर्फ भीम और सुरेश कचौड़ी वाला आपस में दोस्त थे। एक अपराध में आरोपी बने थे। इसके बाद माहौल थमा था और शहर में हालात सामान्य हुए थे।
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महानगर के रेलवे रोड इलाके के एक दशक पुराने बहुचर्चित गोपी हत्याकांड में अपर सत्र न्यायालय-सात शाहिद रजा के न्यायालय से सजा सुनाई गई है। एक आरोपी को अदालत ने उम्रकैद व पचास हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। इस हत्याकांड का एक आरोपी मारा जा चुका है, जबकि एक अन्य सुरेश कचौड़ी वाले की पत्रावली अलग लंबित है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी गोपाल सिंह राना व रघुवंश शर्मा के अनुसार 22 सितंबर 2006 की रात शीला देवी निवासी सराय बैरागी गांधीपार्क ने यह मुकदमा बन्नादेवी थाने में दर्ज कराया था कि उसके बेटे गोपी की रेलवे रोड पर दुकान है, जिस पर सरदार निर्मल सिंह ने कब्जा कर लिया है। इसी विवाद में सरदार निर्मल सिंह ने अमित उर्फ कालू, भीम उर्फ वसीम व सुरेश कचौड़ी वाले को सुपारी देकर उसके बेटे की हत्या की साजिश रची है।
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घटना की शाम करीब सात बजे यह तीनों उसके बेटे को घर से बहाने से बुलाकर ले गए और चंद्र मार्केट में ले जाकर गोली मारकर हत्या कर दी। इसकी जानकारी घर में जब परिजनों को हुई तो परिजन मौके पर दौड़ पड़े। पुलिस ने मुकदमे के आधार पर सुरेश का नाम विवेचना में निकाल दिया, जबकि अमित उर्फ कालू व भीम उर्फ वसीम के खिलाफ चार्जशीट दायर की। दौरान-ए-सत्र परीक्षण 7 अगस्त 2017 को भीम उर्फ वसीम व उसके भाई की रेलवे रोड पर ही सुरेश कचौड़ी वाले ने हत्या कर दी। इस पर अदालत ने अकेले आरोपी अमित उर्फ कालू को साक्ष्यों व गवाही के आधार पर उम्रकैद व 50 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।
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सुरेश के खिलाफ अभी फैसला बाकी
आपसी विवाद में भीम उर्फ वसीम व उसके भाई की हत्या के आरोप में जब सुरेश कचौड़ी वाला जेल चला गया, तब गोपी की मां ने सुरेश के खिलाफ धारा 319 के तहत अदालत में याचिका दायर की, जिसमें अपील की गई कि पुलिस ने गोपी की हत्या में सुरेश का नाम उसकी मर्जी के खिलाफ निकाला है। इस पर अदालत ने सुरेश को फिर से गोपी की हत्या में तलब कर लिया है। अभी उसकी पत्रावली लंबित है। इसमें अदालत में परीक्षण जारी है और फैसला आना है।
अमर उजाला की खबर से शहर में थमी थी हलचल
सुरेश कचौड़ी वाले द्वारा दिनदहाड़े भीम उर्फ वसीम व उसके भाई की हत्या के बाद बेशक सुरेश को पांच ही घंटे में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। मगर शहर में सांप्रदायिक माहौल बिगड़ गया था। दोहरे हत्याकांड के विरोध में ऊपरकोट पर पुलिस से टकराव हुआ था। मगर पड़ताल करते हुए अमर उजाला ने यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी कि वसीम उर्फ भीम और सुरेश कचौड़ी वाला आपस में दोस्त थे। एक अपराध में आरोपी बने थे। इसके बाद माहौल थमा था और शहर में हालात सामान्य हुए थे।