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कोरोना काल... इलाज तो दूर अंतिम संस्कार में भी कतार

Mon, 26 Apr 2021 12:34 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 26 Apr 2021 12:34 AM IST
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Corona period ... treatment is far away even long line for funeral
शव जलाने के लिए नुमाइश ग्राउंड के शमशान ग्रह में प्लेटफार्म न मिलने पर जमीन पर अलग से प्लेटफार्म ? - फोटो : CITY OFFICE
राजा तिवारी, अलीगढ़।
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शहर के नुमाइश स्थित शमशान गृह से रविवार को दर्दनाक तस्वीर देखने को मिली। यहां एक के बाद एक शवों की लाइन लग गई। शाम तक 20 शव पहुंचे, जिनके अंतिम संस्कार के लिए प्लेटफार्म कम पड़ गए। अभी तक यहां 24 प्लेटफार्म पर शवों का अंतिम संस्कार हो रहा है। लेकिन अस्थियां चुनने के लिए 12 से 18 घंटे का वक्त चाहिए होता है। इसलिए जब 24 प्लेटफार्म कम पड़े तो जमीन पर ही अंतिम संस्कार किया जाने लगा।
आननफानन में छह नए प्लेटफार्म बनाए गए। अप्रैल में यहां प्लेटफार्म 16 से बढ़ाकर 24 किए गए थे। अब इनकी कुल संख्या 30 कर दी गई है। दस अप्रैल से 25 अप्रैल के बीच यहां पर 91 शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। ऐसे में गैस संचालित शव दाह गृह की सख्त जरूरत महसूस हो रही है, जिसका प्रस्ताव स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल होने के बाद से गायब है।
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रविवार दोपहर 24 प्लेटफार्म में से कुछ पर चिता जलती रहीं तो कुछ पर फूल पड़े थे। इसके बाद जब कुछ लोग शव लेकर पहुंचे तो उनको इंतजार करना पड़ा। मानव उपकार संस्था के अध्यक्ष विष्णु कुमार बंटी ने पूर्व में बने प्लेटफार्म से इतर अलग से छह प्लेटफार्म बनवाए। इसके बाद यहां अंतिम संस्कार हुए। कोविड 19 संक्रमित और संदिग्ध संक्रमित मरीजों की मौत होने पर नियमों का पालन करते हुए उनका अंतिम संस्कार यहीं हो सकता है। इसलिए यहां शवों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
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एलपीजी गैस संचालित शवदाह गृह का निर्माण स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल था। पूर्व मंडलायुक्त अयजदीप सिंह और जीएस प्रियदर्शी की पहल पर पूर्व नगर आयुक्त सत्यप्रकाश पटेल ने इसके निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया था। दो बार प्रस्ताव बना। 25 लाख रुपये से बढ़कर इसकी कीमत 85 लाख रुपये तक पहुंच गई। मगर टेंडर नहीं हो सका।
सांसद सतीश गौतम ने सांसद निधि से धनराशि देने की बात कही थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य ठंडे बस्ते में चला गया। नतीजा ये कि मार्च 2020 में बनकर तैयार होने वाला गैस संचालित शवदाह गृह एक साल बाद भी कागजों में है। कोरोना संक्रमण के सबसे खतरनाक दौर में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के तमाम दावे कर रही सरकार और सिस्टम की हकीकत यही है कि एक साल में शवदाह गृह का इंतजाम भी नहीं हो सका।
- गैस संचालित शवदाह गृह निर्माण में जो भी अड़चन आ रही है, उसको तत्काल दूर कराया जाएगा, ताकि निर्माण हो सके। प्राकृतिक संतुलन के लिए इस आधुनिक संयंत्र का निर्माण जरूरी है। मंडलायुक्त और नगर आयुक्त से इस संबंध में जल्द से जल्द निर्माण कराने के लिए कहा है।

-सतीश गौतम, सांसद।
गैस शवदाह गृह के ये हैं लाभ
लकड़ी से शव को जलाने में लगभग चार हजार रुपये की लकड़ियां लग जाती हैं। जबकि गैस शवदाह गृह में डेढ़ कामर्शियल सिलिंडर में शव जल जाता है। अगर दो सिलिंडर भी लगते तो एक शव पर अधिकतम 2200 रुपये का खर्च आता। इसके अलावा, एक फायदा यह भी होगा कि पेड़ों का कटान कम होगा। जो पर्यावरण संरक्षण में हितकर है। इसके अलावा समय की बचत भी होती है, क्योंकि पौन घंटे में शव जल जाता है। मटके में फूल निकालकर रख दिए जाते हैं।
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