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कांग्रेस: पार्टी ने बंद किया 40 लाख का सहारा, टिकट के दावेदारों को झटका, प्रत्याशी खुद उठाएंगे चुनावी खर्च
Sun, 13 Sep 2026 05:54 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Sun, 13 Sep 2026 05:54 PM IST
सार
पार्टी नेताओं के मुताबिक पिछले चुनावों में बड़े नेताओं की सभाओं और रोड शो पर पार्टी फंड खर्च होने के बावजूद कई प्रत्याशी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सके। कुछ की तो जमानत तक जब्त हो गई। इसके बाद पार्टी अब सिर्फ सियासी पहुंच के बजाय जमीनी पकड़ और चुनाव लड़ने की क्षमता को तवज्जो देने की तैयारी में है।
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कांग्रेस
- फोटो : ANI Photos
विस्तार
विधानसभा चुनाव का टिकट पाने की कोशिश में जुटे दावेदारों के लिए कांग्रेस हाईकमान के नए फैसले ने बड़ा झटका दिया है। पार्टी ने प्रत्याशियों को चुनाव खर्च के लिए मिलने वाली 40 लाख रुपये तक की मदद बंद करने का फैसला किया है। अब टिकट पाने वालों को चुनावी खर्च खुद उठाना होगा। पार्टी के इस फैसले ने उन दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जो टिकट के साथ पार्टी फंड से आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे। अब टिकट पाने के साथ ही उन्हें अपनी आर्थिक क्षमता भी साबित करनी होगी। यानी टिकट पार्टी देगी, लेकिन चुनाव लड़ने का खर्च प्रत्याशी को अपनी जेब से उठाना होगा।
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पार्टी नेताओं के मुताबिक पिछले चुनावों में बड़े नेताओं की सभाओं और रोड शो पर पार्टी फंड खर्च होने के बावजूद कई प्रत्याशी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सके। कुछ की तो जमानत तक जब्त हो गई। इसके बाद पार्टी अब सिर्फ सियासी पहुंच के बजाय जमीनी पकड़ और चुनाव लड़ने की क्षमता को तवज्जो देने की तैयारी में है।
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कांग्रेस जिलाध्यक्ष ठा. सोमवीर सिंह का कहना है कि पार्टी अब ऐसे ही लोगों को चुनाव मैदान में उतारने पर जोर देगी, जिनकी क्षेत्र में मजबूत पकड़ हो और जो संगठन के लिए जमीन पर काम कर रहे हों। उन्होंने बताया कि अलीगढ़ जिले की विधानसभा सीटों के लिए दो पूर्व आईपीएस अधिकारी भी कांग्रेस के संपर्क में हैं। इसके अलावा भाजपा के कुछ नेता भी कांग्रेस के संपर्क में हैं। जिलाध्यक्ष के अनुसार, यदि उन्हें भाजपा से टिकट नहीं मिलता है तो वे कांग्रेस का रुख कर सकते हैं।
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बदल सकते हैं जिलाध्यक्ष-महानगर अध्यक्ष
चुनाव से पहले कांग्रेस अपने संगठन में बड़ा फेरबदल कर सकती है। इसके तहत अलीगढ़ में जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष के रूप में नए चेहरे सामने आ सकते हैं। खबर है कि आगामी 15 सितंबर के बाद कभी भी इन नामों की घोषणा हो सकती है। हालांकि मौजूदा पदाधिकारियों ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।