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जितिन प्रसाद के पार्टी छोड़कर जाने पर कांग्रेसियों ने चुप्पी साधी

Fri, 11 Jun 2021 12:52 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Jun 2021 12:52 AM IST
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Congress
कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद के भारतीय जनता पार्टी में जाने के बाद स्थानीय कांग्रेसी नेताओं ने चुप्पी साध ली है। वह इस पर खुलकर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं कर रहे हैं। इससे पहले स्थानीय स्तर पर पूर्व सांसद चौधरी बिजेंद्र सिंह और कांग्रेसी नेता अश्वनी शर्मा समाजवादी पार्टी में जा चुके हैं। जितिन प्रसाद ब्राह्मण चेतना परिषद के भी संयोजक थे। इस संगठन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि परिषद स्वतंत्र रूप से अपना कार्य करती रहेगी।
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राष्ट्रीय स्तर पर और स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के पुराने नेताओं का दूसरे राजनीतिक दल में जाने का सिलसिला जारी है। इसके साथ-साथ स्थानीय कांग्रेस में अंतर कलह की भी समस्या बनी हुई है। यह समस्या पिछले दिनों हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद और भी बढ़ गई है। आरोप-प्रत्यारोप के दौर के चलते पिछले दिनों दो कांग्रेस नेताओं को 6 वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित भी कर दिया गया।
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ताजा मामला कांग्रेस में ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले जितिन प्रसाद का है। जितिन प्रसाद के जाने से स्थानीय कांग्रेस में चर्चा तो खूब है, लेकिन खुलकर कोई कुछ नहीं कह रहा है। पार्टी द्वारा जितिन प्रसाद को ब्राह्मण चेतना परिषद का संयोजक बनाया गया था। उनके जाने के बाद अब स्थितियां बदल गई हैं। परिषद के स्थानीय पदाधिकारी विनोद पांडेय कहते हैं कि परिषद एक गैर राजनीतिक संगठन है। उसके उद्देश्य और गतिविधि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। पिछले दिनों कांग्रेसी ने विनोद पांडे को भी 6 वर्ष के लिए संगठन से निष्कासित कर दिया था। उन पर अनुशासनहीनता का आरोप था।
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संगठन में फेरबदल की संभावनाओं को बल दे रहे
स्थानीय कांग्रेसी उत्तर प्रदेश की प्रभारी और वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी के एक ट्वीट का हवाला देकर संगठन में फेरबदल की आशंकाओं को बल दे रहे हैं। इसमें कहा गया है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कोई अनियमितता के चलते उत्तर प्रदेश में 12 जिलों के अध्यक्ष पद पर बदलाव किया जा सकता है। माना कि स्पष्ट नहीं है कि इन 12 जिलों में अलीगढ़ का नाम है या नहीं।

इस संबंध में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चौधरी सुरेंद्र सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनकी कार्यप्रणाली पूरी तरह साफ सुथरी है। कोई कभी भी आकर किसी भी तरह से जांच परख कर सकता है । उन्हें कोई भी किसी तरह की आपत्ति नहीं है। जहां तक नेताओं का दूसरे दलों में जाने का सवाल है तो यह उनका व्यक्तिगत फैसला हो सकता है। इस पर कोई भी टिप्पणी नहीं की जा सकती।
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