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क्षमता से अधिक बंदियों के कारण जेल में जटिल हो सकती है स्थिति
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जिला कारागार में जिस तरह बंदियों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। इस संभावना को लेकर जेल में गए एएमयू के छात्र नेताओं ने पहले ही आगाह कर दिया था। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के चलते जेल गए शरजील उस्मानी और फरहान जुबेरी ने पहले ही क्षमता से अधिक बंदियों की बात जेल से बाहर आने के बाद बताई थी।
शरजील उस्मानी ने बताया था कि जिला कारागार जिस समय बनाया गया उस समय शहर की आबादी और संसाधन सीमित थे, लेकिन पिछले सवा सौ वर्ष में शहर का 10 गुना विस्तार हुआ है। कारागार की क्षमता सीमित है। एक बैरक में 40 से 45 बंदी रह सकते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में यहां पर 130 से अधिक बंदियों को रखा जाता है। सामान्य स्थितियों में यह बात नजरअंदाज की जा सकती है लेकिन महामारी के समय यह उदासीनता बहुत भारी पड़ सकती है। जेल से ही बाहर आए एक और छात्र फरहान जुबेरी कहते हैं यहां पर बैरक के बाहर ब्रिटिश काल का एक पत्थर लगा हुआ है जिसमें बैरक की छमता 45 तय की गई है । इस तरह जिला कारागार की छमता 1150 के आसपास तय होती है। लेकिन मौजूदा समय में चार हजार तक बंदी जेल में मौजूद हैं। यह बहुत जटिल स्थिति है और इस तरह सरकार को प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
दूसरी ओर जेल प्रशासन का दावा है कि वह मौजूदा हालात में बेहतर से बेहतर करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं । जेल अधीक्षक आलोक सिंह कहते हैं उन्होंने जेल में ही मास्क तैयार कराए। जेल में ही टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध कराई। जो मौजूदा हालात हैं उनमें सैनिटाइजेशन आदि का पूरा ध्यान रखा गया। सावधानी बरतने के चलते ही बंदियों की मिलाई की प्रक्रिया भी बंद की गई है।
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शरजील उस्मानी ने बताया था कि जिला कारागार जिस समय बनाया गया उस समय शहर की आबादी और संसाधन सीमित थे, लेकिन पिछले सवा सौ वर्ष में शहर का 10 गुना विस्तार हुआ है। कारागार की क्षमता सीमित है। एक बैरक में 40 से 45 बंदी रह सकते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में यहां पर 130 से अधिक बंदियों को रखा जाता है। सामान्य स्थितियों में यह बात नजरअंदाज की जा सकती है लेकिन महामारी के समय यह उदासीनता बहुत भारी पड़ सकती है। जेल से ही बाहर आए एक और छात्र फरहान जुबेरी कहते हैं यहां पर बैरक के बाहर ब्रिटिश काल का एक पत्थर लगा हुआ है जिसमें बैरक की छमता 45 तय की गई है । इस तरह जिला कारागार की छमता 1150 के आसपास तय होती है। लेकिन मौजूदा समय में चार हजार तक बंदी जेल में मौजूद हैं। यह बहुत जटिल स्थिति है और इस तरह सरकार को प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
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दूसरी ओर जेल प्रशासन का दावा है कि वह मौजूदा हालात में बेहतर से बेहतर करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं । जेल अधीक्षक आलोक सिंह कहते हैं उन्होंने जेल में ही मास्क तैयार कराए। जेल में ही टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध कराई। जो मौजूदा हालात हैं उनमें सैनिटाइजेशन आदि का पूरा ध्यान रखा गया। सावधानी बरतने के चलते ही बंदियों की मिलाई की प्रक्रिया भी बंद की गई है।
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