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Aligarh News: 26/11 के मंजर को भूल नहीं पाते कमांडो देवेंद्र
Wed, 26 Nov 2025 01:47 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Updated Wed, 26 Nov 2025 01:47 AM IST
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मुंबई में 26/11 के आतंकवादी हमले को 17 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन सादाबाद क्षेत्र के गांव नगला भोलू मढ़ाका निवासी एनएसजी कमांडो सूबेदार देवेंद्र बधौतिया आज भी उस भयावह रात को भूल नहीं पाए हैं। ताज होटल में चले इस ऑपरेशन में देवेंद्र उन चुनिंदा कमांडो में शामिल थे, जिन्होंने भवन के अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कमांडो देवेंद्र उस मंजर को याद करते हुए बताते हैं कि 26 नवंबर 2008 को वह एनएसजी में टीआरजी जेसीओ की ड्यूटी कर रहे थे, तभी सूचना मिली कि मुंबई के नरीमन हाउस और होटल ताज में कुछ विदेशियों को पाक के आतंकवादियों ने बंधक बना लिया है। करीब 48 जवान तीन हेलिकॉप्टर के जरिये नरीमन हाउस में पहुंचे। वहां नीचे की मंजिलों में आतंकवादी गोलीबारी कर रहे थे।
उनकी टीम अलग-अलग हिस्सों में बंट गई। उन्हें भी एक टीम का कमांडर बनाया गया। ऊपरी मंजिल पर खोजबीन की तो वहां कोई नहीं था। दूसरी मंजिल पर पहुंचे तो हवलदार गजेंद्र नरीमन हाउस के कमरा नंबर एक में घुसे। इस दौरान फायरिंग शुरू हो गई। उन्होंने धुआं करने वाला ग्रेनेड फेंका तो आतंकवादी भय से बाथरूम में छिप गए।
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देवेंद्र ने बताया कि उस समय उनका ध्येय आतंकवादियों को मारना था। लिहाजा जिस बाथरूम में आतंकी छिपे थे, उसके गेट से हमने अंदर ग्रेनेड फेंका, जिससे वहां छिपे सभी आतंकी घायल हो गए। घायल आतंकियों की एके 47 हमने छीन लीं। इस दौरान एक आतंकवादी पास के दूसरे बाथरूम में छिप गया। उसने गोली चला दी, हमने उस बाथरूम में बारूदी ग्रेनेड लगा दिया, जिससे बाथरूम तहस-नहस हो गया और आतंकी मारा गया।
देवेंद्र ने बताया कि नरीमन हाउस में करीब पांच विदेशी यहूदी बंधक थे, उन्हें हमने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। फिर नरीमन हाउस की बची हुई मंजिलों में खोजबीन की, लेकिन वहां कुछ मिला नहीं। तब उन्होंने टीम का नेतृत्व किया और विदेशी लोगों को आतंकियों से मुक्त कराया। इस दौरान हवलदार गजेंद्र सिंह आतंकी को मारते समय शहीद हो गए। सूबेदार देवेंद्र ने बताया कि उन्हें आज भी हवलदार गजेंद्र पर गर्व है।
उन्होंने बताया कि ताज होटल में घुसते ही स्थिति बेहद विकट थी। छोटी-छोटी गलियों में पुलिसकर्मियों के शव पड़े थे। लगातार गोलियों की आवाजें आ रही थीं। माहौल इतना डरावना था कि एक क्षण को लगा जान बचना मुश्किल है। ताज होटल में करीब 2100 कमरे हैं। होटल के अंदर आतंकियों की संख्या और उनकी स्थिति का साफ अंदाज़ा किसी को नहीं था।
इसके बावजूद एनएसजी कमांडो टीम ने होटल के हर हिस्से में तलाशी अभियान चलाया। हमारी प्राथमिकता आतंकियों को ढूंढना नहीं, बल्कि बंधक बने लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना थी। ऑपरेशन के दौरान लगातार गोलाबारी और विस्फोटों की आवाजें गूंजती रहीं। ताज होटल के कमरों और बाथरूमों में छिपे आतंकियों को खोजकर टीम ने निष्क्रिय किया।
देवेंद्र बताते हैं कि तलाशी के दौरान एक आतंकी बाथरूम में छिपा मिला। जैसे ही उसने गोली चलाई, जवानों ने उसे वहीं ढेर कर दिया। लगातार 47 घंटे तक कमांडो टीम बिना आराम किए ऑपरेशन में जुटी रही। एनएसजी की समय पर कार्रवाई के कारण होटल में फंसे सैकड़ों लोग सुरक्षित निकाले जा सके। कमांडो देवेंद्र कहते हैं कि कई बार ऐसा लगा कि अब बस, लेकिन देश सेवा का संकल्प ही सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ। देवेंद्र ने बताया कि मौत करीब थी, लेकिन देश पहले था।
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कमांडो देवेंद्र उस मंजर को याद करते हुए बताते हैं कि 26 नवंबर 2008 को वह एनएसजी में टीआरजी जेसीओ की ड्यूटी कर रहे थे, तभी सूचना मिली कि मुंबई के नरीमन हाउस और होटल ताज में कुछ विदेशियों को पाक के आतंकवादियों ने बंधक बना लिया है। करीब 48 जवान तीन हेलिकॉप्टर के जरिये नरीमन हाउस में पहुंचे। वहां नीचे की मंजिलों में आतंकवादी गोलीबारी कर रहे थे।
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उनकी टीम अलग-अलग हिस्सों में बंट गई। उन्हें भी एक टीम का कमांडर बनाया गया। ऊपरी मंजिल पर खोजबीन की तो वहां कोई नहीं था। दूसरी मंजिल पर पहुंचे तो हवलदार गजेंद्र नरीमन हाउस के कमरा नंबर एक में घुसे। इस दौरान फायरिंग शुरू हो गई। उन्होंने धुआं करने वाला ग्रेनेड फेंका तो आतंकवादी भय से बाथरूम में छिप गए।
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देवेंद्र ने बताया कि उस समय उनका ध्येय आतंकवादियों को मारना था। लिहाजा जिस बाथरूम में आतंकी छिपे थे, उसके गेट से हमने अंदर ग्रेनेड फेंका, जिससे वहां छिपे सभी आतंकी घायल हो गए। घायल आतंकियों की एके 47 हमने छीन लीं। इस दौरान एक आतंकवादी पास के दूसरे बाथरूम में छिप गया। उसने गोली चला दी, हमने उस बाथरूम में बारूदी ग्रेनेड लगा दिया, जिससे बाथरूम तहस-नहस हो गया और आतंकी मारा गया।
देवेंद्र ने बताया कि नरीमन हाउस में करीब पांच विदेशी यहूदी बंधक थे, उन्हें हमने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। फिर नरीमन हाउस की बची हुई मंजिलों में खोजबीन की, लेकिन वहां कुछ मिला नहीं। तब उन्होंने टीम का नेतृत्व किया और विदेशी लोगों को आतंकियों से मुक्त कराया। इस दौरान हवलदार गजेंद्र सिंह आतंकी को मारते समय शहीद हो गए। सूबेदार देवेंद्र ने बताया कि उन्हें आज भी हवलदार गजेंद्र पर गर्व है।
उन्होंने बताया कि ताज होटल में घुसते ही स्थिति बेहद विकट थी। छोटी-छोटी गलियों में पुलिसकर्मियों के शव पड़े थे। लगातार गोलियों की आवाजें आ रही थीं। माहौल इतना डरावना था कि एक क्षण को लगा जान बचना मुश्किल है। ताज होटल में करीब 2100 कमरे हैं। होटल के अंदर आतंकियों की संख्या और उनकी स्थिति का साफ अंदाज़ा किसी को नहीं था।
इसके बावजूद एनएसजी कमांडो टीम ने होटल के हर हिस्से में तलाशी अभियान चलाया। हमारी प्राथमिकता आतंकियों को ढूंढना नहीं, बल्कि बंधक बने लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना थी। ऑपरेशन के दौरान लगातार गोलाबारी और विस्फोटों की आवाजें गूंजती रहीं। ताज होटल के कमरों और बाथरूमों में छिपे आतंकियों को खोजकर टीम ने निष्क्रिय किया।
देवेंद्र बताते हैं कि तलाशी के दौरान एक आतंकी बाथरूम में छिपा मिला। जैसे ही उसने गोली चलाई, जवानों ने उसे वहीं ढेर कर दिया। लगातार 47 घंटे तक कमांडो टीम बिना आराम किए ऑपरेशन में जुटी रही। एनएसजी की समय पर कार्रवाई के कारण होटल में फंसे सैकड़ों लोग सुरक्षित निकाले जा सके। कमांडो देवेंद्र कहते हैं कि कई बार ऐसा लगा कि अब बस, लेकिन देश सेवा का संकल्प ही सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ। देवेंद्र ने बताया कि मौत करीब थी, लेकिन देश पहले था।