ये भी कमाल: एक आरोप की दो जांच, पहली में क्लीनचिट, दूसरी में गिरी गाज, सीएमओ कार्यालय के बाबू हुए निलंबित
शासन से बैठी जांच में तत्कालीन एडीएम सिटी ने इसी वीडियो पर जांच की थी। जिसमें उन्होंने बाबू को सिर्फ चेतावनी दे कर मामले को रफा दफा कर दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि कार्यालय में रुपया लेकर न आएं, जबकि सिटी मजिस्ट्रेट से उसी वीडियो पर बाबू को दोषी पाया है।
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अलीगढ़ जिले के स्वास्थ्य विभाग में नित नए कारनामे सामने आते हैं। सभी कारनामों के इर्द-गिर्द चर्चित बाबू रणधीर चौधरी का नाम रहा है। हालांकि 26 नवंबर को उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में निलंबित कर दिया। मगर हैरानी ये भी है कि जिस वायरल वीडियो के आधार पर अब उन्हें निलंबित किया है। उसकी जांच करते हुए वही वीडियो पिछले साल 5 सितंबर 2024 को दो उच्चाधिकारियों ने देखा व सुना था। मगर तब कोई कार्रवाई न करना, उनकी जांच पर सवाल खड़ा करता है। हालांकि अब दोनों अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
इस विवाद की शुरुआत 16 जुलाई 2024 को हुई। तब एक अस्पताल संचालक सोनू ने सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी, डॉ. रोहित गोयल और बाबू रणधीर चौधरी सहित कई लोगों के खिलाफ 16 गंभीर आरोपों की लिखित शिकायत की थी। जिसमें सीएमओ कार्यालय में रिश्वतखोरी, दलाली और मनमानी के आरोप लगाए थे। इस शिकायत पर डीजी हेल्थ और निदेशक ने 3 सितंबर 2024 को अलीगढ़ पहुंचकर स्वयं जांच की।
एडी कार्यालय में सीएमओ व डॉ. रोहित गोयल सहित दो और चिकित्सकों के बयान दर्ज किए गए थे। चार सितंबर को इगलास में एक अस्पताल का निरीक्षण भी किया, जहां कई अनियमितताएं मिलीं। इसके बाद रणधीर चौधरी और बाबू कमल को लखनऊ तलब कर पूछताछ की गई। उस दौरान अधिकारियों ने वायरल वीडियो भी दिखाया और जिसमें करीब डेढ़ लाख रुपये के नोट गिनते हुए के घटनाक्रम पर सवाल किए। घंटों पूछताछ में उनके बयान दर्ज किए। उसके बाद से कार्रवाई की सुगबुगाहट शुरू हुई। मगर मामला दब गया। कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाबू रणधीर चौधरी सहित सभी आरोपी बेखौफ अपने-अपने पटल पर काम करते रहे।
फिर मई 2025 में विधायक राजकुमार सहयोगी ने तीनों के खिलाफ 29 बिंदुओं में गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। जिसके बाद सात विधायक सीएमओ के भ्रष्टाचार के खिलाफ उतरे। इसकी तीन चरणों में जांच हुई। अंतिम जांच मंडलायुक्त के स्तर पर है। इसी जांच के बीच एसीएमओ डॉ. दिनेश खत्री ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत करके मामले को नया मोड़ दिया और शासन ने फिर जांच बिठाई। शासन के निर्देश पर डीएम ने नगर मजिस्ट्रेट अतुल गुप्ता को जांच दी। जिन्होंने जांच में पाया गया कि रणधीर चौधरी ने कार्यालय को रिश्वतखोरी का अड्डा बना रखा था।
2024 में वायरल वीडियो का अवलोकन कर बाबू के द्वारा पैसे के लेन-देन करना स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। कार्यालय में पैसे का लेनदेन करना कदाचार की श्रेणी में आता है। ऐसे में वीडियो में लेनदेन की पुष्टी होती है। पिछले दिनों सिटी मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट डीएम ने शासन को कार्रवाई की संस्तुति सहित भेज दी। इसी पर शासन ने अब बाबू को सस्पेंड कर दिया। अब सवाल उठता है कि साल भर पहले डीजी हेल्थ और निदेशक को इस वीडियो में सच्चाई क्यों नहीं दिखी ? क्या किसी दबाव में या फिर प्रलोभन जांच रिपोर्ट दबा दी गई थी? अब चूंकि वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसलिए उनसे सवाल विभाग किस तरह से पूछेगा, ये आगे आगरा एडी की जांच का विषय है।
साल भर पहले हुई शिकायत पर डीजी हेल्थ और डायरेक्टर जांच करने आए थे। कुछ चिकित्सकों का बयान एडी कार्यालय में दर्ज हुए थे, जबकि बाबू को लखनऊ बुला कर बयान लिया गया था। अब उसी मामले में कार्रवाई की सूचना मिली है।-डॉ. नीरज त्यागी, सीएमओ
एडीएम सिटी ने इसी वीडियो पर दी थी चेतावनी
शासन से बैठी जांच में तत्कालीन एडीएम सिटी ने इसी वीडियो पर जांच की थी। जिसमें उन्होंने बाबू को सिर्फ चेतावनी दे कर मामले को रफा दफा कर दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि कार्यालय में रुपया लेकर न आएं, जबकि सिटी मजिस्ट्रेट से उसी वीडियो पर बाबू को दोषी पाया है।