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सर सैयद के साथ धोखाधड़ी करके क्लर्क ने निकाल लिए थे बैंक से सवा लाख रुपये
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दीपक शर्मा
अलीगढ़ में बैंक खातों में से धोखाधड़ी करके पैसा निकालने की घटनाओं के बीच यह जानना भी बेहद दिलचस्प है कि अलीगढ़ में 1906 में पहली बैंक रसलगंज पर स्थापित हुई, लेकिन इससे पहले ही 1895 में सर सैयद के साथ धोखाधड़ी करके उनके क्लर्क ने सवा लाख रुपये बैंक से निकाल लिए थे।
अलीगढ़ के बैंकिंग इतिहास की यह पहली ज्ञात धोखाधड़ी मानी जाती है। उस समय सर सैयद का बैंक एकाउंट आगरा में इंपीरियल बैंक में संचालित होता था। कॉलेज के फंड के लिए वह इस पैसे का इस्तेमाल करते थे, लेकिन कॉलेज के क्लर्क श्याम बिहारी लाल ने सर सैयद के फर्जी हस्ताक्षर करके सवा लाख रुपये कई चरणों में निकाल लिए। इसका पता जब सर सैयद को लगा तो उन्हें गहरा आघात लगा और वह 3 दिन बीमार रहे। इस बात का जिक्र सर सैयद ने 2 अक्तूबर 1895 को मौलाना हाली साहिब को लिखे गए पत्र में प्रमुखता से किया है।
सर सैयद को जब श्याम बिहारी लाल के फर्जीवाड़े का पता लगा तो उन्होंने मुकदमा लिखवाया। पुलिस ने श्याम बिहारी लाल को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। इस घटना के कुछ दिन बाद ही जेल में श्याम बिहारी लाल ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। एएमयू के मामलों के जानकार डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि इन सभी बातों का सर सैयद के हृदय पर गहरा आघात लगा। मौलाना हाली को लिखे पत्र में सर सैयद कहते हैं कि इस धोखाधड़ी के बाद जो कष्ट मुझे महसूस हो रहा है मैं उसको बयान नहीं कर सकता। आपने मुझे सांत्वना देने के लिए जो पत्र लिखा था उसका धन्यवाद मैं देता हूं। मैं अपने आप से यह भी कहता हूं कि अब जो होना था वह हो गया। इसके बाद भी मैं दुखी और कष्ट में स्वयं को महसूस करता हूं। हालत यह हो गई कि 3 दिन तक तो मैं खाना भी नहीं खा पाया। अब थोड़ा सा मुझे बेहतर महसूस हो रहा है।
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डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि क्लर्क श्याम बिहारी लाल के संबंध एक गलत प्रकार की महिला से हो गए थे। उसी की सोहबत के चलते श्याम बिहारी लाल ने कई चरणों में फर्जी चेक लगा लगा कर बड़ी रकम सर सैयद के कॉलेज के खाते से निकाल ली थी। इससे पहले अलीगढ़ के इतिहास में चेक के माध्यम से बैंक से पैसे निकाल कर धोखाधड़ी किए जाने का कोई मामला जानकारी में नहीं आता है।
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अलीगढ़ में बैंक खातों में से धोखाधड़ी करके पैसा निकालने की घटनाओं के बीच यह जानना भी बेहद दिलचस्प है कि अलीगढ़ में 1906 में पहली बैंक रसलगंज पर स्थापित हुई, लेकिन इससे पहले ही 1895 में सर सैयद के साथ धोखाधड़ी करके उनके क्लर्क ने सवा लाख रुपये बैंक से निकाल लिए थे।
अलीगढ़ के बैंकिंग इतिहास की यह पहली ज्ञात धोखाधड़ी मानी जाती है। उस समय सर सैयद का बैंक एकाउंट आगरा में इंपीरियल बैंक में संचालित होता था। कॉलेज के फंड के लिए वह इस पैसे का इस्तेमाल करते थे, लेकिन कॉलेज के क्लर्क श्याम बिहारी लाल ने सर सैयद के फर्जी हस्ताक्षर करके सवा लाख रुपये कई चरणों में निकाल लिए। इसका पता जब सर सैयद को लगा तो उन्हें गहरा आघात लगा और वह 3 दिन बीमार रहे। इस बात का जिक्र सर सैयद ने 2 अक्तूबर 1895 को मौलाना हाली साहिब को लिखे गए पत्र में प्रमुखता से किया है।
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सर सैयद को जब श्याम बिहारी लाल के फर्जीवाड़े का पता लगा तो उन्होंने मुकदमा लिखवाया। पुलिस ने श्याम बिहारी लाल को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। इस घटना के कुछ दिन बाद ही जेल में श्याम बिहारी लाल ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। एएमयू के मामलों के जानकार डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि इन सभी बातों का सर सैयद के हृदय पर गहरा आघात लगा। मौलाना हाली को लिखे पत्र में सर सैयद कहते हैं कि इस धोखाधड़ी के बाद जो कष्ट मुझे महसूस हो रहा है मैं उसको बयान नहीं कर सकता। आपने मुझे सांत्वना देने के लिए जो पत्र लिखा था उसका धन्यवाद मैं देता हूं। मैं अपने आप से यह भी कहता हूं कि अब जो होना था वह हो गया। इसके बाद भी मैं दुखी और कष्ट में स्वयं को महसूस करता हूं। हालत यह हो गई कि 3 दिन तक तो मैं खाना भी नहीं खा पाया। अब थोड़ा सा मुझे बेहतर महसूस हो रहा है।
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डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि क्लर्क श्याम बिहारी लाल के संबंध एक गलत प्रकार की महिला से हो गए थे। उसी की सोहबत के चलते श्याम बिहारी लाल ने कई चरणों में फर्जी चेक लगा लगा कर बड़ी रकम सर सैयद के कॉलेज के खाते से निकाल ली थी। इससे पहले अलीगढ़ के इतिहास में चेक के माध्यम से बैंक से पैसे निकाल कर धोखाधड़ी किए जाने का कोई मामला जानकारी में नहीं आता है।