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कोरोना का एक सालः लॉकडाउन में चित्रकारी कर बच्चों ने निखारा हुनर
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मानवी सिंघल की पेंटिंग
- फोटो : CITY OFFICE
इकराम वारिस
लॉकडाउन के दौरान जब घर से बाहर निकलने की पाबंदी थी, स्कूल-कॉलेज भी बंद थे... ऐसे में बच्चों और उनके अभिभावकों के समक्ष बड़ी चुनौती थी कि वक्त को कैसे काटा जाए। बच्चों में निराशा का भाव न आने पाए। घर पर ही उनका मन लगा रहे। ऐसे में अभिभावकों ने अपने बच्चों को ब्रश और रंगों से दोस्ती का मंत्र दिया। ये मंत्र बच्चों को भी खूब भाया। उन्होंने अपने नन्हें हाथों से अपने सपनों की उड़ान में रंग भरने शुरू कर दिए। साथ ही कोरोना योद्धाओं को भी चित्रकारी के माध्यम से सलाम किया। अमर उजाला ने बेहतरीन पेंटिंग को अखबार में प्रकाशित कर उनका उत्साहवर्धन किया।
नन्हे चित्रकार बोले
जिस तरह से कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा था, उसी के चलते लॉकडाउन करना पड़ा था। ऐसे में स्कूल बंद था। कहीं आ-जा नहीं सकते थे। इसलिए घर पर रहना पड़ रहा था। फिर, पेंटिंग के जरिये वक्त को गुजारा। - कनिष्का वर्मा
लॉकडाउन के दौरान घर में कैद हो गए थे। 24 घंटे घर पर ही रहना था। स्कूल-कॉलेज बंद थे। इस पहाड़ जैसे समय को रचनात्मक तरीके से निकाला जा सकता था और मैंने चित्रकारी करनी शुरू कर दी थी। -मानवी सिंघल
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कोविड-19 संक्रमण काल में वक्त गुजारना कठिन था। न तो स्कूल खुला थे और न ही बाहर आ-जा सकते थे। इस मुश्किल समय में कुछ लोग योद्धा की तरह लड़ रहे थे, जिनकी जिजीविषा पर पेंटिंग बनाकर उन्हें सलाम किया। -रिद्धि उपाध्याय
लॉकडाउन के लंबे कठिन वक्त को काटना हर किसी के लिए मुश्किल था। मेरे लिए भी था, क्योंकि कॉलेज बंद था। मैंने सोचा क्यों न इस मुश्किल हालात में पेंटिंग को अपना साथी बनाया जाए। इस दौरान खूब पेंटिंग बनाई। -कशिश वार्ष्णेय
अभिभावक बोले
लॉकडाउन में कारोबार बंद था। कोविड-19 वायरस अपना पांव तेजी से फैला रहा था। इससे बचाव का उपाय घर पर ही रहना था। लिहाजा, घर पर बच्चे बोर न हों। इसलिए उन्हें चित्रकारी करने की सलाह दी। - गजेंद्र शर्मा
लॉकडाउन में बच्चों का किसी तरह उत्साह, जोश डाउन न पड़े। इसके लिए उन्हें जो पसंद था, वह करने दिया। बच्चों ने कोविड-19 वायरस सहित जागरूकता को लेकर कागज पर अपने मन के भावों को उकेरा। - गुलजार अहमद
लॉकडाउन का पीरियड काफी लंबा था। स्कूल और घर से बाहर आने-जाने पर पाबंदी थी। इसका असर बच्चों पर न पड़े। इसलिए बच्चों की रचनात्मकता को जानने के लिए उन्हें चित्रकारी करने का उत्साहवर्धन के साथ पुरस्कृत किया। - प्रदीप के गुप्त
निश्चित रूप से कोविड-19 की वजह से लॉकडाउन भारी पड़ा, लेकिन यह समय की जरूरत थी। मगर बच्चों को समझाना काफी मुश्किल हो रहा था। उनकी मनोभाव को समझते हुए उन्हें पेंटिंग करने में सहायता की। -डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा
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लॉकडाउन के दौरान जब घर से बाहर निकलने की पाबंदी थी, स्कूल-कॉलेज भी बंद थे... ऐसे में बच्चों और उनके अभिभावकों के समक्ष बड़ी चुनौती थी कि वक्त को कैसे काटा जाए। बच्चों में निराशा का भाव न आने पाए। घर पर ही उनका मन लगा रहे। ऐसे में अभिभावकों ने अपने बच्चों को ब्रश और रंगों से दोस्ती का मंत्र दिया। ये मंत्र बच्चों को भी खूब भाया। उन्होंने अपने नन्हें हाथों से अपने सपनों की उड़ान में रंग भरने शुरू कर दिए। साथ ही कोरोना योद्धाओं को भी चित्रकारी के माध्यम से सलाम किया। अमर उजाला ने बेहतरीन पेंटिंग को अखबार में प्रकाशित कर उनका उत्साहवर्धन किया।
नन्हे चित्रकार बोले
जिस तरह से कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा था, उसी के चलते लॉकडाउन करना पड़ा था। ऐसे में स्कूल बंद था। कहीं आ-जा नहीं सकते थे। इसलिए घर पर रहना पड़ रहा था। फिर, पेंटिंग के जरिये वक्त को गुजारा। - कनिष्का वर्मा
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लॉकडाउन के दौरान घर में कैद हो गए थे। 24 घंटे घर पर ही रहना था। स्कूल-कॉलेज बंद थे। इस पहाड़ जैसे समय को रचनात्मक तरीके से निकाला जा सकता था और मैंने चित्रकारी करनी शुरू कर दी थी। -मानवी सिंघल
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कोविड-19 संक्रमण काल में वक्त गुजारना कठिन था। न तो स्कूल खुला थे और न ही बाहर आ-जा सकते थे। इस मुश्किल समय में कुछ लोग योद्धा की तरह लड़ रहे थे, जिनकी जिजीविषा पर पेंटिंग बनाकर उन्हें सलाम किया। -रिद्धि उपाध्याय
लॉकडाउन के लंबे कठिन वक्त को काटना हर किसी के लिए मुश्किल था। मेरे लिए भी था, क्योंकि कॉलेज बंद था। मैंने सोचा क्यों न इस मुश्किल हालात में पेंटिंग को अपना साथी बनाया जाए। इस दौरान खूब पेंटिंग बनाई। -कशिश वार्ष्णेय
अभिभावक बोले
लॉकडाउन में कारोबार बंद था। कोविड-19 वायरस अपना पांव तेजी से फैला रहा था। इससे बचाव का उपाय घर पर ही रहना था। लिहाजा, घर पर बच्चे बोर न हों। इसलिए उन्हें चित्रकारी करने की सलाह दी। - गजेंद्र शर्मा
लॉकडाउन में बच्चों का किसी तरह उत्साह, जोश डाउन न पड़े। इसके लिए उन्हें जो पसंद था, वह करने दिया। बच्चों ने कोविड-19 वायरस सहित जागरूकता को लेकर कागज पर अपने मन के भावों को उकेरा। - गुलजार अहमद
लॉकडाउन का पीरियड काफी लंबा था। स्कूल और घर से बाहर आने-जाने पर पाबंदी थी। इसका असर बच्चों पर न पड़े। इसलिए बच्चों की रचनात्मकता को जानने के लिए उन्हें चित्रकारी करने का उत्साहवर्धन के साथ पुरस्कृत किया। - प्रदीप के गुप्त
निश्चित रूप से कोविड-19 की वजह से लॉकडाउन भारी पड़ा, लेकिन यह समय की जरूरत थी। मगर बच्चों को समझाना काफी मुश्किल हो रहा था। उनकी मनोभाव को समझते हुए उन्हें पेंटिंग करने में सहायता की। -डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा