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Aligarh News: कक्षा नौ की छात्रा के उत्पीड़न के मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश, यह है मामला

Fri, 24 Oct 2025 04:30 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 24 Oct 2025 04:30 AM IST
सार

15 वर्षीय किशोरी राष्ट्रीय कन्या इंटर कॉलेज में कक्षा नौ की छात्रा है। भाई की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार उसकी बहन को विद्यालय की शिक्षिका उमा लगातार अपमानित कर रही थी, जिसकी उसने घर पर शिकायत की थी।

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CBI inquiry recommended in student harassment case
CBI - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अलीगढ़ के राष्ट्रीय कन्या इंटर कॉलेज खैर में उत्पीड़न से आहत कक्षा नौ की छात्रा के जहर खाकर जान देने की कोशिश करने के मामले में गृह मंत्रालय ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है। छात्रा के परिजनों ने पुलिस पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाते हुए गृहमंत्रालय में शिकायत की थी, जिसके बाद प्रकरण को जांच और अग्रिम कार्रवाई के लिए सीबीआई को भेजा गया है।

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घटना 17 जुलाई की है और कस्बे की रहने वाली 15 वर्षीय किशोरी राष्ट्रीय कन्या इंटर कॉलेज में कक्षा नौ की छात्रा है। भाई की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार उसकी बहन को विद्यालय की शिक्षिका उमा लगातार अपमानित कर रही थी, जिसकी उसने घर पर शिकायत की थी। इसके बाद घटना वाले दिन भाई उसे कॉलेज छोड़ने गया था। आरोप है कि भाई के सामने भी शिक्षिका ने छात्रा को अपमानित किया था, जिसके बाद उसने घर आकर जहर खा लिया था। छात्रा को उपचार के लिए दिल्ली एम्स ले जाया गया।

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प्रकरण में परिवार के आरोपों व छात्रा के बयान के आधार पर कार्रवाई करते हुए चार्जशीट दी गई थी। अब परिवार की शिकायत पर किसी तरह का आदेश गृह मंत्रालय से हुआ है, अभी यह जानकारी में नहीं आया है। अगर कोई आदेश आएगा तो हम उसके अनुसार कदम उठाएंगे।-अमृत जैन, एसपी देहात

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हमारी बहन ने विवेचक व कोर्ट के समक्ष बयान दिया था कि उस पर गलत संबंध बनाने का दबाव बनाया गया था। इसी से आहत होकर उसने यह कदम उठाया। इस मामले में किसी को बिना जेल भेजे, उन्हें बचाते हुए चार्जशीट देना गलत है। इसी पर गृह मंत्रालय से सीबीआई जांच की मांग की गई। उस पर सुनवाई हुई है। अब न्याय मिलेगा।-पीड़ित छात्रा का भाई

छात्रा व अन्य साथी छात्राओं के ये थे आरोप

एम्स में ही विवेचक ने छात्रा के बयान लिए थे, जिसमें उसने विद्यालय के उप प्रधानाचार्य व प्रबंधक आदि पर भी आरोप लगाए थे। प्रबंधक पर यौन उत्पीड़न करने व शिक्षकों पर इसके लिए दबाव बनाने के आरोप शामिल थे। करीब दस दिन उपचार चलने के बाद छात्रा जब घर वापस आई तो उसके न्यायालय में भी बयान कराए गए। कुछ अन्य छात्राओं ने भी कोतवाली पहुंचकर विद्यालय की शिक्षिका, प्रबंधक आदि पर यौन उत्पीड़न जैसे संगीन आरोप लगाए थे। इस आधार पर पुलिस ने मामले में मुकदमे में यौन उत्पीड़न व पॉक्सो की धाराओं की बढ़ोतरी तो की, लेकिन बिना किसी को गिरफ्तार किए 15 सितंबर को चार्जशीट दायर कर दी। परिवार का आरोप है कि एसपी क्राइम ने भी इस मामले की जांच की थी और कहा था कि बेशक आरोप छेड़खानी का है, लेकिन आरोपियों को पॉक्सो एक्ट में जेल भेज सकते हैं।

परिवार की शिकायत पर हुआ अब ये आदेश
पुलिस की इसी कार्रवाई से नाराज परिवार लगातार विवेचना बदलने की मांग करता रहा है। परिवार की दलील थी कि किसी दबाव में पुलिस ने आरोपियों को बिना जेल भेजे चार्जशीट दायर कर दी है। जिला स्तर पर सुनवाई नहीं होने पर परिवार ने गृह मंत्रालय में शिकायत की व पॉक्सो के मामले में बिना किसी को जेल भेजे चार्जशीट लगाने पर ऐतराज जताया, साथ ही उच्च स्तरीय एजेंसी या सीबीआई से जांच कराने की मांग की। इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए गृह मंत्रालय के अवर सचिव की ओर से 30 सितंबर को कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग भारत सरकार के सचिव को प्रकरण संदर्भित करते हुए अग्रिम जांच व कार्रवाई की सिफारिश की है। इसमें कहा है कि पीडित पक्ष ने सीबीआई जांच की मांग की है। चूंकि सीबीआई आपके अधीन है। इसलिए अग्रिम कार्रवाई से पीड़ित पक्ष को भी अवगत कराने को कहा गया है।

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