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Aligarh News: फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पंजीकरण, 27 करोड़ की टैक्स चोरी, मुकदमा दर्ज

Fri, 01 Aug 2025 05:38 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 01 Aug 2025 05:38 PM IST
सार

विभाग की टीम ने 11 जुलाई 2025 को रामघाट रोड स्थित ईडन गार्डन किशनपुर स्थित फर्म के घोषित व्यापार स्थल पर छापा मारा। चौंकाने वाली बात यह थी कि जांच के समय वहां कोई भी व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं पाई गई। फर्म द्वारा जीएसटी पोर्टल पर दिए गए मोबाइल नंबरों पर बार-बार कॉल करने पर वे स्विच ऑफ मिले, जिससे व्यापारी का कोई पता नहीं लग सका।

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Case filed for tax evasion of Rs 27 crore through fake registration
पुलिस ने दर्ज की रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फर्जी जीएसटी पंजीकरण के जरिये 27 करोड़ रुपये की कर चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। जांच के बाद वाणिज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने ध्यानी ट्रेडिंग कंपनी की मालिक सुमन ध्यानी के खिलाफ थाना क्वार्सी में धोखाधड़ी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। उक्त फर्म पर आरोप है कि उसने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर जीएसटी पंजीकरण हासिल किया और करोड़ों रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का अवैध रूप से लाभ उठाया।

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संयुक्त आयुक्त विशेष अनुसंधान शाखा रश्मि सिंह ने बताया कि ध्यानी ट्रेडिंग की जांच 11 जुलाई 2025 को की गई थी। यह जांच इसलिए शुरू की गई, क्योंकि फर्म ने जून और जुलाई महीने में कुल 27.45 करोड़ रुपये के कर योग्य मूल्य के ई-वे बिल जारी किए थे। विभाग की टीम ने 11 जुलाई 2025 को रामघाट रोड स्थित ईडन गार्डन किशनपुर स्थित फर्म के घोषित व्यापार स्थल पर छापा मारा। चौंकाने वाली बात यह थी कि जांच के समय वहां कोई भी व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं पाई गई। फर्म द्वारा जीएसटी पोर्टल पर दिए गए मोबाइल नंबरों पर बार-बार कॉल करने पर वे स्विच ऑफ मिले, जिससे व्यापारी का कोई पता नहीं लग सका।
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आस-पास के लोगों को सुमन ध्यानी की फोटो दिखाकर पूछताछ की गई, लेकिन किसी ने भी फर्म या फर्म मालिक के बारे में कोई जानकारी होने से इन्कार कर दिया। जांच में यह स्पष्ट हो गया कि फर्म ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी पंजीकरण प्राप्त किया था। अप्रैल और मई 2025-26 में व्यापारी द्वारा कोई इनवर्ड आपूर्ति (माल की प्राप्ति) घोषित नहीं की गई थी और न ही इससे संबंधित कोई ई-वे बिल जारी किया गया था। इन सभी तथ्यों के आधार पर आरोपी फर्म के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

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