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केनरा बैंक का गबन ः 10 दिन के अंदर 3 बार में निकाले डेढ़ करोड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
Updated Sun, 25 Feb 2018 01:41 AM IST
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केनरा बैंक में जांच करने पहुंची गुजरात पुलिस।
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केनरा बैंक की रामघाट रोड शाखा में हुए 1.43 करोड़ के गबन की परतें खुलने लगी हैं। इस मामले में 10 दिन के अंदर तीन बार में 1.40 करोड़ रुपया संबंधित संस्था के कर्मचारी द्वारा निकाला गया। इस मामले में तीन निलंबित मैनेजरों के साथ तीन अन्य अफसर भी संदेह के दायरे में आ गए हैं। पुलिस की जांच में इन पर शिकंजा कसता जा रहा है। जल्द ही इनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। जांच अभी जारी है और कई और बड़े चौंकाने वाले खुलासे की उम्मीद है।
रामघाट रोड स्थित केनरा बैंक शाखा में एटीएम में कैश डालने व लेन-देने का ब्यौरा रखने वाली मुंबई की राइटर्स सेफ गार्ड प्राइवेट लिमिटेड और इलेक्ट्रानिक पेमेंट सर्विस ‘ईपीएस’ का स्टाफ बैंक से कैश लेकर एटीएम में कैश डालने का काम करता है। कंपनी ने इसके लिए अरुण कुमार नाम के व्यक्ति को अधिकृत कर रखा है, जिसका आफिस आगरा में है। कंपनी एटीएम की आवश्यकता के अनुसार बैंक शाखा को कैश संबंधी मेल भेजता है।
उसी के अनुसार बैंक प्रबंधन अधिकृत एजेंट पैसा को देता है। एजेंट उसे एटीएम में डालता है। इस मामले में 13 अक्तूबर 2017 को 40 लाख, 16 अक्तूबर को 1.44 करोड़ एवं 23 अक्तूबर को 1.20 करोड़ रुपया बैंक से कंपनी के एजेंट ने एटीएम में डालने के लिए लिया, लेकिन एटीएम में पैसा कम डाला।
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ऐसे किया गबन
जांच अधिकारी एवं एसएसआई क्वार्सी दिनेश कुमार ने बताया कि कंपनी ने बैंक को 13 अक्तूबर 2017 को एटीएम में डालने के लिए 40 लाख की डिमांड का मेल भेजा। बैंक ने एजेंट को पैसे दे दिए। एजेंट ने इसमें से 20 लाख रुपया ही एटीएम में डाला। कंपनी को सूचना दी कि बैंक के पास वांछित कैश उपलब्ध नहीं है। अत: 20 लाख रुपये की दूसरी डिमांड का मेल डाला जाए, ताकि वह पैसा ले सके। कंपनी अफसरों ने ऐसा ही किया। बैंक अफसरों की गलती यह रही कि उन्होंने दूसरे मेल को चेक करने की जहमत नहीं उठाई। इसके बाद कंपनी ने 16 अक्तूबर 2017 को 1.44 करोड़ का मेल किया, बैंक अफसरों ने मेल के अनुसार पेमेंट कर दिया। इसमें से एजेंट ने मात्र 64 लाख रुपया एटीएम में डाला और दोबारा से उपरोक्त प्रक्रिया दोहराई। इसके बाद कंपनी ने 23 अक्तूबर 2017 को 1.20 करोड़ का मेल किया। इस बार भी एजेंट ने 80 लाख रुपया डालते हुए बाकी का पैसा अपने पास रख लिया।
चीफ मैनेजर समेत तीन अन्य कार्रवाई की जद में
जांच अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि जब कंपनी का मेल चीफ मैनेजर श्रवण शुक्ला के पास भी आता है तो वह मात्र एफआईआर कराकर ही बरी नहीं हो सकते हैं। वह भी संदेह के दायरे में हैं। इनके अलावा दो अन्य अफसर जिज्ञासा जोशी एवं शिवांश श्रीवास्तव भी कार्रवाई की जद में आ रहे हैं। अभी जांच जारी है और जांच पूरी होने पर कई बड़े खुलासों की उम्मीद है। बताते चलें कि बैंक प्रबंधन ने इस मामले में तीन प्रबंधक मधु भाटिया, वीरेंद्र कुमार एवं दीपक कुमार को निलंबित कर दिया था। बता दें कि इस बैंक में कुल एक करोड़ 43 लाख 16 हजार 900 रुपये का गबन हुआ है। कंपनी ने तीन लाख 16 हजार 900 रुपये का गबन स्वीकार किया है।
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रामघाट रोड स्थित केनरा बैंक शाखा में एटीएम में कैश डालने व लेन-देने का ब्यौरा रखने वाली मुंबई की राइटर्स सेफ गार्ड प्राइवेट लिमिटेड और इलेक्ट्रानिक पेमेंट सर्विस ‘ईपीएस’ का स्टाफ बैंक से कैश लेकर एटीएम में कैश डालने का काम करता है। कंपनी ने इसके लिए अरुण कुमार नाम के व्यक्ति को अधिकृत कर रखा है, जिसका आफिस आगरा में है। कंपनी एटीएम की आवश्यकता के अनुसार बैंक शाखा को कैश संबंधी मेल भेजता है।
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उसी के अनुसार बैंक प्रबंधन अधिकृत एजेंट पैसा को देता है। एजेंट उसे एटीएम में डालता है। इस मामले में 13 अक्तूबर 2017 को 40 लाख, 16 अक्तूबर को 1.44 करोड़ एवं 23 अक्तूबर को 1.20 करोड़ रुपया बैंक से कंपनी के एजेंट ने एटीएम में डालने के लिए लिया, लेकिन एटीएम में पैसा कम डाला।
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ऐसे किया गबन
जांच अधिकारी एवं एसएसआई क्वार्सी दिनेश कुमार ने बताया कि कंपनी ने बैंक को 13 अक्तूबर 2017 को एटीएम में डालने के लिए 40 लाख की डिमांड का मेल भेजा। बैंक ने एजेंट को पैसे दे दिए। एजेंट ने इसमें से 20 लाख रुपया ही एटीएम में डाला। कंपनी को सूचना दी कि बैंक के पास वांछित कैश उपलब्ध नहीं है। अत: 20 लाख रुपये की दूसरी डिमांड का मेल डाला जाए, ताकि वह पैसा ले सके। कंपनी अफसरों ने ऐसा ही किया। बैंक अफसरों की गलती यह रही कि उन्होंने दूसरे मेल को चेक करने की जहमत नहीं उठाई। इसके बाद कंपनी ने 16 अक्तूबर 2017 को 1.44 करोड़ का मेल किया, बैंक अफसरों ने मेल के अनुसार पेमेंट कर दिया। इसमें से एजेंट ने मात्र 64 लाख रुपया एटीएम में डाला और दोबारा से उपरोक्त प्रक्रिया दोहराई। इसके बाद कंपनी ने 23 अक्तूबर 2017 को 1.20 करोड़ का मेल किया। इस बार भी एजेंट ने 80 लाख रुपया डालते हुए बाकी का पैसा अपने पास रख लिया।
चीफ मैनेजर समेत तीन अन्य कार्रवाई की जद में
जांच अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि जब कंपनी का मेल चीफ मैनेजर श्रवण शुक्ला के पास भी आता है तो वह मात्र एफआईआर कराकर ही बरी नहीं हो सकते हैं। वह भी संदेह के दायरे में हैं। इनके अलावा दो अन्य अफसर जिज्ञासा जोशी एवं शिवांश श्रीवास्तव भी कार्रवाई की जद में आ रहे हैं। अभी जांच जारी है और जांच पूरी होने पर कई बड़े खुलासों की उम्मीद है। बताते चलें कि बैंक प्रबंधन ने इस मामले में तीन प्रबंधक मधु भाटिया, वीरेंद्र कुमार एवं दीपक कुमार को निलंबित कर दिया था। बता दें कि इस बैंक में कुल एक करोड़ 43 लाख 16 हजार 900 रुपये का गबन हुआ है। कंपनी ने तीन लाख 16 हजार 900 रुपये का गबन स्वीकार किया है।