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बफैलो मीट कारोबार को पांच दिन में 65 करोड़ का फटका
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Fri, 02 Jun 2017 01:32 AM IST
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अवैध पशु कटान और पशु क्रूरता रोकने को लेकर केंद्र सरकार के कुछ ताजा फैसलों का सीधा असर बफैलो मीट एक्सपोर्ट पर पड़ने लगा है। पांच दिन में करीब 65 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हुआ है।
अगर पशु पैंठों में जानवरों की खरीद-फरोख्त पुराने ढर्रे पर नहीं लौटी, तो ये घाटा सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। नोटबंदी के दौर से बमुश्किल उबरे इस कारोबार से जुड़े हजारों लोगों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है, क्योंकि जानवर नहीं मिलने से पूरी चेन लड़खड़ा रही है।
एक प्रमुख मीट एक्सपोर्ट यूनिट के महाप्रबंधक ने बताया कि इस संबंध में केंद्र सरकार को डेयरी, मीट एक्सपोर्ट, लेदर एक्सपोर्ट सहित अन्य कई संगठनों की ओर से पत्र लिखा गया है। जिसमें मीट एक्सपोर्ट से विदेशी मुद्रा कमाने के इस माध्यम को बनाए रखने के लिए कहा गया है।
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उन्होंने बताया कि अकेले अलीगढ़ में ही रोजाना केवल इसी कारोबार से बैंकिंग से लेकर पूरे बाजार में करीब 13 करोड़ रुपये का अदान-प्रदान होता है। पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता रुकनी चाहिए, लेकिन मीट एक्सपोर्ट, घरेलू बाजार में मीट की जरूरत पूरा करने के लिए भी व्यवस्था होनी चाहिए।
ताकि खानपान के साथ रोजगार चलते रहे और विदेशी मुद्रा भी देश में आती रहे। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि केंद्र की मोदी सरकार इस संबंध में उचित फैसला लेगी।
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अगर पशु पैंठों में जानवरों की खरीद-फरोख्त पुराने ढर्रे पर नहीं लौटी, तो ये घाटा सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। नोटबंदी के दौर से बमुश्किल उबरे इस कारोबार से जुड़े हजारों लोगों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है, क्योंकि जानवर नहीं मिलने से पूरी चेन लड़खड़ा रही है।
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एक प्रमुख मीट एक्सपोर्ट यूनिट के महाप्रबंधक ने बताया कि इस संबंध में केंद्र सरकार को डेयरी, मीट एक्सपोर्ट, लेदर एक्सपोर्ट सहित अन्य कई संगठनों की ओर से पत्र लिखा गया है। जिसमें मीट एक्सपोर्ट से विदेशी मुद्रा कमाने के इस माध्यम को बनाए रखने के लिए कहा गया है।
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उन्होंने बताया कि अकेले अलीगढ़ में ही रोजाना केवल इसी कारोबार से बैंकिंग से लेकर पूरे बाजार में करीब 13 करोड़ रुपये का अदान-प्रदान होता है। पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता रुकनी चाहिए, लेकिन मीट एक्सपोर्ट, घरेलू बाजार में मीट की जरूरत पूरा करने के लिए भी व्यवस्था होनी चाहिए।
ताकि खानपान के साथ रोजगार चलते रहे और विदेशी मुद्रा भी देश में आती रहे। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि केंद्र की मोदी सरकार इस संबंध में उचित फैसला लेगी।