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मौजूदा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं बजट : प्रो. सलाम
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प्रोफेसर मोहम्मद अब्दुस सलाम चेयरमैन अर्थशास्त्र विभाग एएमयू
- फोटो : CITY OFFICE
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के चेयरमैन प्रोफेसर मोहम्मद अब्दुस सलाम का कहना है कि केंद्र सरकार के आम बजट में लंबे समय के लिए ढांचागत योजनाओं पर तो बात की गई है लेकिन अर्थव्यवस्था को तुरंत राहत देने जैसे उपायों पर चर्चा नहीं की गई है।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के चलते अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। असंगठित क्षेत्र से करोड़ों लोगों को रोजगार मिलता है। लेकिन महामारी के दौरान इस क्षेत्र की कमर टूट गई। फैक्टरी व उद्योग-धंधे बंद होने से लोगों का रोजगार छिन गया। यहां पर याद रखना जरूरी है कि यह असंगठित क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान देता है। इस क्षेत्र के लिए बजट में कोई बात नहीं की गई है। अगर इस क्षेत्र को राहत दी जाएगी तो उसका सीधा असर रोजगार पर पड़ेगा। लोगों को रोजगार मिलेगा तो उनके पास पैसा आएगा। पैसा आएगा तो अर्थव्यवस्था तेजी से पटरी पर आएगी।
प्रोफेसर सलाम कहते हैं कि हर बजट में कुछ अच्छी बातें होती हैं तो कुछ कमियां रह जाती हैं। नौकरी पेशा लोगों की बात की जाए तो आयकर स्लैब को छुआ तक नहीं गया है। वह जैसा था वैसा ही है। यह जरूर है कि ढांचागत क्षेत्र में कुछ लंबी योजनाएं बताई गई हैं। लेकिन इस समय सबसे बड़ी आवश्यकता तात्कालिक राहत देने की थी जिसमें यह बजट पूरी तरह विफल साबित हुआ है। आयकर और अन्य प्रावधानों के विषय में मौन रहने से मध्यम वर्ग को निराशा हुई है। इसलिए कहा जा सकता है कि मौजूदा समय की प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए यह बजट सक्षम नहीं है।
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के चलते अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। असंगठित क्षेत्र से करोड़ों लोगों को रोजगार मिलता है। लेकिन महामारी के दौरान इस क्षेत्र की कमर टूट गई। फैक्टरी व उद्योग-धंधे बंद होने से लोगों का रोजगार छिन गया। यहां पर याद रखना जरूरी है कि यह असंगठित क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान देता है। इस क्षेत्र के लिए बजट में कोई बात नहीं की गई है। अगर इस क्षेत्र को राहत दी जाएगी तो उसका सीधा असर रोजगार पर पड़ेगा। लोगों को रोजगार मिलेगा तो उनके पास पैसा आएगा। पैसा आएगा तो अर्थव्यवस्था तेजी से पटरी पर आएगी।
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प्रोफेसर सलाम कहते हैं कि हर बजट में कुछ अच्छी बातें होती हैं तो कुछ कमियां रह जाती हैं। नौकरी पेशा लोगों की बात की जाए तो आयकर स्लैब को छुआ तक नहीं गया है। वह जैसा था वैसा ही है। यह जरूर है कि ढांचागत क्षेत्र में कुछ लंबी योजनाएं बताई गई हैं। लेकिन इस समय सबसे बड़ी आवश्यकता तात्कालिक राहत देने की थी जिसमें यह बजट पूरी तरह विफल साबित हुआ है। आयकर और अन्य प्रावधानों के विषय में मौन रहने से मध्यम वर्ग को निराशा हुई है। इसलिए कहा जा सकता है कि मौजूदा समय की प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए यह बजट सक्षम नहीं है।
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