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अलीगढ़ : बिना अधिकारियों के हुआ बोर्ड अधिवेशन, हंगामा
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नगर निगम के अधिवेशन में हंगामा करते पार्षदों को शांत करते मेयर मोहम्मद फुरकान।
- फोटो : CITY OFFICE
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नगर निगम के बोर्ड अधिवेशन में हंगामे के बीच नगर आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव रखा गया। महापौर प्रस्ताव पास होने का दावा कर रहे हैं। अधिवेशन में नगर निगम के अधिकारी शामिल नहीं हुए। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस फोर्स भी तैनात कर दिया गया था।
महापौर मो. फुरकान ने पार्षदों को पत्र जारी कर मंगलवार को 11 बजे से सामान्य बोर्ड अधिवेशन में बुलाया था। सदन में भाजपा सहित विभिन्न दलों के 40 से अधिक पार्षद पहुंचे थे। सदन में मंच पर सिर्फ महापौर थे। सदन शुरू होते ही सपा के पार्षद मुशर्रफ ने सवाल उठाया कि इस अधिवेशन का क्या औचित्य है, जिसमें नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त एवं सचिव सचिवालय के साथ ही नगर निगम का कोई भी अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित नहीं हैं। उन्होंने महापौर से अधिवेशन स्थगित करने की मांग की। इतना सुनते ही भाजपा पार्षद भड़क गए और मुशर्रफ का घेराव कर हंगामा करने लगे। कुछ समय तक सदन में जमकर हंगामा हुआ। पार्षद सीट पर खड़े होकर नगर आयुक्त के खिलाफ नारे लगाने लगे।
इसी बीच भाजपा पार्षद सुरेंद्र पचौरी नगर आयुक्त गौरांग राठी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लेकर आए। पार्षद नगर आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। भाजपा पार्षद भारत माता की जय, मोदी-योगी जिंदाबाद एवं भाजपा जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। नामित पार्षद संजय पंडित ने बेंच पर चढ़कर महापौर मो. फुरकान पर निशाना साधा। कहा कि महापौर साहब आप अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। पार्षद महापौर पर हमलावर होते, इसके लिए पहले ही एक कर्मचारी ने राष्ट्रगान बजा दिया। उपसभापति डॉ. मुकेश शर्मा ने रिकार्डिंग बंद करा दी। इसी बीच पार्षद मुशर्रफ मंच पर पहुंच गए और माइक लेकर राष्ट्रगान शुरू करवा दिया। राष्ट्रगान के सम्मान में सभी पार्षद खड़े हो गए। इसके बाद महापौर मो. फुरकान मंच से उतरे और गाड़ी में बैठकर चले गए। महापौर को घेरने का प्रयास कर रहे भाजपा पार्षद हाथ मलते रह गए। बाद भाजपा पार्षद डॉ. मुकेश शर्मा, कुलदीप पांडेय, वीरेंद्र सिंह, दिनेश गुप्ता, अनिल सेंगर, पुष्पेंद्र सिंह जादौन, सुरेंद्र पचौरी, विजय तोमर, हेमंत गुप्ता आदि जवाहर भवन के बरामदे में बैठकर महापौर एवं नगर आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
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ये कैसा अधिवेशन, ना एजेंडा, ना मिनट्स
नगर निगम के इतिहास में ये पहला अधिवेशन है, जिसका न तो एजेंडा जारी किया गया और न ही नगर निगम के अधिकारी शामिल हुए। सचिवालय द्वारा भी अधिवेशन से संबंधित नोटिस जारी नहीं किया गया। इसलिए अधिवेशन की वैधानिकता पर भाजपा के ही कुछ पार्षद सवाल उठा रहे हैं। उपसभापति डॉ. मुकेश शर्मा, भाजपा के मुख्य सचेतक दिनेश गुप्ता एवं कुलदीप पांडेय सहित कई पार्षदों का कहना है कि यह अधिवेशन वैधानिक नहीं है, क्योंकि न तो एजेंडा जारी किया गया और न ही मिनट्स बने हैं, जब नगर आयुक्त सामने होते तो निंदा प्रस्ताव का औचित्य था।
शासन के पास भेजेंगे निंदा प्रस्ताव : महापौर
महापौर मो. फुरकान ने कहा कि सदन में पूर्ण बहुमत से निंदा प्रस्ताव पारित किया गया है। इस प्रस्ताव को शासन के पास भेजेंगे। भाजपा के पार्षद सुरेंद्र पचौरी ने प्रस्ताव रखा था, जिसे सभी सदस्यों ने सहमति से पारित कर दिया। उन्होंने कहा कि पहले आचार संहिता के कारण बोर्ड की बैठक नहीं हुई। एक तिथि को पहले अधिकारी टाल चुके थे। फिर 19 अप्रैल की तिथि तय की गई। नगर आयुक्त स्वयं शामिल नहीं हुए। दूसरे अधिकारियों को भी शामिल होने से रोक दिया गया। भाजपा पार्षदों द्वारा नारेबाजी के संबंध में पूछे जाने पर कहा कि मेरे सामने सभी साथ थे। जवाहर भवन से आने के बाद क्या हुआ, इसकी जानकारी नही है।
नगर निगम के अधिकारियों ने साधी चुप्पी
नगर निगम के अधिकारी अधिवेशन के मसले पर चुप्पी साधे हैं। कोई बता नहीं रहा है कि अधिवेशन वैधानिक है या नहीं। दबी जुबान से जरूर कह रहे हैं कि जब एजेंडा जारी नहीं हुआ और न ही सचिव सचिवालय द्वारा किसी तरह का नोटिस जारी किया गया तो अधिवेशन वैधानिक कैसे। नगर आयुक्त गौरांग राठी सूरत में आयोजित स्मार्ट सिटी सम्मेलन में शामिल होने गए है। अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त अवकाश पर हैं। सहायक नगर आयुक्त ठाकुर प्रसाद सिंह ने कहा कि इस संबंध में सचिव सचिवालय पूरी स्थिति स्पष्ट करेंगे। सचिव सचिवालय विनय कुमार राय अपने कमरे में नहीं थे। कर्मचारी ने बताया कि वह डॉक्टर के यहां गए हैं। नगर निगम के मीडिया प्रभारी राजेश कुमार गुप्ता का कहना है कि अधिवेशन से संबंधित किसी तरह की अधिकारिक सूचना नहीं है।
भाजपा के पार्षदों के बदले तेवर
अलीगढ़। नगर आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले भाजपा पार्षदों के तेवर कुछ बदले-बदले नजर आ रहे थे। अधिवेशन के बाद नगर आयुक्त से ज्यादा महापौर के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। यह भी आरोप लगा रहे थे कि महापौर अधिकारियों से अंदरखाने मिले हैं। भाजपा पार्षदों के व्यवहार में अचानक बदलाव से कुछ लोग हतप्रभ भी थे। सूत्रों का कहना है कि संगठन से कुछ दिशा-निर्देश मिले हैं, जिसके बाद उनके व्यवहार में बदलाव आया है।
जलापूर्ति, सफाई से संबंधित मुद्दे है गर्म
जलापूर्ति, सफाई, टैक्स एवं पथ प्रकाश व्यवस्था आदि से संबंधित समस्याओं का समाधान कराने के लिए भाजपा पार्षद नगर निगम का अधिवेशन बुलाने की मांग कर रहे थे। इससे संबंधित एक ज्ञापन गत दिनों महापौर को भी दिया था।
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महापौर मो. फुरकान ने पार्षदों को पत्र जारी कर मंगलवार को 11 बजे से सामान्य बोर्ड अधिवेशन में बुलाया था। सदन में भाजपा सहित विभिन्न दलों के 40 से अधिक पार्षद पहुंचे थे। सदन में मंच पर सिर्फ महापौर थे। सदन शुरू होते ही सपा के पार्षद मुशर्रफ ने सवाल उठाया कि इस अधिवेशन का क्या औचित्य है, जिसमें नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त एवं सचिव सचिवालय के साथ ही नगर निगम का कोई भी अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित नहीं हैं। उन्होंने महापौर से अधिवेशन स्थगित करने की मांग की। इतना सुनते ही भाजपा पार्षद भड़क गए और मुशर्रफ का घेराव कर हंगामा करने लगे। कुछ समय तक सदन में जमकर हंगामा हुआ। पार्षद सीट पर खड़े होकर नगर आयुक्त के खिलाफ नारे लगाने लगे।
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इसी बीच भाजपा पार्षद सुरेंद्र पचौरी नगर आयुक्त गौरांग राठी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लेकर आए। पार्षद नगर आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। भाजपा पार्षद भारत माता की जय, मोदी-योगी जिंदाबाद एवं भाजपा जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। नामित पार्षद संजय पंडित ने बेंच पर चढ़कर महापौर मो. फुरकान पर निशाना साधा। कहा कि महापौर साहब आप अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। पार्षद महापौर पर हमलावर होते, इसके लिए पहले ही एक कर्मचारी ने राष्ट्रगान बजा दिया। उपसभापति डॉ. मुकेश शर्मा ने रिकार्डिंग बंद करा दी। इसी बीच पार्षद मुशर्रफ मंच पर पहुंच गए और माइक लेकर राष्ट्रगान शुरू करवा दिया। राष्ट्रगान के सम्मान में सभी पार्षद खड़े हो गए। इसके बाद महापौर मो. फुरकान मंच से उतरे और गाड़ी में बैठकर चले गए। महापौर को घेरने का प्रयास कर रहे भाजपा पार्षद हाथ मलते रह गए। बाद भाजपा पार्षद डॉ. मुकेश शर्मा, कुलदीप पांडेय, वीरेंद्र सिंह, दिनेश गुप्ता, अनिल सेंगर, पुष्पेंद्र सिंह जादौन, सुरेंद्र पचौरी, विजय तोमर, हेमंत गुप्ता आदि जवाहर भवन के बरामदे में बैठकर महापौर एवं नगर आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
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ये कैसा अधिवेशन, ना एजेंडा, ना मिनट्स
नगर निगम के इतिहास में ये पहला अधिवेशन है, जिसका न तो एजेंडा जारी किया गया और न ही नगर निगम के अधिकारी शामिल हुए। सचिवालय द्वारा भी अधिवेशन से संबंधित नोटिस जारी नहीं किया गया। इसलिए अधिवेशन की वैधानिकता पर भाजपा के ही कुछ पार्षद सवाल उठा रहे हैं। उपसभापति डॉ. मुकेश शर्मा, भाजपा के मुख्य सचेतक दिनेश गुप्ता एवं कुलदीप पांडेय सहित कई पार्षदों का कहना है कि यह अधिवेशन वैधानिक नहीं है, क्योंकि न तो एजेंडा जारी किया गया और न ही मिनट्स बने हैं, जब नगर आयुक्त सामने होते तो निंदा प्रस्ताव का औचित्य था।
शासन के पास भेजेंगे निंदा प्रस्ताव : महापौर
महापौर मो. फुरकान ने कहा कि सदन में पूर्ण बहुमत से निंदा प्रस्ताव पारित किया गया है। इस प्रस्ताव को शासन के पास भेजेंगे। भाजपा के पार्षद सुरेंद्र पचौरी ने प्रस्ताव रखा था, जिसे सभी सदस्यों ने सहमति से पारित कर दिया। उन्होंने कहा कि पहले आचार संहिता के कारण बोर्ड की बैठक नहीं हुई। एक तिथि को पहले अधिकारी टाल चुके थे। फिर 19 अप्रैल की तिथि तय की गई। नगर आयुक्त स्वयं शामिल नहीं हुए। दूसरे अधिकारियों को भी शामिल होने से रोक दिया गया। भाजपा पार्षदों द्वारा नारेबाजी के संबंध में पूछे जाने पर कहा कि मेरे सामने सभी साथ थे। जवाहर भवन से आने के बाद क्या हुआ, इसकी जानकारी नही है।
नगर निगम के अधिकारियों ने साधी चुप्पी
नगर निगम के अधिकारी अधिवेशन के मसले पर चुप्पी साधे हैं। कोई बता नहीं रहा है कि अधिवेशन वैधानिक है या नहीं। दबी जुबान से जरूर कह रहे हैं कि जब एजेंडा जारी नहीं हुआ और न ही सचिव सचिवालय द्वारा किसी तरह का नोटिस जारी किया गया तो अधिवेशन वैधानिक कैसे। नगर आयुक्त गौरांग राठी सूरत में आयोजित स्मार्ट सिटी सम्मेलन में शामिल होने गए है। अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त अवकाश पर हैं। सहायक नगर आयुक्त ठाकुर प्रसाद सिंह ने कहा कि इस संबंध में सचिव सचिवालय पूरी स्थिति स्पष्ट करेंगे। सचिव सचिवालय विनय कुमार राय अपने कमरे में नहीं थे। कर्मचारी ने बताया कि वह डॉक्टर के यहां गए हैं। नगर निगम के मीडिया प्रभारी राजेश कुमार गुप्ता का कहना है कि अधिवेशन से संबंधित किसी तरह की अधिकारिक सूचना नहीं है।
भाजपा के पार्षदों के बदले तेवर
अलीगढ़। नगर आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले भाजपा पार्षदों के तेवर कुछ बदले-बदले नजर आ रहे थे। अधिवेशन के बाद नगर आयुक्त से ज्यादा महापौर के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। यह भी आरोप लगा रहे थे कि महापौर अधिकारियों से अंदरखाने मिले हैं। भाजपा पार्षदों के व्यवहार में अचानक बदलाव से कुछ लोग हतप्रभ भी थे। सूत्रों का कहना है कि संगठन से कुछ दिशा-निर्देश मिले हैं, जिसके बाद उनके व्यवहार में बदलाव आया है।
जलापूर्ति, सफाई से संबंधित मुद्दे है गर्म
जलापूर्ति, सफाई, टैक्स एवं पथ प्रकाश व्यवस्था आदि से संबंधित समस्याओं का समाधान कराने के लिए भाजपा पार्षद नगर निगम का अधिवेशन बुलाने की मांग कर रहे थे। इससे संबंधित एक ज्ञापन गत दिनों महापौर को भी दिया था।