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भाजपा नेता के बूथ अध्यक्ष भतीजे की गोली मारकर हत्या
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सचिन कुमार का फाइल फोटो।
- फोटो : PISAWA
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सोमवार की शाम करीब छह बजे भाजपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के बृज प्रांत के मंत्री व जिला पंचायत सदस्य दिनेश वकील के भतीजे 28 वर्षीय भाजपा बूथ अध्यक्ष सचिन की पांच नकाबपोश हमलावरों ने गोलियों से छलनी कर हत्या कर दी। पांच से छह गोलियां लगने की आशंका जताई जा रही है। पिसावा थाना क्षेत्र के गांव नगलिया बिजना तिराहे पर सरेशाम हुई इस हत्या से भगदड़ मच गई। दुकानें बंद कर दुकानदार भाग खड़े हुए। मृतक पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। जट्टारी के पूर्व चेयरमैन चौ. मनवीर सिंह पर वर्ष 2016 में की गई फायरिंग में आरोपी था। भाजपा नेता ने जट्टारी के पूर्व चेयरमैन चौ. मनवीर सिंह पर भाड़े के हत्यारे भेजकर भतीजे की हत्या कराने का आरोप लगाया है।
पिसावा थाना क्षेत्र के गांव दमुआका निवासी दिनेश वकील का भतीजा भाजपा बूथ अध्यक्ष सचिन पुत्र वीरपाल सिंह सोमवार की शाम करीब साढ़े बजे फसलों के लिए कीटनाशक लेने नगलिया बिजना तिराहे पहुंचा था। वहां पर कुछ परिचित मिल गए, जिस पर एक दुकान पर बैठकर बातें कर रहा था। इसी बीच स्विफ्ट कार सवार पांच नकाबपोश हमलावर वहां पहुंचे। गाड़ी से पांचों के उतरने के बाद चार एक रास्ते की ओर चले गए जबकि एक ने सचिन पर निशाना साधकर गोली चलाई। गोली लगते ही सचिन अपने गांव की ओर भागा। उस रास्ते पर घात लगाए अन्य चार हमलावरों ने गोलियां चलाकर उसे छलनी कर दिया और भाग निकले।
वारदात के दस मिनट बाद ही पिसावा पुलिस मौके पर पहुंच गई। सचिन को खैर ले जाया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका। मौके से पुलिस को 12 बोर के 2 और 315 बोर के 2 खोखे मिले हैं। भाजपा नेता दिनेश वकील ने जट्टारी के पूर्व चेयरमैन चौ. मनवीर सिंह पर ही भतीजे की हत्या कराने का आरोप मढ़ा। कहा कि चौ. मनवीर सिंह उनसे राजनीतिक रंजिश मानते हैं। 25 अक्तूबर 2016 को चौ. मनवीर सिंह पर हुई फायरिंग में उन्हें और भतीजे सचिन समेत तीन के खिलाफ फर्जी रिपोर्ट मनवीर सिंह ने दर्ज करवाई थी, जबकि वह मौके पर नहीं थे।
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दिनेश वकील के अनुसार मनवीर ने कुछ बाहर के व कुछ गांव के लोगों से मिलकर यह हत्या कराई है। दिनेश के अनुसार अभी तहरीर तैयार की जा रही है। इधर, परिवार के लोग देर रात शव लेकर पोस्टमार्टम केंद्र पर मौजूद थे और रात में ही पोस्टमार्टम कराने की कवायद चल रही थी।
शातिर थे हमलावर, पहले ही घेरा गांव का रास्ता
पांचों नकाबपोश हमलावर बेहद शातिर थे। उन्हें अच्छी तरह आभास था कि गोली चलते ही सचिन अपने गांव की ओर भागेगा। इसलिए गाड़ी से उतरने के बाद चार हमलावरों ने दमुआका गांव के रास्ते पर ही पहले से घेराबंदी कर ली थी। पहली गोली लगने पर जैसे ही सचिन अपने गांव की ओर भागा तो पहले से घात लगाए हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ कई गोलियां दाग दीं।
सचिन के दो बच्चे, पिता का पिसावा में क्लीनिक
आठ साल पहले सीमा से सचिन का विवाह हुआ था। वह दो बच्चों के पिता थे। गांव में खेतीबाड़ी संभालते थे। उनके पिता का पिसावा में क्लीनिक है। वह अपने पिता की इकलौती संतान थे। खेतीबाड़ी के लिए ही कीटनाशक खरीदने नगलिया बिजना तिराहे पर पहुंचे थे। 25 अक्तूबर 2016 को जट्टारी के तत्कालीन चेयरमैन चौ. मनवीर सिंह पर हुई फायरिंग में सचिन के साथ ही उनके चाचा दिनेश वकील और गांव दमुआका निवासी धर्मेंद्र को नामजद आरोपी बनाया गया था। पुलिस की जांच में दिनेश वकील व धर्मेंद्र का नाम तो मामले से हट गया था लेकिन सचिन अभी भी आरोपी थे।
मनवीर सिंह से रंजिश की यह है वजह
जट्टारी कस्बा निवासी एक कारोबारी से सचिन के चचेरे भाई प्रशांत पुत्र रनवीर सिंह का रुपयों के लेनदेन का कुछ मामला था। आरोप है कि तत्कालीन चेयरमैन चौ. मनवीर सिंह ने उस कारोबारी पर दबाव डालकर सचिन और प्रशांत के खिलाफ पिसावा थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इसके बाद पुलिस ने सचिन को पकड़कर पिसावा थाने में पीटा था। यहीं से चौ. मनवीर सिंह और सचिन के बीच रंजिश शुरू हुई थी। पोस्टमार्टम पर मौजूद परिवार वालों ने बताया कि गांव में बीते पंचायत चुनाव में मौजूदा प्रधान के खिलाफ इस पक्ष ने चुनाव लड़ाया था। वहां भी हमारे मतभेद चल रहे थे।
पिसावा के दमुआका निवासी सचिन की देर शाम चार से पांच गोली मारकर हत्या की गई है। हालांकि अभी तहरीर नहीं मिली है। मगर जांच जारी है। सचिन पर भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उन पुराने मुकदमों को जोड़कर भी जांच की जा रही है। बाकी तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
संजीव दीक्षित सीओ खैर
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पिसावा थाना क्षेत्र के गांव दमुआका निवासी दिनेश वकील का भतीजा भाजपा बूथ अध्यक्ष सचिन पुत्र वीरपाल सिंह सोमवार की शाम करीब साढ़े बजे फसलों के लिए कीटनाशक लेने नगलिया बिजना तिराहे पहुंचा था। वहां पर कुछ परिचित मिल गए, जिस पर एक दुकान पर बैठकर बातें कर रहा था। इसी बीच स्विफ्ट कार सवार पांच नकाबपोश हमलावर वहां पहुंचे। गाड़ी से पांचों के उतरने के बाद चार एक रास्ते की ओर चले गए जबकि एक ने सचिन पर निशाना साधकर गोली चलाई। गोली लगते ही सचिन अपने गांव की ओर भागा। उस रास्ते पर घात लगाए अन्य चार हमलावरों ने गोलियां चलाकर उसे छलनी कर दिया और भाग निकले।
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वारदात के दस मिनट बाद ही पिसावा पुलिस मौके पर पहुंच गई। सचिन को खैर ले जाया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका। मौके से पुलिस को 12 बोर के 2 और 315 बोर के 2 खोखे मिले हैं। भाजपा नेता दिनेश वकील ने जट्टारी के पूर्व चेयरमैन चौ. मनवीर सिंह पर ही भतीजे की हत्या कराने का आरोप मढ़ा। कहा कि चौ. मनवीर सिंह उनसे राजनीतिक रंजिश मानते हैं। 25 अक्तूबर 2016 को चौ. मनवीर सिंह पर हुई फायरिंग में उन्हें और भतीजे सचिन समेत तीन के खिलाफ फर्जी रिपोर्ट मनवीर सिंह ने दर्ज करवाई थी, जबकि वह मौके पर नहीं थे।
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दिनेश वकील के अनुसार मनवीर ने कुछ बाहर के व कुछ गांव के लोगों से मिलकर यह हत्या कराई है। दिनेश के अनुसार अभी तहरीर तैयार की जा रही है। इधर, परिवार के लोग देर रात शव लेकर पोस्टमार्टम केंद्र पर मौजूद थे और रात में ही पोस्टमार्टम कराने की कवायद चल रही थी।
शातिर थे हमलावर, पहले ही घेरा गांव का रास्ता
पांचों नकाबपोश हमलावर बेहद शातिर थे। उन्हें अच्छी तरह आभास था कि गोली चलते ही सचिन अपने गांव की ओर भागेगा। इसलिए गाड़ी से उतरने के बाद चार हमलावरों ने दमुआका गांव के रास्ते पर ही पहले से घेराबंदी कर ली थी। पहली गोली लगने पर जैसे ही सचिन अपने गांव की ओर भागा तो पहले से घात लगाए हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ कई गोलियां दाग दीं।
सचिन के दो बच्चे, पिता का पिसावा में क्लीनिक
आठ साल पहले सीमा से सचिन का विवाह हुआ था। वह दो बच्चों के पिता थे। गांव में खेतीबाड़ी संभालते थे। उनके पिता का पिसावा में क्लीनिक है। वह अपने पिता की इकलौती संतान थे। खेतीबाड़ी के लिए ही कीटनाशक खरीदने नगलिया बिजना तिराहे पर पहुंचे थे। 25 अक्तूबर 2016 को जट्टारी के तत्कालीन चेयरमैन चौ. मनवीर सिंह पर हुई फायरिंग में सचिन के साथ ही उनके चाचा दिनेश वकील और गांव दमुआका निवासी धर्मेंद्र को नामजद आरोपी बनाया गया था। पुलिस की जांच में दिनेश वकील व धर्मेंद्र का नाम तो मामले से हट गया था लेकिन सचिन अभी भी आरोपी थे।
मनवीर सिंह से रंजिश की यह है वजह
जट्टारी कस्बा निवासी एक कारोबारी से सचिन के चचेरे भाई प्रशांत पुत्र रनवीर सिंह का रुपयों के लेनदेन का कुछ मामला था। आरोप है कि तत्कालीन चेयरमैन चौ. मनवीर सिंह ने उस कारोबारी पर दबाव डालकर सचिन और प्रशांत के खिलाफ पिसावा थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इसके बाद पुलिस ने सचिन को पकड़कर पिसावा थाने में पीटा था। यहीं से चौ. मनवीर सिंह और सचिन के बीच रंजिश शुरू हुई थी। पोस्टमार्टम पर मौजूद परिवार वालों ने बताया कि गांव में बीते पंचायत चुनाव में मौजूदा प्रधान के खिलाफ इस पक्ष ने चुनाव लड़ाया था। वहां भी हमारे मतभेद चल रहे थे।
पिसावा के दमुआका निवासी सचिन की देर शाम चार से पांच गोली मारकर हत्या की गई है। हालांकि अभी तहरीर नहीं मिली है। मगर जांच जारी है। सचिन पर भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उन पुराने मुकदमों को जोड़कर भी जांच की जा रही है। बाकी तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
संजीव दीक्षित सीओ खैर