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बर्ड फ्लू का खतरा.. पांच लाख परिंदों की निगरानी
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अतरौली के पॉल्ट्री फार्म का निरीक्षण करते सीवीओ डॉ. वीपी सिंह।
- फोटो : CITY OFFICE
कोरोना संक्रमण काल जारी है। कोरोना के नए स्ट्रेन ने दुनिया को हिला दिया है। इन सबके बीच बर्ड फ्लू की आशंका ने खलबली मचा दी है। जिले के तकरीबन पांच लाख से अधिक परिंदों के स्वास्थ्य की जांच जारी है। राहत की बात ये है कि अभी तक अलीगढ़ में इसका कोई मामला सामने नहीं आया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. बीपी सिंह ने बताया कि तहसीलवार पांच टीमें लगातार मौका मुआयना कर रही हैं, अभी तक बर्ड फ्लू का कोई केस नहीं मिला है। सर्वाधिक परिंदों वाली शेखा झील में जांच पड़ताल हुई है, जहां सभी पक्षी सामान्य मिले हैं। लगातार जांच जारी रहेगी। पक्षियों के समूहों में बर्ड फ्लू के लक्षण मिलने पर बीमार पक्षी को अलग कर लिया जाएगा।
अक्तूबर से दिसंबर के बीच शेखा झील में रूस, चीन, साइबेरिया सहित दूसरे ठंडे देशों से विदेशी परिंदे आते हैं। वर्तमान में झील और उसके आसपास लगभग एक लाख परिंदे हैं। फरवरी में विदेशी मेहमान वापस जाएंगे। इसके अलावा सरकारी अनुदान से संचालित जिले में तीन बड़े पोल्ट्री फार्म में भी एक लाख पक्षियों की जांच हुई है। निजी पोल्ट्री फार्म, लेयर फार्म, एग फार्म में भी वर्तमान में लगभग दो लाख पक्षी हैं। संचालनकर्ताओं ने अभी तक बर्ड फ्लू की कोई खबर नहीं दी है। रोजाना बाहर से आने वाले, होटलों में सप्लाई होने वाले एक लाख पक्षियों के कारोबारियों ने भी ऐसी कोई सूचना नहीं दी है। इसके बावजूद पशुपालन विभाग एहतियातन सभी के संपर्क में है और बीमारी पर नजर बनाए हुए हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. बीपी सिंह ने बताया कि तहसीलवार पांच टीमें गठित कर दी गई हैं, जिसमें हरेक टीम में एक डाक्टर, दो पशुधन प्रसार अधिकारी और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मिला कर पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है। ये टीमें लगातार भ्रमण पर हैं।
सरकारी अनुदान वाले फार्म हाउसों पर ज्यादा निगरानी
जिले में दतावती टिकटा गांव में 30-30 हजार मुर्गों के दो फार्म हैं। इनके अलावा दादों में स्टार पोल्ट्री फार्म है। ये तीनों सरकारी अनुदान प्राप्त हैं। दो-दो करोड़ की लागत वाले इन फार्मों पर लिए गए लोन के सापेक्ष पशुपालन विभाग के माध्यम से ब्याज का भुगतान किया जाता है। ब्याज अनुदान की ये रकम लगभग 35 से 40 लाख रुपये तक होती है। इसलिए ऐसे फार्म में बीमारी की जांच ज्यादा हो रही है। मुख्य पशु चिक्तिसाधिकारी डा. बीपी सिंह ने बताया कि फिलहाल कोई भी बीमारी या लक्षण नहीं मिले हैं। इसलिए सरकारी अनुदान वाले सभी फार्म सुरक्षित हैं।
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अक्तूबर से दिसंबर के बीच शेखा झील में रूस, चीन, साइबेरिया सहित दूसरे ठंडे देशों से विदेशी परिंदे आते हैं। वर्तमान में झील और उसके आसपास लगभग एक लाख परिंदे हैं। फरवरी में विदेशी मेहमान वापस जाएंगे। इसके अलावा सरकारी अनुदान से संचालित जिले में तीन बड़े पोल्ट्री फार्म में भी एक लाख पक्षियों की जांच हुई है। निजी पोल्ट्री फार्म, लेयर फार्म, एग फार्म में भी वर्तमान में लगभग दो लाख पक्षी हैं। संचालनकर्ताओं ने अभी तक बर्ड फ्लू की कोई खबर नहीं दी है। रोजाना बाहर से आने वाले, होटलों में सप्लाई होने वाले एक लाख पक्षियों के कारोबारियों ने भी ऐसी कोई सूचना नहीं दी है। इसके बावजूद पशुपालन विभाग एहतियातन सभी के संपर्क में है और बीमारी पर नजर बनाए हुए हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. बीपी सिंह ने बताया कि तहसीलवार पांच टीमें गठित कर दी गई हैं, जिसमें हरेक टीम में एक डाक्टर, दो पशुधन प्रसार अधिकारी और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मिला कर पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है। ये टीमें लगातार भ्रमण पर हैं।
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सरकारी अनुदान वाले फार्म हाउसों पर ज्यादा निगरानी
जिले में दतावती टिकटा गांव में 30-30 हजार मुर्गों के दो फार्म हैं। इनके अलावा दादों में स्टार पोल्ट्री फार्म है। ये तीनों सरकारी अनुदान प्राप्त हैं। दो-दो करोड़ की लागत वाले इन फार्मों पर लिए गए लोन के सापेक्ष पशुपालन विभाग के माध्यम से ब्याज का भुगतान किया जाता है। ब्याज अनुदान की ये रकम लगभग 35 से 40 लाख रुपये तक होती है। इसलिए ऐसे फार्म में बीमारी की जांच ज्यादा हो रही है। मुख्य पशु चिक्तिसाधिकारी डा. बीपी सिंह ने बताया कि फिलहाल कोई भी बीमारी या लक्षण नहीं मिले हैं। इसलिए सरकारी अनुदान वाले सभी फार्म सुरक्षित हैं।
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