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बैंकों के विलय को लेकर बैंक कर्मचारियों ने किया विरोध प्रदर्शन
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307-बैंकों के विलय होने के विरोध में प्रदर्शन करते हुए बैंककर्मी।
- फोटो : CITY OFFICE
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यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले शनिवार को बैंकों के विलय किए जाने के विरोध में ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स के कर्मचारियों व अधिकारियों ने धरना प्रदर्शन किया। यहां वक्ताओं ने कहा कि बैंकों के विलय करके निजीकरण की ओर बढ़ाया जा रहा है। भविष्य में इन बैंकों का कामकाज निजी हाथों में सौंपा जाएगा। जिससे धीरे धीरे इनका निजीकरण हो जाएगा। ऐसे में बैंकों की साख घट जाएगी। इसलिए जरूरी है कि बैंकों के विलय होने से रोका जाए। रामघाट रोड स्थित बैंक की शाखा पर धरना देकर प्रदर्शन करते कर्मचारियों ने कहा है कि वह शुरुआत से ही विलयकरण का विरोध कर रहे हैं। इसका विरोध करते रहेंगे। बैंकों के अलग अलग रहने से उनका कार्यक्षेत्र और विश्वसनीयता के साथ ग्राहकों तक पहुंच का अपना पूरा तंत्र है, जो विलयकरण के बाद दूसरे बैंकों के साथ समाहित हो जाएगा।
यूनियम संयोजक वीके शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने विलय का डूबती हुई अर्थव्यवस्था, लगातार बढ़ रही बेरोजगारी और उद्योग धंधों को राहत देने के लिए किया है। लेकिन इससे किसी को राहत नहीं मिलेगी। यह केवल ध्यान बांटने की बात है। इससे बैंकों में असंतोष व्याप्त होगा। कारोबारी लेनदेन भी प्रभावित होगा। जिसकी वजह से अर्थव्यवस्था को उल्टा नुकसान ही होगा। इस वक्त जरूरत है कि बैंकों में अधिक से अधिक नकदी की उपलब्धता कराई जाए। जिससे उद्योग धंधों को आवश्यकता अनुसार लोन दे सकें। ताकि उद्योग धंधों का विस्तारी करण हो सके। अगर उद्योग धंधों का विस्तार होगा तो रोजगार भी सृजित होगा और अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
केंद्र सरकार को बैंकों की डूबी हुई रकम को वापस लाने के लिए ठोस प्रयास करने चाहिए। देश के चुनिंदा बड़े बकाएदारों पर 80 फीसदी ऋण है। अगर यह मोटी रकम बसूल हो जाए तो बैंकों में नकदी की कमी नहीं रहेगी। इसके साथ ही अर्थव्यवस्था में गुणात्मक सुधार होगा। इससे रोजगार भी बढ़ जाएगा। कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन कर सरकार से विलयीकरण का निर्णय वापस लेने की मांग की। यहां एलान भी किया कि विलयीकरण का आदेश वापस लेने तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। धरना प्रदर्शन में अतुल सिंह, बीके मौर्या, शर्मिला कुलश्रेष्ठ, जितेंद्र कुमार, ओपी मौर्या, आरपी सिंह, मनोज कुमार आदि कई कर्मचारी और अधिकारी मौजूद रहे।
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यूनियम संयोजक वीके शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने विलय का डूबती हुई अर्थव्यवस्था, लगातार बढ़ रही बेरोजगारी और उद्योग धंधों को राहत देने के लिए किया है। लेकिन इससे किसी को राहत नहीं मिलेगी। यह केवल ध्यान बांटने की बात है। इससे बैंकों में असंतोष व्याप्त होगा। कारोबारी लेनदेन भी प्रभावित होगा। जिसकी वजह से अर्थव्यवस्था को उल्टा नुकसान ही होगा। इस वक्त जरूरत है कि बैंकों में अधिक से अधिक नकदी की उपलब्धता कराई जाए। जिससे उद्योग धंधों को आवश्यकता अनुसार लोन दे सकें। ताकि उद्योग धंधों का विस्तारी करण हो सके। अगर उद्योग धंधों का विस्तार होगा तो रोजगार भी सृजित होगा और अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
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केंद्र सरकार को बैंकों की डूबी हुई रकम को वापस लाने के लिए ठोस प्रयास करने चाहिए। देश के चुनिंदा बड़े बकाएदारों पर 80 फीसदी ऋण है। अगर यह मोटी रकम बसूल हो जाए तो बैंकों में नकदी की कमी नहीं रहेगी। इसके साथ ही अर्थव्यवस्था में गुणात्मक सुधार होगा। इससे रोजगार भी बढ़ जाएगा। कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन कर सरकार से विलयीकरण का निर्णय वापस लेने की मांग की। यहां एलान भी किया कि विलयीकरण का आदेश वापस लेने तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। धरना प्रदर्शन में अतुल सिंह, बीके मौर्या, शर्मिला कुलश्रेष्ठ, जितेंद्र कुमार, ओपी मौर्या, आरपी सिंह, मनोज कुमार आदि कई कर्मचारी और अधिकारी मौजूद रहे।
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