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निर्मला की आंखों में रोशनी लाने में ‘सहयोगी’ बना आयुष्मान

Thu, 03 Oct 2019 01:49 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो दीपक शर्मा
दीपक शर्मा Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Thu, 03 Oct 2019 01:49 AM IST
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Ayushman becomes 'aide' in bringing light to Nirmala's eyes
आयुष्मान भारत योजना की लाभार्थी निर्मला सहयोगी अपनी बेटी दीपिका के साथ कार्ड दिखाती - फोटो : Amar Ujala
दो वर्ष से आंखों में मोतियाबिंद के चलते देखने में लाचार निर्मला सहयोगी आयुष्मान भारत योजना के तहत मिले उपचार के बाद अब भली प्रकार से देख पा रही हैं। यहां तक कि सुई में धागा भी डाल पा रही हैं। निर्मला का उपचार गांधी नेत्र चिकित्सालय में योजना के तहत पूरी तरह नि:शुल्क हुआ है।
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निर्मला के पति विजय कुमार सहयोगी बताते हैं कि करीब दो वर्ष से मोतियाबिंद के चलते पत्नी को बहुत परेशानी हो रही थी। चलने फिरने में सहयोग लेना पड़ रहा था। परिवार के एक न एक सदस्य को उनके साथ हमेशा रहना पड़ता था।
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गांधी नेत्र चिकित्सालय में ही उपचार चल रहा था। आपरेशन ही एक मात्र इलाज बताया गया। दोनों आंखों में लेंस डाला जाना था, लेकिन इसमें आर्थिक अड़चन आ रही थी। एक वर्ष पहले आयुष्मान योजना के तहत गोल्ड कार्ड बना था। इसी वर्ष फरवरी में गांधी नेत्र चिकित्सालय में आपरेशन कराया। आपरेशन में एक रुपया खर्च नहीं हुआ है। आपरेशन के बाद अब निर्मला पूरी तरह सामान्य रूप से देख पा रही हैं।
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जिलाधिकारी के निर्देश पर और गांधी आई हास्पिटल ट्रस्ट के सचिव वीके बजाज की देखरेख में आयुष्मान योजना के तहत उपचार पाए मरीजों की निगरानी होती है। कोशिश होती है कि किसी को भी किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो। यहां पर आयुष्मान मित्र पीयूष गुप्ता मरीजों का पूरी सहयोग करते हैं।


मधुप लहरी, चिकित्सालय अधीक्षक, गांधी नेत्र चिकित्सालय।

 

आयुष्मान योजना के कार्ड बनाने के लिए किसी को भी कोई रुपये न दें। यह योजना पूरी तरह नि:शुल्क है। इस योजना के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों से भी सावधान रहें। अगर कोई आयुष्मान कार्ड के नाम पर रुपये मांगे तो पुलिस को सूचित करें। पात्र व्यक्तियों के कार्ड स्वास्थ्य विभाग सीएचसी और पीएचसी पर कैंप लगाकर बांट रहा है। ठगी करने वालों से सावधान रहने की जरूरत है। ज्यादा जानकारी के लिए जिला अस्पताल या सीएमओ कार्यालय पर आकर संपर्क कर सकते हैं।
डॉ. खान चंद, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत।

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