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अलीगढ़: पहले मुकदमे में आशुतोष मिश्रा बरी
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कभी अपराध की दुनिया में मुनीर का हमराह रहा कुख्यात अपराधी आशुतोष मिश्रा मंगलवार को अपने जरायम रिकार्ड के पहले मुकदमे में बरी कर दिया गया। अपर सत्र न्यायालय-3 से कमजोर साक्ष्यों व कमजोर गवाही के आधार पर हमले के मुकदमे में उसे बरी किया गया है। इस दौरान दिल्ली पुलिस कड़ी सुरक्षा के बीच उसे पेशी पर यहां लाई। स्थानीय पुलिस भी इस दौरान बेहद सतर्क रही।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता नीरज चौहान के अनुसार यह मुकदमा क्वार्सी थाने में नगला पटवारी के सलमान अहमद ने 14 फरवरी 2014 को दर्ज कराया था। आरोप के अनुसार मुकदमे के पूर्व में आशुतोष ने अब्दुल कादिर पर गोली चलाई थी। उसमें वादी सलमान ने सूचना दी थी। इसी बात से आशुतोष रंजिश मानता था। घटना वाले दिन वह अपने साथी शारिक संग तल्हा के पास रियाज कालोनी जा रहा था। तभी नामजद तत्कालीन एएमयू का लॉ छात्र देवला पुष्पराज चौराहा सिविल लाइंस फैजाबाद निवासी आशुतोष मिश्रा अपने साथी शम्स जिया व शादाब आदि के साथ आया और उसने फायरिंग कर दी। इस दौरान एक महिला महारानी व एक लड़के मो.आसिफ के गोली लगी।
मामले में सत्र परीक्षण के दौरान जख्मी गवाहों की ओर से आशुतोष को नहीं पहचाना गया और पुलिस के गवाहों की ओर से भी साक्ष्यों पर मजबूत बल नहीं दिया गया। मेडिकल करने वाले डॉक्टरों ने गोली लगने की पुष्टि नहीं की। इस आधार पर कहानी को कमजोर मानते हुए आशुतोष मिश्रा को आरोप से बरी किया गया है। एडीजीसी जेपी राजपूत के अनुसार अभी अदालत के निर्णय का अध्ययन नहीं किया है। गवाह पछद्रोही हो गए थे, शेष दो गवाहों को पेश करने के लिए अनुरोध किया गया था, जिसकी अदालत ने अनुमति नहीं दी। निर्णय के खिलाफ अपील का आधार बनेगा तो उच्च न्यायालय में अपील की जाएगी ।
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दिल्ली से आशुतोष को कड़ी सुरक्षा के बीच अलीगढ़ लाया गया था। एक कमांडो के अलावा आधा दर्जन दिल्ली पुलिस के कर्मी उसे साथ लेकर आए। खास बात यह रही कि आशुतोष को सिर्फ उसके अधिवक्ता के अलावा किसी से मिलने तक नहीं दिया गया। इस दौरान जिला पुलिस भी सतर्क रही।
इसी घटना के बाद आगे बढ़ी थी आशुतोष-मुनीर की जोड़ी
आशुतोष व मुनीर पर दर्ज मुकदमों के रिकार्ड पर गौर करें तो आशुतोष की गैर समुदाय की महिला मित्र से जुड़े विवाद में यह घटना हुई। इस घटना के बाद आशुतोष और दूसरे छात्र गुट में टकराव के हालात बन गए। इसी दौर में आशुतोष व मुनीर साथ हो गए और वे अपने विरोधियों से टकराव लेते लेते कब जरायम दुनिया में यहां तक पहुंचे। पता नहीं चला।
मुनीर से जुड़े लोग बना रहे आशुतोष से दूरी
मुनीर व आशुतोष में पैसों को लेकर जेल में रहते हुए मनमुटाव हो गया था। मुनीर की मौत के बाद उसके ग्रुप के सभी सदस्यों ने आशुतोष से दूरी बना ली है। आशुतोष ने दिल्ली एनसीआर व पूर्वी यूपी के कुछ नए ग्रुपों से खुद को जोड़ लिया है। वहीं मुनीर के साथी दूसरे ग्रुपों से जुड़ गए हैं। अंदरखाने दोनों ग्रुप आमने-सामने हैं।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता नीरज चौहान के अनुसार यह मुकदमा क्वार्सी थाने में नगला पटवारी के सलमान अहमद ने 14 फरवरी 2014 को दर्ज कराया था। आरोप के अनुसार मुकदमे के पूर्व में आशुतोष ने अब्दुल कादिर पर गोली चलाई थी। उसमें वादी सलमान ने सूचना दी थी। इसी बात से आशुतोष रंजिश मानता था। घटना वाले दिन वह अपने साथी शारिक संग तल्हा के पास रियाज कालोनी जा रहा था। तभी नामजद तत्कालीन एएमयू का लॉ छात्र देवला पुष्पराज चौराहा सिविल लाइंस फैजाबाद निवासी आशुतोष मिश्रा अपने साथी शम्स जिया व शादाब आदि के साथ आया और उसने फायरिंग कर दी। इस दौरान एक महिला महारानी व एक लड़के मो.आसिफ के गोली लगी।
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मामले में सत्र परीक्षण के दौरान जख्मी गवाहों की ओर से आशुतोष को नहीं पहचाना गया और पुलिस के गवाहों की ओर से भी साक्ष्यों पर मजबूत बल नहीं दिया गया। मेडिकल करने वाले डॉक्टरों ने गोली लगने की पुष्टि नहीं की। इस आधार पर कहानी को कमजोर मानते हुए आशुतोष मिश्रा को आरोप से बरी किया गया है। एडीजीसी जेपी राजपूत के अनुसार अभी अदालत के निर्णय का अध्ययन नहीं किया है। गवाह पछद्रोही हो गए थे, शेष दो गवाहों को पेश करने के लिए अनुरोध किया गया था, जिसकी अदालत ने अनुमति नहीं दी। निर्णय के खिलाफ अपील का आधार बनेगा तो उच्च न्यायालय में अपील की जाएगी ।
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दिल्ली से आशुतोष को कड़ी सुरक्षा के बीच अलीगढ़ लाया गया था। एक कमांडो के अलावा आधा दर्जन दिल्ली पुलिस के कर्मी उसे साथ लेकर आए। खास बात यह रही कि आशुतोष को सिर्फ उसके अधिवक्ता के अलावा किसी से मिलने तक नहीं दिया गया। इस दौरान जिला पुलिस भी सतर्क रही।
इसी घटना के बाद आगे बढ़ी थी आशुतोष-मुनीर की जोड़ी
आशुतोष व मुनीर पर दर्ज मुकदमों के रिकार्ड पर गौर करें तो आशुतोष की गैर समुदाय की महिला मित्र से जुड़े विवाद में यह घटना हुई। इस घटना के बाद आशुतोष और दूसरे छात्र गुट में टकराव के हालात बन गए। इसी दौर में आशुतोष व मुनीर साथ हो गए और वे अपने विरोधियों से टकराव लेते लेते कब जरायम दुनिया में यहां तक पहुंचे। पता नहीं चला।
मुनीर से जुड़े लोग बना रहे आशुतोष से दूरी
मुनीर व आशुतोष में पैसों को लेकर जेल में रहते हुए मनमुटाव हो गया था। मुनीर की मौत के बाद उसके ग्रुप के सभी सदस्यों ने आशुतोष से दूरी बना ली है। आशुतोष ने दिल्ली एनसीआर व पूर्वी यूपी के कुछ नए ग्रुपों से खुद को जोड़ लिया है। वहीं मुनीर के साथी दूसरे ग्रुपों से जुड़ गए हैं। अंदरखाने दोनों ग्रुप आमने-सामने हैं।