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गिरफ्तार रोहिंग्या रिमांड पर उगलेंगे सोना तस्करी के राज

Thu, 17 Jun 2021 11:52 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 17 Jun 2021 11:52 PM IST
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Arrested two rohingya in aligarh
पुराने शहर का मकदूम नगर इलाका रोहिंग्या का गढ़ बना हुआ है। करीब डेढ़ दशक से यहां की मीट इंडस्ट्री में ये लोग काम करते आ रहे हैं। काफी संख्या तो ऐसी है, जो वर्क परमिट के आधार पर रहते हैं और उन्होंने यहां के दस्तावेज तक बनवा लिए हैं। इसी आड़ में तमाम रोहिंग्या अवैध रूप से बसे हुए हैं। बुधवार रात पकड़े गए दोनों रोहिंग्या के विषय में इनपुट है कि ये लोग सोना तस्करी के धंधे से जुड़े हैं। इसकी एटीएस गहराई से जांच में जुटी है और रिमांड के दौरान इस धंधे का सच उजागर होगा। सबसे खास बात है कि इनमें से एक का साढ़ू दो माह पहले ही बांग्लादेश भाग गया है। उसके अचानक भागने के बाद से ही एटीएस की नजर इन पर गई।
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पकड़े गए रफीक व आमीन वर्ष 2012 में एक साथ अलीगढ़ आए थे। तब से वे लगातार यहां अपनी पत्नियों संग रह रहे थे। इस बीच दोनों पर चार-चार बच्चे भी हुए हैं। लॉकडाउन काल में नौकरी छूटने के कारण रफीक काम करने पंजाब चला गया, जबकि आमीन यहीं बना रहा। इसी बीच करीब दो माह पहले इनके ही साथ रहने वाला रफीक का साढ़ू हसन अचानक गायब हो गया। चूंकि, एटीएस यहां रहने वाले सभी लोगों की निगरानी करती है। एकाएक हसन के बांग्लादेश जाने या फिर कोलकाता में ही बस जाने का इनपुट मिला तो एटीएस हरकत में आई। इसी बीच रफीक भी पंजाब से लौट आया।
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इस दौरान इनके द्वारा काम धंधा बंद होने के बाद सोना तस्करी का इनपुट मिला। साथ में यह भी स्पष्ट हो गया कि ये लोग अवैध रूप से रह रहे हैं। इनके पास न तो वर्क परमिट है और न पासपोर्ट है। बस शरणार्थी कार्ड है। उसकी वैधता का भी कुछ अता पता नहीं है। इसी आधार पर रात एटीएस ने दोनों को दबोच लिया। पूछताछ में दोनों ने अपने पास से सोने के छह बिस्किट बरामद कराए। इसी के बाद एजेंसियों का शक पुख्ता हो गया। फिलहाल दोनों को जेल भेज दिया गया है। मगर रिमांड पर उनके सोना तस्करी रैकेट व भारत भेजने वाले मददगारों तक एटीएस पहुंचने का प्रयास करेगी। इधर, इनकी गिरफ्तारी के बाद से परिवार के साथ-साथ आसपास रह रहे लोग परेशान हैं। कहीं जांच की जद में यह लोग न आ जाएं।
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म्यांमार से अवैध रूप से आने की हुई पुष्टि
एटीएस की अब तक की जांच में यह तो साफ हो गया है कि ये लोग म्यांमार से अवैध रूप से आए थे। इनके द्वारा जो शरणार्थी कार्ड दिखाया गया है। उसकी जांच कराई जा रही है। देखने से वह फर्जी प्रतीत हो रहा है। यहां वे अन्य भी कई गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल थे। साथ में फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले रैकेट से भी जुड़े थे। इन सभी पहलुओं पर जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
होली के बाद से 150 लोगों के साथ गायब है सरगना बिलाल
वर्तमान में मकदूम नगर में रह रहे हैं करीब 120 रोहिंग्या
शहर में रोहिंग्या की गतिविधियों पर गौर करें तो यहां डेढ़ दशक से यह लोग रह रहे हैं। कहने को इनकी संख्या काफी है। मगर वर्क परमिट और पुलिस को जानकारी देकर रहने वालों की संख्या 300 के आसपास ही रही होगी। मगर होली से टेरर फंडिंग को लेकर अलीगढ़ से हुई गिरफ्तारी के बाद से यहां से इनका सरगना बिलाल करीब 150 लोगों सहित गायब है। वर्तमान में 120 करीब लोग यहां रह रहे हैं।
जानकार बताते हैं कि बिलाल ही इनका सरगना था। वह वर्क परमिट बनवाने से लेकर पुलिस व खुफिया टीमों के बीच सभी की जानकारी देने का काम करता था। वही लोगों की नौकरी लगवाने आदि का काम करता था। करीब एक दशक से वही इनका नेतृत्व करता था। मगर मार्च के बाद से अचानक से वह गायब हुआ है और अपने साथ 150 के करीब लोगों को लेकर गया है। उसके जाने के बाद से किसी से उसका संपर्क नहीं हुआ है। इसे लेकर भी तरह-तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्तमान में यहां 120 करीब रोहिंग्या रह रहे हैं।
अलीगढ़ के मीट एक्सपोर्ट से जुड़े हैं रोहिंग्या
म्यांमार से भागकर भारत पहुंचे हजारों रोहिंग्या परिवारों एक बड़ा धड़ा अलीगढ़ की मीट एक्सपोर्ट इंडस्ट्री से जुड़ा हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक वर्क परमिट और शरणार्थी के रूप में करीब 85 परिवारों के 400 से 500 रोहिंग्या शरणार्थी अलीगढ़ में रहकर यहां की मीट इंडस्ट्री में रोजगार पा रहे थे। बेशक इनका रहन सहन इलाके विशेष में है। फैक्ट्रियों के सिवाय इनकी गतिविधियां अन्य कहीं नहीं पाई जाती। मगर सुरक्षा कारणों पर गौर करें तो इनकी आड़ में देश विरोधी ताकतों के आकर छिपने और इनके द्वारा किसी भी समय वोटर कार्ड से लेकर भारतीय नागरिकता संबंधी अन्य दस्तावेज बनवाए जाने का अंदेशा बना रहता है। इसे लेकर खुफिया तंत्र सक्रिय रहता है और समय-समय पर निगरानी भी रहती है। खुद एसएसपी कलानिधि नैथानी कहते हैं कि अब इनकी एटीएस की मदद से नए सिरे से मॉनीटरिंग कराई जाएगी।

मीट इंडस्ट्री के साथ रोहिंग्या आना शुरू हुए
अलीगढ़ में 2012 के आसपास रोहिंग्या परिवारों का आना उस समय शुरू हुआ, जब यहां मीट एक्सपोर्ट इंडस्ट्री की जड़ें जमना शुरू हुईं। उस समय चंद परिवार गोंडा रोड के कमेला व गोंडा रोड के बाईपास की मीट फैक्ट्रियों में ही रहा करते थे। मगर, धीरे-धीरे मीट एक्सपोर्ट इंडस्ट्री के हब कहे जाने वाले मकदूम नगर में इन्हें ठिकाना मिलने लगा। इसके अलावा, करीब एक-एक दर्जन परिवार भुजपुरा व शाहजमाल में भी रह रहे हैं। इस तरह इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। एक एनजीओ के सर्वे के अनुसार यहां करीब एक हजार रोहिंग्या शहर की इन बस्तियों में रह रहे हैं।
रिमांड में इन सवालों पर पूछताछ
- सीमा पार कराने में भारत के कौन कौन से लोग इनके सहयोगी थे।
- उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ तक ये किसकी सहायता से पहुंचे थे।
- किसकी सहायता से ये लोग भारतीय जाली दस्तावेज बनवाने वाले थे।
- पीली धातु की तस्करी के अलावा ये लोग और कौन कौन से आपराधिक कृत्यों में लिप्त थे।
- इनके और कौन कौन से साथी अभी भी उत्तर प्रदेश या भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं।
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