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अलीगढ़ : पानी 'पीने' वाली फसलों का रकबा बढ़ा, जलस्तर घटा
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लंबे अरसे के बाद जिले में फिर से सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। इस बीच वर्षा न होने के कारण धान की रोपाई के बाद से पौध पीली पड़ने लगी है। खेतों में बड़ी बड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं। बेबस किसान फसल को बर्बाद होता देख परेशान है। बारिश न होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
धान सहित अन्य फसलों को बचाने के लिए अब किसानों के पास विद्युत मोटर एवं डीजल से चलने वाले पंपिंग सेट ही सहारा है। लेकिन इन दोनों का उपयोग करने से फसल की लागत बढ़ रही है और किसानों का आर्थिक नुकसान हो रहा है। पिछले दो वर्षों में अच्छी बारिश होने से जिले में धान की बेहतर पैदावार हुई थी। इस बार बड़े क्षेत्रफल में किसानों ने धान की रोपाई की है, लेकिन सूखे जैसे हालात देखकर किसान परेशान हैं। अब बारिश भी हुई तो फसल ठीक होने की उम्मीद कम है।
धान में बहाया जा रहा बेहिसाब पानी
जिले में साल दर साल धान का रकबा बढ़ रहा है और भू जल स्तर गिरता जा रहा है। धान की वैकल्पिक खेती किसानों को रास नहीं आ रही है। सिंचाई की विधि किसान बदलने को तैयार नहीं है। दूसरी फसलों में लगातार घाटा सहने के बाद किसानों का रुझान धान की तरफ और बढ़ गया है। नतीजा, बीते 20 साल में भू जल स्तर लगातार गिरा है। अब सही निर्णय लेने का समय है कि आज मुनाफा चाहिए या भविष्य में पीने का पानी। खेती के मौजूदा तौर-तरीके कहते हैं कि हालात बिगड़ेंगे। किसान बताते हैं कि खेतों में कुएं थे। 50 से 70 फुट गहरा कुआं खोदना पड़ता था। नीचे पानी मिल जाता था। वर्ष 2000 तक हालात ठीक थे। उसके बाद भू जल स्तर लगातार गिरता गया और ट्यूबवेल की जगह सबमर्सिबल ने ले ली है। आज 400 फुट गहराई में जाकर भी यह गारंटी नहीं है कि पानी उपलब्ध हो जाएगा। लेकिन धान में बाढ़ की तरह पानी बहाया जा रहा है।
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बारिश न होने से बढ़ रही टेंशन
भीषण गर्मी और उमस से हर कोई परेशान हैं। मानसून की बेरुखी से किसानों से लेकर कृषि विभाग के अधिकारी सूखे की आशंका से चिंतित हैं। खरीफ की प्रमुख फसल धान ने सबसे ज्यादा चिंता बढ़ा दी है। धान में बार-बार पानी लगा रहे किसान लगातार बारिश की दुआ मांग रहे हैं। हालत इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब कृषि विभाग धान की जगह बाजरा की फसल लगाने की सलाह देने लगा है।
वर्षा न होने से खेतों में दरारें पड़ गई हैं। धान के साथ ही दलहन, चना, ज्वार, बाजरा, अरहर, मक्का, उड़द, मूंग जैसी फसलें भी बर्बाद हो जाएंगी। इस बार किसानों ने उम्मीद से ज्यादा धान की फसल लगाई है, लेकिन वर्षा ने सब कुछ खराब कर दिया है। ऐसी ही स्थिति कुछ दिन और बनी रही तो जनपद को सूखा घोषित किया जा सकता है।
यशराज सिंह, उप कृषि निदेशक
जिले में प्रमुख फसलों का रकवा
फसल का नाम, रकवा हेक्टेयर में
गेहूं, 88053
धान, 87082
मक्का, 19880
बाजरा, 85427
उड़द, 479
मूंग, 1092
अरहर, 1109
गन्ना, 5989
पिछले पांच साल में अगस्त माह में हुई बारिश
वर्ष, मानक वर्षा, वर्षा
2017, 193, 71.4
2018, 193, 94.8
2019,193, 144.98
2020,193, 145.92
2021,193,100.48
( नोट - वर्षा मिमी.में )
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धान सहित अन्य फसलों को बचाने के लिए अब किसानों के पास विद्युत मोटर एवं डीजल से चलने वाले पंपिंग सेट ही सहारा है। लेकिन इन दोनों का उपयोग करने से फसल की लागत बढ़ रही है और किसानों का आर्थिक नुकसान हो रहा है। पिछले दो वर्षों में अच्छी बारिश होने से जिले में धान की बेहतर पैदावार हुई थी। इस बार बड़े क्षेत्रफल में किसानों ने धान की रोपाई की है, लेकिन सूखे जैसे हालात देखकर किसान परेशान हैं। अब बारिश भी हुई तो फसल ठीक होने की उम्मीद कम है।
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धान में बहाया जा रहा बेहिसाब पानी
जिले में साल दर साल धान का रकबा बढ़ रहा है और भू जल स्तर गिरता जा रहा है। धान की वैकल्पिक खेती किसानों को रास नहीं आ रही है। सिंचाई की विधि किसान बदलने को तैयार नहीं है। दूसरी फसलों में लगातार घाटा सहने के बाद किसानों का रुझान धान की तरफ और बढ़ गया है। नतीजा, बीते 20 साल में भू जल स्तर लगातार गिरा है। अब सही निर्णय लेने का समय है कि आज मुनाफा चाहिए या भविष्य में पीने का पानी। खेती के मौजूदा तौर-तरीके कहते हैं कि हालात बिगड़ेंगे। किसान बताते हैं कि खेतों में कुएं थे। 50 से 70 फुट गहरा कुआं खोदना पड़ता था। नीचे पानी मिल जाता था। वर्ष 2000 तक हालात ठीक थे। उसके बाद भू जल स्तर लगातार गिरता गया और ट्यूबवेल की जगह सबमर्सिबल ने ले ली है। आज 400 फुट गहराई में जाकर भी यह गारंटी नहीं है कि पानी उपलब्ध हो जाएगा। लेकिन धान में बाढ़ की तरह पानी बहाया जा रहा है।
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बारिश न होने से बढ़ रही टेंशन
भीषण गर्मी और उमस से हर कोई परेशान हैं। मानसून की बेरुखी से किसानों से लेकर कृषि विभाग के अधिकारी सूखे की आशंका से चिंतित हैं। खरीफ की प्रमुख फसल धान ने सबसे ज्यादा चिंता बढ़ा दी है। धान में बार-बार पानी लगा रहे किसान लगातार बारिश की दुआ मांग रहे हैं। हालत इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब कृषि विभाग धान की जगह बाजरा की फसल लगाने की सलाह देने लगा है।
वर्षा न होने से खेतों में दरारें पड़ गई हैं। धान के साथ ही दलहन, चना, ज्वार, बाजरा, अरहर, मक्का, उड़द, मूंग जैसी फसलें भी बर्बाद हो जाएंगी। इस बार किसानों ने उम्मीद से ज्यादा धान की फसल लगाई है, लेकिन वर्षा ने सब कुछ खराब कर दिया है। ऐसी ही स्थिति कुछ दिन और बनी रही तो जनपद को सूखा घोषित किया जा सकता है।
यशराज सिंह, उप कृषि निदेशक
जिले में प्रमुख फसलों का रकवा
फसल का नाम, रकवा हेक्टेयर में
गेहूं, 88053
धान, 87082
मक्का, 19880
बाजरा, 85427
उड़द, 479
मूंग, 1092
अरहर, 1109
गन्ना, 5989
पिछले पांच साल में अगस्त माह में हुई बारिश
वर्ष, मानक वर्षा, वर्षा
2017, 193, 71.4
2018, 193, 94.8
2019,193, 144.98
2020,193, 145.92
2021,193,100.48
( नोट - वर्षा मिमी.में )