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आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद दिया जाए : राज्यपाल
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राज्यपाल आनंदी बेन ने आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था सुधारने के लिये गांव-गांव में आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद दिलाने की व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि गोद लेने वाली संस्था या व्यक्ति कम से कम तीन महीने में एक बार केंद्र पहुंच कर निरीक्षण करें। इसका व्यापक असर होगा और केंद्र बेहतर होगा। इसमें जनप्रतिनिधि और सामान्य लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि किसी भी देश के लिए बच्चे भविष्य की धरोहर होते हैं। यदि बच्चे कु पोषित, कमजोर होंगे तो राष्ट्र सशक्त कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में उसे 6 वर्ष आयु तक के बच्चे आते हैं। ऐसे बच्चों के पोषण एवं शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। वर्तमान सरकार की विशेष पहल आंगनबाड़ी विद्यालयों एवं केंद्रों को प्राइवेट स्कूलों की भांति विकसित किया जा रहा है, यह एक अच्छी एवं सराहनीय पहल है। आंगनबाड़ी केंद्रों में साफ-सफाई, रंग-रोगन के साथ ही शुद्ध पेयजल, स्वच्छ शौचालय, खिलौने, आकर्षक एवं रंगीन मेज व कुर्सियों का समुचित प्रबंध किया जा रहा है, जिससे बच्चों का केंद्रों के प्रति आकर्षण बढ़े।
उन्होंने कहा कि जनपद के धनाढ्य व्यक्ति एवं महाविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों के संचालनकर्ताओं को चाहिए कि वह कम से कम 5-5 आंगनबाड़ी केंद्र गोद लें। यदि किसी कार्य में जनता का सहयोग प्राप्त होता है तो समाज में एक अलग ही बदलाव देखने को मिलता है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में कार्य कर रही आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को समय-समय पर खून की जांच कराते रहने की सलाह दी। उन्होंने कुरीतियों को समाप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने बाल विवाह को रोकने और प्रदेश सरकार द्वारा संचालित सामूहिक विवाह योजना में जन समान्य को बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करने का आह्वान किया।
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उन्होंने कहा कि किसी भी देश के लिए बच्चे भविष्य की धरोहर होते हैं। यदि बच्चे कु पोषित, कमजोर होंगे तो राष्ट्र सशक्त कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में उसे 6 वर्ष आयु तक के बच्चे आते हैं। ऐसे बच्चों के पोषण एवं शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। वर्तमान सरकार की विशेष पहल आंगनबाड़ी विद्यालयों एवं केंद्रों को प्राइवेट स्कूलों की भांति विकसित किया जा रहा है, यह एक अच्छी एवं सराहनीय पहल है। आंगनबाड़ी केंद्रों में साफ-सफाई, रंग-रोगन के साथ ही शुद्ध पेयजल, स्वच्छ शौचालय, खिलौने, आकर्षक एवं रंगीन मेज व कुर्सियों का समुचित प्रबंध किया जा रहा है, जिससे बच्चों का केंद्रों के प्रति आकर्षण बढ़े।
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उन्होंने कहा कि जनपद के धनाढ्य व्यक्ति एवं महाविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों के संचालनकर्ताओं को चाहिए कि वह कम से कम 5-5 आंगनबाड़ी केंद्र गोद लें। यदि किसी कार्य में जनता का सहयोग प्राप्त होता है तो समाज में एक अलग ही बदलाव देखने को मिलता है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में कार्य कर रही आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को समय-समय पर खून की जांच कराते रहने की सलाह दी। उन्होंने कुरीतियों को समाप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने बाल विवाह को रोकने और प्रदेश सरकार द्वारा संचालित सामूहिक विवाह योजना में जन समान्य को बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करने का आह्वान किया।
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