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एएमयू में नागरिकता कानून के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन जारी, फूंका पुतला, उछाले जूते

Fri, 17 Jan 2020 08:39 PM IST
अलीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Fri, 17 Jan 2020 08:39 PM IST
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AMU Stdudents Protest Against CAA and NRC
एएमयू में छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

नागरिकता कानून को लेकर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन जारी है। नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी, एनपीआर, जेएनयू हिंसा के विरोध के साथ-साथ अब कुलपति और रजिस्ट्रार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को एएमयू में विरोध प्रदर्शन के बीच सभी मर्यादाएं तार-तार हो गईं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मौके पर पहुंची प्रॉक्टर टीम पर जूता फेंका और अभद्रता की। साथ ही प्रॉक्टर गो बैक के नारे भी लगाए। इससे पहले छात्रों ने बाब-ए-सैयद पर तिरंगा झंडा लगा दिया। बाब-ए-सैयद धरना स्थल पर ही जुमे की नमाज भी पढ़ी गई। 

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शुक्रवार को एएमयू के बाब-ए-सैयद पर धरने का 33वां दिन था। शुक्रवार को जुमे की नमाज धरना स्थल पर ही पढ़ने की घोषणा की गई थी। नमाज के बाद छात्र सभा की शक्ल में इकट्ठा हुए। इस बीच धरना स्थल पर प्रॉक्टर प्रो. अफीफउल्लाह के साथ पहुंची टीम का विरोध शुरू हो गया। प्रॉक्टर गो बैक, गो बैक के नारे लगने लगे। इसी बीच धरना स्थल पर ही प्राक्टर टीम की ओर जूता फेंक दिया गया। इसको लेकर दोनों पक्षों की ओर से नोकझोंक होने लगी। मौके पर मौजूद छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन ने दोनों पक्षों को शांत करने का प्रयास किया। काफी देर तक दोनों पक्षों में नोकझोंक और आरोप प्रत्यारोप के बाद मामला शांत हुआ। साथ ही धरना प्रदर्शन में कुलपति और रजिस्ट्रार के इस्तीफे की मांग भी की गई। 
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हमारी नोकझोंक इस बात पर हुई थी कि ये लोग कहते हैं कि बाहरी तत्वों से हमें परेशानी है। बाहरी तत्वों के संबंध में यह पत्र लिखते हैं। बाहरी तत्वों से जान का खतरा बताते हैं। हम प्राक्टर टीम से यह पूछना चाहते हैं कि कल (बृहस्पतिवार) की रात वीएम हाल में अनजान लोग जब जांच पड़ताल कर रहे थे, बिना किसी परमीशन के। दो सिपाही एनसीसी कार्यालय में पाए गए। वह बाहरी तत्व नहीं थे क्या? उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। सिर्फ छात्रों को ही कार्रवाई का निशाना बनाने का क्या औचित्य है। जब यहां पर शांतिपूर्ण धरना चल रहा है तो छात्रों का उत्पीड़न क्यों किया जा रहा है। हो सकता है फिर से यह लोग हमारे ऊपर लाठी चार्ज करवाने का काम करें- हमजा सूफियान, निवर्तमान उपाध्यक्ष, छात्र संघ एएमयू
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जूता तो बहुत हल्की चीज है। इन लोगों का बायकाट होना बहुत जरूरी है। जनरल डायर की बात इन्हें चुभ गई जबकि उसके पीछे सवालिया निशान था। उसको लेकर धरने पर आ गए। 15 दिसंबर की घटना में पुलिस को प्रवेश की अनुमति नहीं थी। इजाजत 16 तारीख को मिली थी। जिस तरह सिपाही और हाल में लोग पाए जा रहे हैं, उससे साफ है कि असामाजिक तत्व हम हैं या यह लोग हैं। इन लोगों के फेलियर की वजह से एक छात्र का हाथ गया। तमाम घायल हुए- नदीम अंसारी, पूर्व उपाध्यक्ष, छात्र संघ, एएमयू

‘नदीम अंसारी और हमजा सूफियान छात्रों को कुलपति और रजिस्ट्रार के खिलाफ धरना स्थल पर आकर भड़का रहे थे। ये लोग वर्तमान में छात्र भी नहीं हैं। प्राक्टर टीम का काम कैंपस में बाहरी लोगों को रोकना है। यह लोग शांतिपूर्वक चल रहे धरने को अव्यवस्थित कर उसमें व्यवधान डालने का काम कर रहे हैं। जिससे अभियान के मकसद को कहीं और मोड़ा जा सके। इन्हें इनके मकसद में कामयाब नहीं होने दिया जा सकता है- प्रो. अफीफउल्लाह, प्राक्टर, एएमयू

‘प्राक्टर टीम के साथ अभद्रता की गई है। जिन लोगों ने यह काम किया है, उनके खिलाफ पहले से ही चल रहे मुकदमों की लंबी फेहरिस्त है। इन्होंने जो ताजा घटना की है, उसके संबंध में विश्वविद्यालय प्र्रशासन पुलिस को शिकायत दर्ज कराने पर विचार कर रहा है- प्रो. शाफे किदवई, एमआईसी

एएमयू के दो छात्र गुट भी भिड़े

शुक्रवार को बाब-ए-सैयद पर दो छात्र गुटों में झड़प हो गई। देखते ही देखते दोनों तरफ से समर्थक इकट्ठा हो गए। बाद में छात्र नेताओं के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ। कहा गया कि एक छात्र गुट आक्रामक रुख अपनाना चाहता था। जबकि दूसरा छात्र गुट जिम्मेदारी के साथ धरने को आगे बढ़ाने का समर्थक था।

'सेक्युलर होना सिर्फ मुसलमानों की जिम्मेदारी नहीं'
नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी, एनपीआर, जेएनयू हिंसा के विरोध में शुक्रवार को आर्ट फैकल्टी के पास एक सभा का आयोजन किया गया जिसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षक अपूर्वानंद और वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली ने शिरकत की।

सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षक अपूर्वानंद ने कहा कि आज बेहद अफसोस की बात है कि राज्य की स्वतंत्र संस्थाएं भी बहुसंख्यकवाद की चपेट में आ गई हैं। जबकि इन्हें अपनी तटस्थ भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर इस समय देश में जो उभार आया हुआ है, उसे केवल मुसलमानों के असंतोष का उभार कह देना एक संकरी बात होगी। यह बेहद सुखद बात है कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए मुसलिम समुदाय आगे आया है। उन्होंने कहा कि सेक्युलर होने की जिम्मेदारी सिर्फ मुसलमानों की नहीं है। बल्कि यह एक ऐसा अनुबंध है जिसमें सभी बंधे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली ने कहा कि 95 साल पहले एक तंजीम गठित की गई, जिसका अलग झंडा था। आज यह तंजीम संविधान को अपने तरीके से बदलना, तोड़ना मोड़ना चाहती है। इसका नाम आरएसएस है। जबकि इस देश के स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत बहादुर शाह जफर के नेतृत्व में हुई और आजादी महात्मा गांधी के नेतृत्व में मिली। उन्होंने कहा कि यह बहुत अच्छी बात है कि देर से ही सही कुलपति प्रो. तारिक मंसूर धरना दे रहे छात्रों से मिलने तो आए। इससे संवाद का रास्ता खुलेगा। इस अवसर पर आर्ट फैकल्टी सहित अन्य विभागों के शिक्षक, शिक्षिकाएं, छात्र और छात्राएं मौजूद रहे।

वीसी और रजिस्ट्रार का इस्तीफा मांगा
अलीगढ़। एएमयू कुलपति और रजिस्ट्रार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुंगी गेट से लेकर बाब-ए-सैयद तक मार्च निकाला। इनके हाथों में पोस्टर बैनर थे। इसमें कक्षा 11 और कक्षा 12 के छात्र छात्राएं शामिल थे। 

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