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नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में एएमयू में आज निकलेगा जुलूस
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बिल के विरोध में ही एएमयू छात्र संघ के निवर्तमान अध्यक्ष मो. सलमान इम्तियाज ने शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद कैंपस से डीएम कार्यालय तक विशाल जुलूस निकालने की घोषणा की है। अधिक से अधिक लोगों से साथ आने का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा कि एएमयू के छात्र संगठन ने शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद एएमयू से डीएम ऑफिस तक शांतिपूर्ण रैली निकालने का फैसला किया है। जुमे की नमाज केवल जामा मस्जिद में होगी। इसके बाद डीएम को राष्ट्रपति और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित एक ज्ञापन दिया जाएगा। मकसद संसद द्वारा पारित नागरिकता संशोधन बिल 2019 का पूर्ण रूप से बहिष्कार करना और इसकी समाप्ति के लिए उचित कार्रवाई करने की मांग है। उन्होंने दावा किया कि इस रैली में सभी 32 हजार छात्र भाग लेंगे। अमुटा, नान टीचिंग सहित सभी का इसमें शामिल होने के लिए आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अलीगढ़ को नया जीवन देने का प्रयास है।
‘एएमयू कैंपस में बाब ए सैयद पर धरना प्रदर्शन में योगेंद्र यादव और डॉ. कफील खान शामिल हुए। यह हाईकोर्ट के 2017 के दो बेंच के फैसले की अवमानना है, जिसमें एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लाक से लेकर वीसी लाज तक कोई भी धरना गैर-कानूनी होने की बात कही थी। इस संबंध में योगेंद्र यादव और डॉ. कफील को रजिस्ट्रार ने बता भी दिया था। लेकिन इन्होंने उसे गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन विश्वविद्यालय ने इस गतिविधि को बेहद गंभीरता से लिया है। यह अदालत की अवमानना है’
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- प्रो. शाफे किदवई, एमआईसी, एएमयू
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उन्होंने कहा कि एएमयू के छात्र संगठन ने शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद एएमयू से डीएम ऑफिस तक शांतिपूर्ण रैली निकालने का फैसला किया है। जुमे की नमाज केवल जामा मस्जिद में होगी। इसके बाद डीएम को राष्ट्रपति और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित एक ज्ञापन दिया जाएगा। मकसद संसद द्वारा पारित नागरिकता संशोधन बिल 2019 का पूर्ण रूप से बहिष्कार करना और इसकी समाप्ति के लिए उचित कार्रवाई करने की मांग है। उन्होंने दावा किया कि इस रैली में सभी 32 हजार छात्र भाग लेंगे। अमुटा, नान टीचिंग सहित सभी का इसमें शामिल होने के लिए आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अलीगढ़ को नया जीवन देने का प्रयास है।
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‘एएमयू कैंपस में बाब ए सैयद पर धरना प्रदर्शन में योगेंद्र यादव और डॉ. कफील खान शामिल हुए। यह हाईकोर्ट के 2017 के दो बेंच के फैसले की अवमानना है, जिसमें एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लाक से लेकर वीसी लाज तक कोई भी धरना गैर-कानूनी होने की बात कही थी। इस संबंध में योगेंद्र यादव और डॉ. कफील को रजिस्ट्रार ने बता भी दिया था। लेकिन इन्होंने उसे गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन विश्वविद्यालय ने इस गतिविधि को बेहद गंभीरता से लिया है। यह अदालत की अवमानना है’
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- प्रो. शाफे किदवई, एमआईसी, एएमयू