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बाहरी पर शिकंजा, छात्र - शिक्षक संवाद से बनेगा बेहतर माहौल
सार
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) परिसर में शांति के लिए बाहरियों का प्रभाव रोकने पर हाईकोर्ट इलाहाबाद की टिप्पणी का छात्रों, पूर्व छात्रों और शिक्षकों ने स्वागत किया। किसी भी शिक्षण संस्थान में तालीम, तरबियत और पठन पाठन का काम सुचारू रूप से चले, इसके लिए शांत वातावरण पहली आवश्यकता है। भारत के अनेक प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में जाने का मौका मिला है, वहां आमतौर पर मैंने देखा कि बाहरी लोगों का प्रवेश न के बराबर है।-जॉनी फॉस्टर, पूर्व छात्र व संगीत शिक्षक एएमयू एएमयू ओल्ड ब्वॉयज का हस्तक्षेप एएमयू में क्यों नहीं होेना चाहिए।
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प्रोफेसर शमीम।
- फोटो : CITY OFFICE
विस्तार
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) परिसर में शांति के लिए बाहरियों का प्रभाव रोकने पर हाईकोर्ट इलाहाबाद की टिप्पणी का छात्रों, पूर्व छात्रों और शिक्षकों ने स्वागत किया। वहीं, उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को भी अपना फर्ज निभाने की सलाह भी दी। जिससे कि विवि की मर्यादा बनी रहे और बाहरियों का दखल भी खत्म हो जाए।
15 दिसंबर 2019 की रात सीएए-एनआरसी विरोधी उपद्रव के दौरान बाहरियों द्वारा अफवाह फैलाई गई और यूनिवर्सिटी परिसर में घुसकर उपद्रव किया था। जिसे रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। कुछ लोगों द्वारा लाठी चार्ज करने वाली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई के लिए याचिका दायर की गई थी। जिसे हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया है।
एएमयू में बाहरी लोगों को रोकने की हम कोशिश करते हैं कि कोई बाहरी तत्व कैंपस के अंदर न आए। पिछले एक-ड़ेढ साल से कोई बड़ी घटना इसी वजह से नहीं हुई है। कानून व्यवस्था पूरी नजर बनाए हुए हैं। हाईकोर्ट ने जो नसीहत छात्रों को दी है, वह ठीक है। इदारे को मां-बाप की तरह छात्रों को समझना चाहिए। वह इदारे की शान में गलत बात न कहें।
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-प्रो. वसीम अली, प्रॉक्टर, एएमयू
जब भी एएमयू में बवाल होता है, तब कहा जाता है बाहरी है, यह बात गलत है। बाहर वाले होते हैं, लेकिन अंदर वाले की मिलीभगत से कैंपस में नहीं आ सकते। बाहरियों पर शिकंजा कसना पड़ेगा। बेहतर माहौल रहे। इसकी जिम्मेदारी शिक्षकों और छात्रों पर है। परिसर में विद्यार्थियों और शिक्षकों में संवाद होना चाहिए।
-प्रो. शमीम अहमद, पूर्व प्राचार्य, यूनिवर्सिटी वीमेंस पॉलिटेक्निक कॉलेज, एएमयू
इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी स्वागत योग्य है। किसी भी शिक्षण संस्थान में तालीम, तरबियत और पठन पाठन का काम सुचारू रूप से चले, इसके लिए शांत वातावरण पहली आवश्यकता है। भारत के अनेक प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में जाने का मौका मिला है, वहां आमतौर पर मैंने देखा कि बाहरी लोगों का प्रवेश न के बराबर है।
-जॉनी फॉस्टर, पूर्व छात्र व संगीत शिक्षक एएमयू
एएमयू ओल्ड ब्वॉयज का हस्तक्षेप एएमयू में क्यों नहीं होेना चाहिए। यहां की संस्कृति उन्हीं से तो हम सीखते हैं। इसलिए सर सैयद खां ने भी इसका ख्याल रखा है। जब यहां से पढ़े छात्र आते हैं तो वह अपना अनुभव साझा करते हैं, जो जरूरी है। अगर वह हमारे बीच नहीं आएंगे तो हमारे मुद्दे कौन उठाएगा।
-मोहम्मद सलमान गौरी, छात्र, एएमयू
एएमयू परिसर में अगर बाहरी लोगों का प्रभाव है, तो एएमयू इंतजामिया को नियंत्रित करना चाहिए। सीएए-एनआरसी का विरोध छात्रों ने किया था। इसमें कुलपति व रजिस्ट्रार की गलती थी, जो 15 दिसंबर 2019 को हादसा हुआ था। वह चाह रहे थे कुछ हो। इसलिए उन्होेंने छात्रों को समझाया-बुझाया नहीं। अलबत्ता, रजिस्ट्रार ने पुलिस को आने की अनुमति दी।
-इमरान खान, छात्र, एएमयू
-एएमयू के हॉस्टल के गेट पर पहचान पत्र से ही लोगों को प्रवेश देना चाहिए। इसके लिए जिला प्रशासन और पुलिस से सहयोग लेना चाहिए। कोई भी कैंपस तभी सुरक्षित रहता है, जब बाहरी लोग उससे बाहर रहें। हॉस्टल के गेट पर सख्ती से पहचान पत्र की जांच होनी चाहिए। जब तक हॉस्टल अवैध और गुंडा तत्वों से मुक्ति नहीं होती, तब तक कुछ नहीं होगा।
-शहजाद आलम बर्नी, पूर्व अध्यक्ष, छात्रसंघ एएमयू
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15 दिसंबर 2019 की रात सीएए-एनआरसी विरोधी उपद्रव के दौरान बाहरियों द्वारा अफवाह फैलाई गई और यूनिवर्सिटी परिसर में घुसकर उपद्रव किया था। जिसे रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। कुछ लोगों द्वारा लाठी चार्ज करने वाली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई के लिए याचिका दायर की गई थी। जिसे हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया है।
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एएमयू में बाहरी लोगों को रोकने की हम कोशिश करते हैं कि कोई बाहरी तत्व कैंपस के अंदर न आए। पिछले एक-ड़ेढ साल से कोई बड़ी घटना इसी वजह से नहीं हुई है। कानून व्यवस्था पूरी नजर बनाए हुए हैं। हाईकोर्ट ने जो नसीहत छात्रों को दी है, वह ठीक है। इदारे को मां-बाप की तरह छात्रों को समझना चाहिए। वह इदारे की शान में गलत बात न कहें।
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-प्रो. वसीम अली, प्रॉक्टर, एएमयू
जब भी एएमयू में बवाल होता है, तब कहा जाता है बाहरी है, यह बात गलत है। बाहर वाले होते हैं, लेकिन अंदर वाले की मिलीभगत से कैंपस में नहीं आ सकते। बाहरियों पर शिकंजा कसना पड़ेगा। बेहतर माहौल रहे। इसकी जिम्मेदारी शिक्षकों और छात्रों पर है। परिसर में विद्यार्थियों और शिक्षकों में संवाद होना चाहिए।
-प्रो. शमीम अहमद, पूर्व प्राचार्य, यूनिवर्सिटी वीमेंस पॉलिटेक्निक कॉलेज, एएमयू
इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी स्वागत योग्य है। किसी भी शिक्षण संस्थान में तालीम, तरबियत और पठन पाठन का काम सुचारू रूप से चले, इसके लिए शांत वातावरण पहली आवश्यकता है। भारत के अनेक प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में जाने का मौका मिला है, वहां आमतौर पर मैंने देखा कि बाहरी लोगों का प्रवेश न के बराबर है।
-जॉनी फॉस्टर, पूर्व छात्र व संगीत शिक्षक एएमयू
एएमयू ओल्ड ब्वॉयज का हस्तक्षेप एएमयू में क्यों नहीं होेना चाहिए। यहां की संस्कृति उन्हीं से तो हम सीखते हैं। इसलिए सर सैयद खां ने भी इसका ख्याल रखा है। जब यहां से पढ़े छात्र आते हैं तो वह अपना अनुभव साझा करते हैं, जो जरूरी है। अगर वह हमारे बीच नहीं आएंगे तो हमारे मुद्दे कौन उठाएगा।
-मोहम्मद सलमान गौरी, छात्र, एएमयू
एएमयू परिसर में अगर बाहरी लोगों का प्रभाव है, तो एएमयू इंतजामिया को नियंत्रित करना चाहिए। सीएए-एनआरसी का विरोध छात्रों ने किया था। इसमें कुलपति व रजिस्ट्रार की गलती थी, जो 15 दिसंबर 2019 को हादसा हुआ था। वह चाह रहे थे कुछ हो। इसलिए उन्होेंने छात्रों को समझाया-बुझाया नहीं। अलबत्ता, रजिस्ट्रार ने पुलिस को आने की अनुमति दी।
-इमरान खान, छात्र, एएमयू
-एएमयू के हॉस्टल के गेट पर पहचान पत्र से ही लोगों को प्रवेश देना चाहिए। इसके लिए जिला प्रशासन और पुलिस से सहयोग लेना चाहिए। कोई भी कैंपस तभी सुरक्षित रहता है, जब बाहरी लोग उससे बाहर रहें। हॉस्टल के गेट पर सख्ती से पहचान पत्र की जांच होनी चाहिए। जब तक हॉस्टल अवैध और गुंडा तत्वों से मुक्ति नहीं होती, तब तक कुछ नहीं होगा।
-शहजाद आलम बर्नी, पूर्व अध्यक्ष, छात्रसंघ एएमयू

प्रो. वसीम अली।- फोटो : CITY OFFICE

सलमान।- फोटो : CITY OFFICE

शहजाद आलम।- फोटो : CITY OFFICE