मानवता की भलाई की दिशा में अंकित श्रीवास्तव की पहल है अमारा ह्यूमन मिल्क बैंक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उद्यमी अंकित श्रीवास्तव ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उनकी परोपकारी सोच माताओं और बच्चों के लिए जीवनदायनी बन जाएगी। दरअसल अंकित ने अध्ययन किया और बाल रोग चिकित्सकों से बात की तो पता चला कि मानव स्तन का दूध एक नुस्खे के साथ जरूरतमंद बच्चों को दान किया जा सकता है। मां का दूध बच्चे का प्राकृतिक खाद्य स्रोत है। यह बच्चे के लिए आवश्यक पोषक तत्वों जैसे कि कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन, और खनिज भरपूर होता है तो ऐसी माताएं अपने दूध को दान कर उन बच्चों की सहायता कर सकती हैं जिन्हें जन्म के समय मां के दूध की अत्यंत आवश्यकता पड़ती है।
इसी दिशा में अपनी सोच को आगे बढ़ाते हुए अंकित ऐसी माताओं और बच्चों का समर्थन करने के लिए दृढ़ हो गए और अमारा ह्यूमन मिल्क बैंक की स्थापना 'ब्रेस्ट मिल्क फाउंडेशन' नामक संगठन के तहत की गई। बाल चिकित्सा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत मानव दूध बैंक नवजात इकाइयों वाले अस्पताल परिसर में मौजूद होना चाहिए इसलिए उन्होंने इसके लिए दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में डॉ. रघुराम मल्लैया के साथ सहयोग किया। उन्होंने इस पर भी विचार किया कि जो उन्होंने कल्पना की है उसे सिद्ध करना इतना आसान कार्य नहीं था क्योंकि इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें आवश्यक मशीनरी को आयात करना और इसके कुशल संचालन के लिए कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा जो उनका दृढ़ संकल्प बन गया था।
अंततः श्रीवास्तव ने 2015 में अमारा ह्यूमन मिल्क बैंक को शुरू करने में सफल रहे। उन्होंने कई अस्पताल परिसरों में नियमित आपूर्ति और उचित भंडारण को सुनिश्चित करने के लिए तकनीशयनों और स्तनपान विषेशज्ञों को चुना जो इस सुविधा को एक तरह से गोपनीयता के तहत डिजाइन करते थे और स्तन दूध पिलाने के लाभों के बारे में जैसे स्तन दूध एक संपूर्ण आहार है साथ ही इसमें हार्मोन और बीमारियों से लड़ने वाले यौगिक पदार्थ भी शामिल होते हैं जैसे शिशु बढ़ता और विकसित होता है तो उसकी जरुरत के अनुसार मां के दूध की पौष्टिक मात्रा भी व्यवस्थित होती जाती है और इस पर चर्चा करने के लिए मीडिया का भी उपयोग किया गया था।
उन्होंने अमारा ह्यूमन मिल्क बैंक को श्रीवास्तव ग्रुप के माध्यम से और जीएनएस फाउंडेशन के माध्यम से फंड किया जिसे उनके पिता गोविंद नारायण श्रीवास्तव की याद में स्थापित और नामित किया गया था। अमारा के माध्यम से अंकित मानव स्तन दूध दान को प्रोत्साहित करने और सकारात्मक प्रवृत्ति की ओर बढ़ने की वकालत करने में सक्षम रहे। उन्होंने मानव दूध बैंक के संचालन का विस्तार किया और संगठन की स्थापना के दो साल बाद एक और केंद्र खोला। दूसरा ह्यूमन मिल्क बैंक 2017 में बेंगलुरु में खोला गया था।