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हाथरस कांड: आरोपियों के अधिवक्ता को दी चार्जशीट की कॉपी, 29 जनवरी को होगी मामले की सुनवाई

Mon, 04 Jan 2021 12:25 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Mon, 04 Jan 2021 12:25 PM IST
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all four accused ogf hathras gang rape and murder case brought aligarh jail to civil court
पुलिस वैन से उतरते हाथरस दुष्कर्म और हत्या कांड के आरोपी आरो - फोटो : अमर उजाला

हाथरस में बिटिया के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के चारों आरोपियों को अलीगढ़ जेल से हाथरस कोर्ट लाया गया। इस दौरान कड़ी सुरक्षा रही। यहां विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट में इनकी पेश थी। चारों आरोपियों को पेशी के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस अलीगढ़ जेल ले गई। इस दौरान आरोपियों को परिजनों से नहीं मिलने दिया।

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इस मामले में अब विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट में 29 जनवरी को सुनवाई होगी। चारों आरोपियों को आरोप पत्र की प्रतिलिपि दी गई। आरोपियों की ओर से उनके अधिवक्ता ने प्रतिलिपि ली है। सीबीआई की डीएसपी सीमा पाहुजा भी कोर्ट में मौजूद रही। परिजनों को आरोपियों से नहीं मिलने देने पर महिलाएं रोते हुए वहां से चली गई। 
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बता दें कि सीबीआई ने 67 दिन की विवेचना के बाद इस बहुचर्चित कांड में अपनी चार्जशीट विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट में दाखिल की थी। इसमें सुनवाई की तिथि चार जनवरी नियत है। यहां सीबीआई ने इसलिए चार्जशीट दाखिल की थी, क्योंकि चार्जशीट में एससी-एसटी उत्पीड़न की धारा भी शामिल है।
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सीबीआई ने बिटिया के गांव के ही चारों युवक संदीप, रामू, लवकुश व रवि के खिलाफ यह चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में चारों आरोपी अलीगढ़ जेल में बंद हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि हो सकता है कि यह मामला आगे सीबीआई की विशेष अदालत में चले या हो सकता है कि आगे भी यहीं इसकी सुनवाई हो। वहीं चारों आरोपियों को जेल से कोर्ट लाया गया है।

वहीं इस मामले में कई आरोपों से घिरे डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार का तबादला कर दिया गया है। डीएम के खिलाफ कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट ने भी नाराजगी जताई थी। डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार को शासन ने मिर्जापुर में डीएम के रूप में नियुक्त किया है। वे यहां करीब 22 महीने तैनात रहे। उनका तबादला साल के आखिरी दिन किया गया। 


उधर तबादले पर बिटिया की भाभी ने कहा कि डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार मिर्जापुर में भी ऐसी घटना करवा सकते हैं, जैसी हमारे साथ कराई। वहां भी किसी परिवार की लड़की के शव को जलवा सकते हैं। हो सकता है कि वहां भी किसी परिवार को उसकी लड़की की लाश ही न सौंपने दें, इसलिए शासन को उन्हें बर्खास्त करना चाहिए।  

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