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अलीगढ़ : तीन दशक पुरानी जरूरत पर सुस्ती क्यों
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ट्रांसपोर्ट नगर का नक्शा।
- फोटो : CITY OFFICE
तीन दशक से ट्रांसपोर्ट नगर की जरूरत महसूस कर रहे महानगर को अभी और इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि अभी तक इस योजना के लिए खरीदी गई जमीन का भू उपयोग ही नहीं परिवर्तित हो सका है। भू उपयोग परिवर्तन शासन स्तर से होना है। इसके बाद ही यहां निर्माण कार्य शुरू हो सकता है। स्मार्ट सिटी में शामिल होने के बाद अब तक जिले में ट्रांसपोर्ट नगर नहीं बसने से ट्रांसपोर्टर मायूस हैं। पीएम मोदी के कार्यक्रम में इस योजना को महत्व नहीं मिलने की भी चर्चा है।
लोधा ब्लॉक के गांव ल्हौसरा में तकरीबन 85 हेक्टेयर जमीन पर ट्रांसपोर्ट नगर बसाया जाएगा। अब तक इस प्रोजेक्ट के लिए 49.7 हेक्टेयर जमीन ली गई है। लगभग 50 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। तकरीबन 35 हेक्टेयर जमीन की जरूरत और है। इसके लिए शासन से 35 करोड़ रुपये मांगे गए हैं।
पहले खर्च हुए 50 करोड़ अलीगढ़ विकास प्राधिकरण ने अपने संसाधनों से जुटाए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन का कार्यक्रम जारी होने के बाद उम्मीद थी कि इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को भी इसमें शामिल किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस पर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने नाराजगी जाहिर की है।
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दि गुडस ट्रांसपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष ठा. अजयपाल सिंह ने कहा कि लगभग तीन दशक बाद भी इस महत्वपूर्ण जरूरत को पूरा नहीं किया जा रहा है। ये बहुत मायूस करने वाला घटनाक्रम है। जिले में लगभग 25 हजार छोटे-बड़े वाहनों को अब तक एक स्थायी ठिकाना नहीं मिला है।
इसकी वजह से शहर में यातायात प्रभावित हो रहा है। जब 50 हेक्टेयर जमीन ले ली गई है तो काम क्यों नहीं हो रहा है। भू उपयोग परिवर्तन क्यों नहीं हो रहा है। इस योजना का निर्माण कार्य आखिर कब शुरू होगा।
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लोधा ब्लॉक के गांव ल्हौसरा में तकरीबन 85 हेक्टेयर जमीन पर ट्रांसपोर्ट नगर बसाया जाएगा। अब तक इस प्रोजेक्ट के लिए 49.7 हेक्टेयर जमीन ली गई है। लगभग 50 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। तकरीबन 35 हेक्टेयर जमीन की जरूरत और है। इसके लिए शासन से 35 करोड़ रुपये मांगे गए हैं।
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पहले खर्च हुए 50 करोड़ अलीगढ़ विकास प्राधिकरण ने अपने संसाधनों से जुटाए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन का कार्यक्रम जारी होने के बाद उम्मीद थी कि इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को भी इसमें शामिल किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस पर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने नाराजगी जाहिर की है।
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दि गुडस ट्रांसपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष ठा. अजयपाल सिंह ने कहा कि लगभग तीन दशक बाद भी इस महत्वपूर्ण जरूरत को पूरा नहीं किया जा रहा है। ये बहुत मायूस करने वाला घटनाक्रम है। जिले में लगभग 25 हजार छोटे-बड़े वाहनों को अब तक एक स्थायी ठिकाना नहीं मिला है।
इसकी वजह से शहर में यातायात प्रभावित हो रहा है। जब 50 हेक्टेयर जमीन ले ली गई है तो काम क्यों नहीं हो रहा है। भू उपयोग परिवर्तन क्यों नहीं हो रहा है। इस योजना का निर्माण कार्य आखिर कब शुरू होगा।