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अलीगढ़ : किसान के नाम से चार बोरी खाद दबाने वाले दुकानदार को चेतावनी

Sat, 06 Nov 2021 01:39 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Nov 2021 01:39 AM IST
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Aligarh: Warning to the shopkeeper who suppresses four sacks of fertilizer in the name of the farmer
वर्तमान किसानों के सामने डीएपी सहित दूसरी खाद का संकट है। किसानों को दुकानों पर खाद नहीं मिल रही है। इसके अलावा किसानों के पहचान पत्र लेकर उन्हें एक बोरी खाद देकर टरकाया जा रहा है। बाकी खाद दुकानदार अपने पास डंप कर उसको ब्लैक करने में लग गए हैं। शुक्रवार को हरदुआगंज स्थित खाद बीज की दुकान में जिला कृषि रक्षा अधिकारी के सामने ही इसका खुलासा हुआ है।
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ये जांच पड़ताल जिलाधिकारी के निर्देश पर हुई थी। जिला कृषि अधिकारी रामप्रवेश वर्मा ने बताया कि हरदुआगंज स्थित विकास मित्तल खाद बीज भंडार पर गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। उक्त शिकायतकर्ता को मौके पर बुलाकर जांच की गई। जिसमें शिकायतकर्ता द्वारा अवगत कराया कि उन्होंने एक बोरी डीएपी ही ली है। इससे ठीक उलट दुकानदार द्वारा बिक्री कागजों में पांच बोरी चढ़ा दी गईं।
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जब इसकी जानकारी उसे हुई तो उसने अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसके पहचान पत्र पर अब उसे और डीएपी नहीं मिल पाएगी, क्योंकि साधारण किसानों को पांच बोरी डीएपी ही दी जा रही है। दुकानदार ने उसे एक बोरी खाद दी और चार अपने पास दबा लीं थीं। जिनको बाद में ब्लैक में बेचे जाने की तैयारी थी। कई किसानों के साथ ऐसा हो रहा है।
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पूरा मामला समझने के बाद जिला कृषि अधिकारी ने उर्वरक विक्रेता को 4 बोरी डीएपी उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। तत्काल समस्या का निस्तारण कराया और दुकानदार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। जिला कृषि अधिकारी ने दो टूक कहा कि दोबारा शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
खाद डालने से उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही
जिला कृषि अधिकारी रामप्रवेश वर्मा ने बताया कि वैज्ञानिक संस्तुति के अनुसार अलीगढ़ में एक एकड़ आलू की बुवाई में दो बोरे डीएपी डालनी चाहिए। गेहूं, सरसों और मसूर की एक एकड़ की बुवाई में एक बोरे खाद पड़नी चाहिए, लेकिन स्थानीय किसान आलू में चार से पांच बोरे खाद डाल रहे हैं। जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है। इसलिए खाद की मांग बढ़ी है।

खतौनी पर मिल रही खाद
जिला कृषि अधिकारी रामप्रवेश वर्मा ने बताया कि वैज्ञानिक संस्तुति के अनुसार ही किसानों को खतौनी दिखाने पर खाद मिल रही है। कई बार किसान ज्यादा उत्पादन करने के कारण ज्यादा खाद लेने का प्रयास करते हैं। इसीलिए खाद की किल्लत हो रही है।
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