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अलीगढ़ : वैश्यों का हर दल में दखल, या केवल कमल..?

Mon, 08 Feb 2021 12:20 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Feb 2021 12:20 AM IST
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Aligarh: Vaishyas interfere in every party, or only lotus ..?
अलीगढ़ : आगरा रोड स्थित कैलाश फॉर्म हाउस में आयोजित अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के 14वें राष्ट्री? - फोटो : CITY OFFICE
आशीष निगम
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अलीगढ़। अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के अधिवेशन में सभी दलों में भागीदारी का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया जाना था। इस कार्यक्रम की रूपरेखा वैश्य समुदाय को आबादी के अनुसार अहम राजनीतिक हिस्सेदारी दिलाने की मांग पर आधारित थी, अचानक सब कुछ बदल गया। केवल भाजपा से अनुरोध के साथ समापन हुआ। गैर भाजपाई दलों के नेता इस अधिवेशन से दूर रहे।
तय हुआ था कि वैश्य समुदाय सभी दलों से अपनी आबादी के अनुसार विधानसभा और लोकसभा के टिकट की मांग पूरे हक के साथ करेगा, लेकिन अधिवेशन में दूसरे दलों से जुड़े वैश्य नेता कहीं नहीं दिखाई दिए। मंच पर कई दूसरी जातियों और समुदाय के भाजपा नेता तो दिखे लेकिन वैश्य समुदाय के वे नेता नहीं आए जो गैरभाजपाई दलों में अहम पदों पर सक्रिय हैं। कार्यक्रम में ऐसा कोई सांसद, विधायक या अन्य जनप्रतिनिधि सामने नहीं आया, जो गैरभाजपाई हो।
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पूरे कार्यक्रम में भाजपा सरकार, मोदी सरकार, योगी सरकार, श्रीराम मंदिर और वे बातें छाई रहीं, जो पूरी तरह से राजनीतिक और भाजपा के समर्थन में थीं। यहां पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी टिप्पणी की गई, लेकिन वैश्यों की जमीनी समस्याओं और कारोबारी उलझनों पर गहन मंत्रणा नहीं हुई। ये अधिवेशन सामाजिक के बजाय राजनीतिक होकर भाजपा की गोद में चला गया।
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बेशक यही होना भी था क्योंकि आयोजक मंडल में भाजपा के ही पदाधिकारी थे। ऐसे में गैर भाजपाई वैश्य समुदाय के लोगों के बीच बड़ा सवाल ये है कि क्या वह दीगर हैं। ऐसे ही कुछ लोगों ने कहा है कि गैरभाजपाई दल ये मानते हैं कि वैश्य समुदाय भाजपा समर्थक है। इसलिए उनको वहां तवज्जो नहीं मिलती। इधर, वैश्य एकता परिषद ने भी उनको उचित सम्मान नहीं दिया। इसलिए वैश्य समुदाय को राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं मिल पा रही है, क्योंकि उस पर दल विशेष के समर्थक का ठप्पा लगा है। इस पर आयोजक मंडल ने कहा है कि ऐसा नहीं है। ये कार्यक्रम पूरे समाज का था। सभी लोगों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया है, इसलिए कार्यक्रम इतना सफल हुआ।
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