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अलीगढ़ : तस्करी कर लाया जाता था चीनी फैक्टरी का शीरा, मुकदमा दर्ज

Sun, 25 Sep 2022 12:31 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 25 Sep 2022 12:31 AM IST
सार

आबकारी विभाग द्वारा शीरा का जो सैंपल जांच के लिए भेजा गया था, उसकी रिपोर्ट में उजागर हुआ है कि यह खांडसारी का नहीं, बल्कि चीनी फैक्टरी का शीरा था। जिले में इस तरह के शीरे का एक भी लाइसेंस जारी नहीं है। आखिर तस्करी कर शीरा यहां तक आने की भनक क्यों नहीं लगी और इसके लिए जिम्मेदार अफसरों पर क्या कार्रवाई होगी।

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Aligarh: Sugar factory molasses used to be smuggled, case registered

विस्तार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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महानगर के कोतवाली क्षेत्र के शीरा गोदाम के भूमिगत टैंक में गिरने से गोदाम स्वामी सहित तीन की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। आबकारी विभाग द्वारा शीरा का जो सैंपल जांच के लिए भेजा गया था, उसकी रिपोर्ट में उजागर हुआ है कि यह खांडसारी का नहीं, बल्कि चीनी फैक्टरी का शीरा था। इससे आबकारी विभाग का मानना है कि यह शीरा अवैध रूप से बिना लाइसेंस के बेचा जा रहा था और तस्करी के जरिये यहां तक लाया जाता था। इस आधार पर मृत फैक्टरी स्वामी, उसके बेटे सहित तीन लोगों पर आबकारी विभाग की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है।
ये घटनाक्रम 10 सितंबर का है, जब सराय कावा के गोदाम स्वामी कंछी सिंह का मजदूर हीरा सिंह भूमिगत टैंक में गिरा। उसे बचाने के फेर में खुद कंछी सिंह गिरे और बाद में दूसरा मजदूर कारे सिंह भी गिरा। इनमें कंछी व कारे की तो उसी दिन मौत हो गई थी। बाद में हीरा सिंह को भी मृत घोषित कर दिया गया। इस मामले में पहले ही दिन जांच को पहुंची आबकारी टीम ने शीरा सैंपल संकलित कर जांच के लिए भेजा।
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मेरठ स्थित आबकारी प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्ट में उजागर हुआ है कि यह शीरा खांडसारी का नहीं, बल्कि चीनी फैक्टरी द्वारा निकला हुआ है। इसे लेकर आबकारी विभाग का तर्क है कि यह शीरा रखने, बेचने या लाने आदि का अधिकार आबकारी विभाग से जारी अधिकृत लाइसेंसी को ही है। जिले में इस तरह के शीरे का एक भी लाइसेंस जारी नहीं है। इसलिए इसकी बिक्री को अवैध व तस्करी के जरिये करना माना गया है।
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इस आधार पर आबकारी निरीक्षक राजीव कुमार की ओर से कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है। साथ ही, गोदाम में रखा शीरा भी सीज कर दिया गया है। अब इसका निस्तारण न्यायालय के आदेश पर होगा। इस विषय में पुष्टि करते हुए जिला आबकारी अधिकारी सतीश चंद्र ने बताया कि प्रयोगशाला से रिपोर्ट मिली है। जिसमें शीरा चीनी फैक्टरी का बताया है। यह अवैध रूप से बेचा जा रहा था। मुकदमा दर्ज कराया है।

फिर आबकारी को क्यों नहीं लगी भनक
इस प्रकरण में पहले दिन आबकारी टीम जब पहुंची तो इसका ठीकरा उद्योग विभाग के सिर फोड़ती दिखी। इस शीरे को खंडसारी का शीरा बताया गया। कहा कि हम सिर्फ इसके एलाटमेंट की जानकारी रखते हैं। मगर जब यह शीरा चीनी फैक्टरी का निकला तो आनन-फानन मुकदमा दर्ज करा दिया गया। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि यह शीरा यहां तक किस माध्यम से आ रहा है। आखिर तस्करी कर शीरा यहां तक आने की भनक क्यों नहीं लगी और इसके लिए जिम्मेदार अफसरों पर क्या कार्रवाई होगी। अगर नहीं तो फिर तीन मौतों का जिम्मेदार कौन होगा।
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