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अलीगढ़: यमुना एक्सप्रेस वे पर एकांत में सिपाहियों ने बदलवाया टायर
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
यमुना एक्सप्रेस वे पर फिरोजाबाद से गाजियाबाद लौट रहे एक परिवार को अकेले लौटते समय जो यूपी पुलिस के कर्मचारियों की ओर से जो मदद मिली है, उसे वे कभी भूल नहीं पाएंगे। इस मदद को लेकर उन्होंने खुद मीडिया को पत्र भेजकर पुलिसकर्मियों का आभार व्यक्त किया है।
इस विषय में अनूप कुमार दुबे ने जानकारी दी है कि वे 13 नवंबर को फिरोजाबाद से गाजियाबाद अपनी कार में सवार होकर परिवार के साथ लौट रहे थे। तभी टप्पल क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेस वे पर अचानक कार का टायर पंक्चर हो गया। इस पर उन्होंने साइड में गाड़ी लगाकर जेवर टोल के मैनेजर को खबर दी। उन्होंने उधर से भरोसा दिया कि 15 मिनट में आपके पास मदद आएगी।
इसी बीच वहां से बाइक पर दो व्यक्ति आए और उन्होंने खुद का परिचय देवी लाल व संदीप पाठक के रूप में देते हुए बताया कि वे यूपी-122 की गाड़ी पर बतौर सिपाही सेवारत हैं और ड्यूटी पर जा रहे हैं। उन्होंने वहां हमारे रुकने का कारण पूछा और खुद मदद को तैयार हो गए। वह हमारी गाड़ी की स्टेपनी में पहले हवा भरवाने गए और वे लौट ही रहे थे कि इसी बीच यमुना एक्सप्रेस वे की टीम वहां पहुंच गई। इसके बाद ही यह सिपाही हमें उनके सुपुर्द छोड़कर वहां से रवाना हुए। इस दौरान उनकी 3 साल की बेटी बुरी तरह डरी रही। इस पूरे वाकये पर उन्होंने सिपाहियों की बेहद तारीफ की है।
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यमुना एक्सप्रेस वे पर फिरोजाबाद से गाजियाबाद लौट रहे एक परिवार को अकेले लौटते समय जो यूपी पुलिस के कर्मचारियों की ओर से जो मदद मिली है, उसे वे कभी भूल नहीं पाएंगे। इस मदद को लेकर उन्होंने खुद मीडिया को पत्र भेजकर पुलिसकर्मियों का आभार व्यक्त किया है।
इस विषय में अनूप कुमार दुबे ने जानकारी दी है कि वे 13 नवंबर को फिरोजाबाद से गाजियाबाद अपनी कार में सवार होकर परिवार के साथ लौट रहे थे। तभी टप्पल क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेस वे पर अचानक कार का टायर पंक्चर हो गया। इस पर उन्होंने साइड में गाड़ी लगाकर जेवर टोल के मैनेजर को खबर दी। उन्होंने उधर से भरोसा दिया कि 15 मिनट में आपके पास मदद आएगी।
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इसी बीच वहां से बाइक पर दो व्यक्ति आए और उन्होंने खुद का परिचय देवी लाल व संदीप पाठक के रूप में देते हुए बताया कि वे यूपी-122 की गाड़ी पर बतौर सिपाही सेवारत हैं और ड्यूटी पर जा रहे हैं। उन्होंने वहां हमारे रुकने का कारण पूछा और खुद मदद को तैयार हो गए। वह हमारी गाड़ी की स्टेपनी में पहले हवा भरवाने गए और वे लौट ही रहे थे कि इसी बीच यमुना एक्सप्रेस वे की टीम वहां पहुंच गई। इसके बाद ही यह सिपाही हमें उनके सुपुर्द छोड़कर वहां से रवाना हुए। इस दौरान उनकी 3 साल की बेटी बुरी तरह डरी रही। इस पूरे वाकये पर उन्होंने सिपाहियों की बेहद तारीफ की है।
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