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अलीगढ़ : पालीटेक्निक छात्र हत्याकांड में संदिग्धों की पॉलीग्राफी जांच पूरी
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
इगलास थाना क्षेत्र के कस्बा गोरई के पालीटेक्निक छात्र हेमंत पुत्र तक्षपाल सिंह हत्याकांड में छह संदिग्धों की पॉलीग्राफी जांच का काम पूरा हो गया है। शनिवार को सीबीआई के डॉक्टरों की टीम ने शाम साढ़े छह बजे जांच पूरी होने की बात कह सभी छह लोगों को उनके घर भेज दिया। इसके बाद टीम के भी देर रात दिल्ली रवाना होने के संकेत हैं। जांच टीम जल्द ही अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर यह तय होगा कि इनमें से हत्याकांड का कोई आरोपी है या नहीं।
30 जून को गायब हुए हेमंत का शव अगले दिन गांव के ही एक कॉलेज कैंपस में मिली। इस मामले में अज्ञात में मुकदमा दर्ज है। पुलिस जांच में उसके दो दोस्त किसी प्रेम प्रसंग में और गांव के ही एक भाजपा नेता भट्ठा संचालक परिवार पर संदेह गया। इस संदेह को पुख्ता करने के लिए पुलिस ने सभी छह लोगों के पॉलीग्राफी टेस्ट कराने का निर्णय लिया। इसी आधार पर न्यायालय से अनुमति ली गई और सीबीआई से मदद मांगी गई। इसी क्रम में सीबीआई दिल्ली मुख्यालय की फॉरेंसिक विंग की डॉक्टर रंजीता व मनीषा की टीम बृहस्पतिवार को ही यहां 38वीं वाहिनी पीएसी पहुंच गई थी। हालांकि, टीम ने बृहस्पतिवार शाम को ही सभी छह लोग बुलाए थे। पहले दिन फौरी बातचीत हुई।
मगर, शुक्रवार और शनिवार को लगातार छह-छह घंटे तक सभी छह लोगों की क्रमवार पॉलीग्राफी जांच की। इस दौरान एकांत के एक कमरे में एक-एक कर बुलाकर एक एक घंटे तक सवाल जवाबों की प्रक्रिया होती थी। इसके लिए बाकायदा एक प्रश्नोत्तरी तैयार की गई थी। इस दौरान सभी छह संदिग्धों के अधिवक्ता वीरपाल सिंह जादौन उस कमरे के बाहर रहते थे और बाहर से शीशे वाली खिड़की से अंदर चल रही प्रक्रिया पर अपनी निगरानी रखते थे। अधिवक्ता को वहां रखने की अनुमति भी न्यायालय स्तर से दी गई थी।
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एक संदिग्ध नाबालिग मिला, पिता से ली अनुमति
पॉलीग्राफी जांच कर रही टीम के सामने शुक्रवार शाम को बातचीत में यह तथ्य आया कि एक संदिग्ध जो मृतक का दोस्त वह नाबालिग है। उसकी उम्र बालिग होने में कुछ माह कम है। इस पर टीम ने उसके पिता से लिखित में यह अनुमति ली कि उन्हें इस जांच से गुजरने में कोई आपत्ति नहीं है। तब यह प्रक्रिया पूरी हुई।
पुलिस ने भी ली थी लिखित सहमति
इस प्रक्रिया को कराने से पहले पुलिस स्तर से भी सभी छह लोगों से लिखित सहमति ली गई थी। इसके बाद ही न्यायालय में पॉलीग्राफी कराने का आवेदन किया गया था। न्यायालय से अनुमति मिलने से पहले तय हो रहा था कि इस जांच के लिए इन्हें दिल्ली ले जाया जाए। मगर बाद में सीबीआई से सहमति मिल गई कि टीम अलीगढ़ ही पहुंच जाएगी। तब यह प्रक्रिया पूरी कराई गई।
-सीबीआई टीम पॉलीग्राफी जांच पूरी करके ले गई है। अब वह जल्द अपनी रिपोर्ट देगी। संकेत हैं कि आने वाले 15 दिन में रिपोर्ट मिल जाएगी। जिसके आधार पर मुकदमे का भविष्य तय किया जाएगा।-मुनिराज जी एसएसपी
इनकी हुई पॉलीग्राफी जांच
- अजय पुत्र महेश निवासी गोरई (मृतक का दोस्त)
- नाबालिग पाया गया निवासी गोरई (मृतक का दोस्त)
- राजा बाबू पुत्र छीतर सिंह निवासी बांस फतेली गोरई (भट्ठा संचालक)
- जीतू उर्फ जितेंद्र पुत्र राजाबाबू निवासी बांस फतेली गोरई (भट्ठा संचालक पुत्र)
- लोकेश पुत्र गौतम सिंह निवासी बांस फतेली गोरई (भट्ठा संचालक परिवार से)
- मुनेश उर्फ मीनू निवासी बॉस फतेली बांस फतेली (भट्ठा संचालक का ड्राइवर)
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इगलास थाना क्षेत्र के कस्बा गोरई के पालीटेक्निक छात्र हेमंत पुत्र तक्षपाल सिंह हत्याकांड में छह संदिग्धों की पॉलीग्राफी जांच का काम पूरा हो गया है। शनिवार को सीबीआई के डॉक्टरों की टीम ने शाम साढ़े छह बजे जांच पूरी होने की बात कह सभी छह लोगों को उनके घर भेज दिया। इसके बाद टीम के भी देर रात दिल्ली रवाना होने के संकेत हैं। जांच टीम जल्द ही अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर यह तय होगा कि इनमें से हत्याकांड का कोई आरोपी है या नहीं।
30 जून को गायब हुए हेमंत का शव अगले दिन गांव के ही एक कॉलेज कैंपस में मिली। इस मामले में अज्ञात में मुकदमा दर्ज है। पुलिस जांच में उसके दो दोस्त किसी प्रेम प्रसंग में और गांव के ही एक भाजपा नेता भट्ठा संचालक परिवार पर संदेह गया। इस संदेह को पुख्ता करने के लिए पुलिस ने सभी छह लोगों के पॉलीग्राफी टेस्ट कराने का निर्णय लिया। इसी आधार पर न्यायालय से अनुमति ली गई और सीबीआई से मदद मांगी गई। इसी क्रम में सीबीआई दिल्ली मुख्यालय की फॉरेंसिक विंग की डॉक्टर रंजीता व मनीषा की टीम बृहस्पतिवार को ही यहां 38वीं वाहिनी पीएसी पहुंच गई थी। हालांकि, टीम ने बृहस्पतिवार शाम को ही सभी छह लोग बुलाए थे। पहले दिन फौरी बातचीत हुई।
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मगर, शुक्रवार और शनिवार को लगातार छह-छह घंटे तक सभी छह लोगों की क्रमवार पॉलीग्राफी जांच की। इस दौरान एकांत के एक कमरे में एक-एक कर बुलाकर एक एक घंटे तक सवाल जवाबों की प्रक्रिया होती थी। इसके लिए बाकायदा एक प्रश्नोत्तरी तैयार की गई थी। इस दौरान सभी छह संदिग्धों के अधिवक्ता वीरपाल सिंह जादौन उस कमरे के बाहर रहते थे और बाहर से शीशे वाली खिड़की से अंदर चल रही प्रक्रिया पर अपनी निगरानी रखते थे। अधिवक्ता को वहां रखने की अनुमति भी न्यायालय स्तर से दी गई थी।
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एक संदिग्ध नाबालिग मिला, पिता से ली अनुमति
पॉलीग्राफी जांच कर रही टीम के सामने शुक्रवार शाम को बातचीत में यह तथ्य आया कि एक संदिग्ध जो मृतक का दोस्त वह नाबालिग है। उसकी उम्र बालिग होने में कुछ माह कम है। इस पर टीम ने उसके पिता से लिखित में यह अनुमति ली कि उन्हें इस जांच से गुजरने में कोई आपत्ति नहीं है। तब यह प्रक्रिया पूरी हुई।
पुलिस ने भी ली थी लिखित सहमति
इस प्रक्रिया को कराने से पहले पुलिस स्तर से भी सभी छह लोगों से लिखित सहमति ली गई थी। इसके बाद ही न्यायालय में पॉलीग्राफी कराने का आवेदन किया गया था। न्यायालय से अनुमति मिलने से पहले तय हो रहा था कि इस जांच के लिए इन्हें दिल्ली ले जाया जाए। मगर बाद में सीबीआई से सहमति मिल गई कि टीम अलीगढ़ ही पहुंच जाएगी। तब यह प्रक्रिया पूरी कराई गई।
-सीबीआई टीम पॉलीग्राफी जांच पूरी करके ले गई है। अब वह जल्द अपनी रिपोर्ट देगी। संकेत हैं कि आने वाले 15 दिन में रिपोर्ट मिल जाएगी। जिसके आधार पर मुकदमे का भविष्य तय किया जाएगा।-मुनिराज जी एसएसपी
इनकी हुई पॉलीग्राफी जांच
- अजय पुत्र महेश निवासी गोरई (मृतक का दोस्त)
- नाबालिग पाया गया निवासी गोरई (मृतक का दोस्त)
- राजा बाबू पुत्र छीतर सिंह निवासी बांस फतेली गोरई (भट्ठा संचालक)
- जीतू उर्फ जितेंद्र पुत्र राजाबाबू निवासी बांस फतेली गोरई (भट्ठा संचालक पुत्र)
- लोकेश पुत्र गौतम सिंह निवासी बांस फतेली गोरई (भट्ठा संचालक परिवार से)
- मुनेश उर्फ मीनू निवासी बॉस फतेली बांस फतेली (भट्ठा संचालक का ड्राइवर)