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जिला तस्करी की टॉप-5 सूची में.. शराब तस्करों की सिर्फ 15 दुकान चिह्नित
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जहरीली शराब के सेवन से तीन दिन से लगातार लोगों की मौत हो रहीं हैं। लखनऊ, दिल्ली तक इनकी गूंज है। मगर, स्थानीय स्तर पर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति है। हद तो यह है कि मुकदमों में नामजद आरोपी अनुज्ञापियों के अभी तक सिर्फ 15 ठेकों की लिस्ट निरस्तीकरण के लिए बनाई गई है। इसमें भी सिर्फ देशी शराब के ठेकों को रखा गया है। इसके पीछे का तर्क है कि मौतें देशी शराब पीने से हुई हैं तो कार्रवाई इन्हीं ठेकों पर की जा रही है, जबकि आरोपी अनुज्ञापियों के नाम पर अंग्रेजी से लेकर बीयर तक के ठेके हैं।
इधर, शासन की मंशा के अनुरूप अभी तक आरोपी अनुज्ञापियों के सगे संबंधियों, उनके साथ मिलीभगत करने वाले दोस्तों के ठेकों को चिह्नित ही नहीं किया गया है। यह हाल तब है जब डीएम ने सख्त लहजे में कहा था कि आरोपियों के साथ ही उनके रिश्तेदारों, दोस्तों के भी ठेके निरस्त होंगे। ऐसे ठेकों की संख्या 100 के करीब बताई जा रही थी। मगर, आबकारी विभाग की कार्रवाई दूसरी दिशा में ही चल रही है। जनता की ओर से आरोप लगने लगे हैं कि मौत के सौदागरों को बचाने के लिए अब सरकारी स्तर पर षड्यंत्र बुना जा रहा है। बहरहाल, जांच जारी है और सभी को रिपोर्ट का इंतजार है। इधर, आबकारी विभाग की ईआईबी टीम प्रयागराज से अलीगढ़ आ गई है। दो दिन से यहां डेरा डाला हुआ है अपने स्तर से तमाम जानकारी जुटाते हुए शासन को रिपोर्ट भेज रही है। ईआईबी टीम के सूत्रों के मुताबिक उनकी रिपोर्ट में कुछ आलाधिकारियों के भी इस खेल में लिप्त होने का अंदेशा जताया जा रहा है। टीम के अधिकारी अब तक घटना स्थलों पर पहुंचकर शराब कांड में शामिल अनुज्ञापियों का रिकॉर्ड जुटा चुके हैं।
अधिकारियों का डेरा, फिर भी कार्रवाई में लापरवाही
शराब कांड के बाद जिला आबकारी अधिकारी को निलंबित किया गया है। इसके बाद से आगरा के संयुक्त आबकारी आयुक्त रवि शंकर पाठक, डिप्टी कमिश्नर ओपी सिंह व अन्य अधिकारियों ने पहले दिन से ही अलीगढ़ में डेरा डाल लिया है। मगर, इनकी नाक के नीचे ही कार्रवाई के नाम पर लापरवाही हो रही है। इतनी बड़ी घटना के बाद भी सूची तैयार न होना और नकली शराब की खेप अभी तक नहीं पकड़ी गई है।
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अभी तक 15 ऐसे देशी शराब के ठेकों की सूची बनाई गई है, जो कि आरोपी अनुज्ञापियों के नाम पर हैं। इनको निरस्त किया जाएगा। फिलहाल मामला देशी शराब से मौत का है तो देशी शराब के ठेकों की सूची बनाई है। हां, यह बात सही है कि इनके अन्य ठेके भी हैं, आगे उन पर भी काम होगा। रिश्तेदारों और दोस्तों के ठेकों की बात रही तो उनमें पहले यह देखा जाएगा कि इन आरोपियों के साथ किसकी संलिप्तता थी। किसी निर्दोष का ठेका भी निरस्त नहीं होना चाहिए।
- रवि शंकर पाठक, संयुक्त आबकारी आयुक्त
32 मिनट की वीडियो कॉल में सिर्फ अलीगढ़ कांड की गूंज
़जिले में हुए शराब कांड के बाद अपर मुख्य सचिव और आबकारी आयुक्त के साथ संयुक्त आबकारी आयुक्तों की रविवार को वीडियो कॉल हुई। करीब 32 मिनट की वीडियो कांफ्रेंस में अलीगढ़ कांड की गूंज रही। इसमें अपर मुख्य सचिव ने सभी संयुक्त आबकारी आयुक्तों को निर्देश दिए कि वह अनुज्ञापियों के चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट दें। तत्काल सत्यापन पूर्ण न कराने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इसके साथ ही नकली शराब बनाने वाले नए व पुराने माफिया की सूची भी नाम व पते व उनके वर्तमान स्टेट्स सहित मांगी है। साथ ही निर्देश है कि सूचियां वास्तविक होनी चाहिए। खानापूर्ति के लिए बड़े माफिया को छोड़, छोटों के नाम की लिस्ट न थमा दी जाए। शासन स्तर पर भी सूची का सत्यापन होगा। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि जिन भी आपराधिक चरित्र वाले लोगों के नाम पर लाइसेंस हैं। उनके लाइसेंस निरस्त किए जाए। ऐसे लोगों ने अगर अपने अपने परिवार या रिश्तेदार के नाम से लाइसेंस लिया है तो भी निरस्तीकरण किया जाए।
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इधर, शासन की मंशा के अनुरूप अभी तक आरोपी अनुज्ञापियों के सगे संबंधियों, उनके साथ मिलीभगत करने वाले दोस्तों के ठेकों को चिह्नित ही नहीं किया गया है। यह हाल तब है जब डीएम ने सख्त लहजे में कहा था कि आरोपियों के साथ ही उनके रिश्तेदारों, दोस्तों के भी ठेके निरस्त होंगे। ऐसे ठेकों की संख्या 100 के करीब बताई जा रही थी। मगर, आबकारी विभाग की कार्रवाई दूसरी दिशा में ही चल रही है। जनता की ओर से आरोप लगने लगे हैं कि मौत के सौदागरों को बचाने के लिए अब सरकारी स्तर पर षड्यंत्र बुना जा रहा है। बहरहाल, जांच जारी है और सभी को रिपोर्ट का इंतजार है। इधर, आबकारी विभाग की ईआईबी टीम प्रयागराज से अलीगढ़ आ गई है। दो दिन से यहां डेरा डाला हुआ है अपने स्तर से तमाम जानकारी जुटाते हुए शासन को रिपोर्ट भेज रही है। ईआईबी टीम के सूत्रों के मुताबिक उनकी रिपोर्ट में कुछ आलाधिकारियों के भी इस खेल में लिप्त होने का अंदेशा जताया जा रहा है। टीम के अधिकारी अब तक घटना स्थलों पर पहुंचकर शराब कांड में शामिल अनुज्ञापियों का रिकॉर्ड जुटा चुके हैं।
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अधिकारियों का डेरा, फिर भी कार्रवाई में लापरवाही
शराब कांड के बाद जिला आबकारी अधिकारी को निलंबित किया गया है। इसके बाद से आगरा के संयुक्त आबकारी आयुक्त रवि शंकर पाठक, डिप्टी कमिश्नर ओपी सिंह व अन्य अधिकारियों ने पहले दिन से ही अलीगढ़ में डेरा डाल लिया है। मगर, इनकी नाक के नीचे ही कार्रवाई के नाम पर लापरवाही हो रही है। इतनी बड़ी घटना के बाद भी सूची तैयार न होना और नकली शराब की खेप अभी तक नहीं पकड़ी गई है।
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अभी तक 15 ऐसे देशी शराब के ठेकों की सूची बनाई गई है, जो कि आरोपी अनुज्ञापियों के नाम पर हैं। इनको निरस्त किया जाएगा। फिलहाल मामला देशी शराब से मौत का है तो देशी शराब के ठेकों की सूची बनाई है। हां, यह बात सही है कि इनके अन्य ठेके भी हैं, आगे उन पर भी काम होगा। रिश्तेदारों और दोस्तों के ठेकों की बात रही तो उनमें पहले यह देखा जाएगा कि इन आरोपियों के साथ किसकी संलिप्तता थी। किसी निर्दोष का ठेका भी निरस्त नहीं होना चाहिए।
- रवि शंकर पाठक, संयुक्त आबकारी आयुक्त
32 मिनट की वीडियो कॉल में सिर्फ अलीगढ़ कांड की गूंज
़जिले में हुए शराब कांड के बाद अपर मुख्य सचिव और आबकारी आयुक्त के साथ संयुक्त आबकारी आयुक्तों की रविवार को वीडियो कॉल हुई। करीब 32 मिनट की वीडियो कांफ्रेंस में अलीगढ़ कांड की गूंज रही। इसमें अपर मुख्य सचिव ने सभी संयुक्त आबकारी आयुक्तों को निर्देश दिए कि वह अनुज्ञापियों के चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट दें। तत्काल सत्यापन पूर्ण न कराने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इसके साथ ही नकली शराब बनाने वाले नए व पुराने माफिया की सूची भी नाम व पते व उनके वर्तमान स्टेट्स सहित मांगी है। साथ ही निर्देश है कि सूचियां वास्तविक होनी चाहिए। खानापूर्ति के लिए बड़े माफिया को छोड़, छोटों के नाम की लिस्ट न थमा दी जाए। शासन स्तर पर भी सूची का सत्यापन होगा। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि जिन भी आपराधिक चरित्र वाले लोगों के नाम पर लाइसेंस हैं। उनके लाइसेंस निरस्त किए जाए। ऐसे लोगों ने अगर अपने अपने परिवार या रिश्तेदार के नाम से लाइसेंस लिया है तो भी निरस्तीकरण किया जाए।