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अलीगढ़-पलवल हाईवे : चार साल में नहीं बने दो बाईपास
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आशीष निगम
अलीगढ़-पलवल स्टेट हाईवे पर खैर और जट्टारी में अब तक बाईपास का निर्माण नहीं हुआ है। बाईपास नहीं बनने से स्टेट हाईवे का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। सैकड़ों वाहन रोजाना खैर और जट्टारी में जाम में फंस रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी 14 सितंबर को इसी हाईवे पर स्थित लोधा गांव में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय की जमीन पर विवि और अंडला में बन रहे डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर अलीगढ़ नोड का शिलान्यास करेंगे। इसके बावजूद प्रशासनिक तंत्र में इन दोनों बाईपास को लेकर कोई सक्रियता नहीं दिख रही है। आलम ये है कि बीते चार वर्ष में इस हाईवे का काम पूरा नहीं हुआ है, जिससे इस क्षेत्र के निवेशक भी चिंतित हैं। 14 सितंबर को पीएम मोदी और सीएम योगी के समक्ष ये मुद्दा उठ सकता है।
लगभग 10 किमी लंबे खैर बाईपास के लिए 100 करोड़ का प्रस्ताव शासन के पास मंजूरी के लिए विचाराधीन है। जट्टारी बाईपास के लिए लगभग 60 करोड़ रुपये की दरकार है। जट्टारी बाईपास का अब तक विस्तृत प्रस्ताव नहीं बन पाया है। इन दोनों बाईपास को छोड़ दें तो स्टेट हाईवे लगभग तैयार हो चुका है। इसी हाईवे पर ही अलीगढ़ से पलवल की ओर चलते वक्त सबसे पहले बाईपास चौराहे पर श्री खेरेश्वर धाम, ल्हौसरा में ट्रांसपोर्ट नगर, लोधा में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय, अंडला में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, इंडियन बॉटलिंग प्लांट, बीज निगम का गोदाम, कई बड़े कॉलेज और अन्य संस्थान है। महायोजना 2021-31 में इसी मार्ग पर भविष्य के विकास की परिकल्पना शामिल हैं, लेकिन इन दो बाईपास ने विकास की गति को धीमा कर रखा है।
लोक निर्माण विभाग के अधिकारी कहते हैं कि उन्होंने स्टेट हाईवे बना दिया है, बाईपास के बारे में शासन से मंजूरी का इंतजार है। पूर्व में इस मार्ग को नेशनल हाईवे अथारिटी (एनएचएआई) को सौंपने की बात शुरू हुई थी। लेकिन ये शर्त लगा दी गई कि निर्माण करने वाले ठेकेदार से संबंधित हाईवे का एक साल का मरम्मत का कार्य पूरा कराया जाए, जैसा कि अनुबंध की शर्तों में शामिल है। इसके बाद ही वो इस हाईवे को अपने नियंत्रण में लेंगे। इससे पहले नहीं। बस, इसके बाद से बाईपास प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में है।
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इधर, शासन से बाईपास की मंजूरी न मिलने की सटीक वजह तो कोई अधिकारी नहीं बता रहा, लेकिन डिप्टी सीएम एवं पीडब्ल्यूडी मंत्री केशव प्रसाद मौर्य कह चुके हैं कि प्रदेश सरकार से धन आवंटन लेने वाली योजनाओं को समय से पूरा किया जाए। उन्हें अधूरा न छोड़ा जाए। वहीं, जिले के नोडल अधिकारी पीब्डब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव नितिन रमेश गोकर्ण ही हैं। इसके बाद भी ये काम अधूरा है।
खैर बाईपास में शामिल गांव
खैर बाईपास में पलवल की ओर से चमन की नगरिया, नगोला, मानपुर खुर्द, संग्रामपुर, खैर, बिरौला, लोहागढ़, नयाबांस गांव शामिल हो रहे हैं। यहां पर पीडब्ल्यूडी ने किसानों से मौजूदा सर्किल रेट से दोगुने में जमीन लेने की सहमति बना ली थी। तकरीबन 95 किसान जमीन देने के लिए राजी हैं, जो आए दिन पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को फोन कर जमीन लेने की पेशकश करते हैं। इस बाईपास के लिए 26 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण और 75 करोड़ रुपये निर्माण लागत आंकी गई है। इस सौ करोड़ के प्रोजेक्ट की मंजूरी का इंतजार है। जट्टारी का इस तरह का विस्तृत प्रस्ताव अभी तक नहीं बना है।
67.50 किमी लंबे हाईवे का चार साल का अधूरा सफर
1- वर्ष 2016-17 में हाईवे निर्माण को मंजूरी, चार साल हो चुके हैं
2- एक साल पेड़ कटवाने, खंभे और ट्रांसफार्मर हटाने में गुजर गया
3- 2018-19 में निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ी, 52 किमी तैयार
4- 22 मीटर चौड़े हाईवे पर खुले में ढाई व आबादी में आधा मीटर डिवाइडर
5- खैर में 10 और जट्टारी में 5.5 किमी लंबा बाईपास बनना बाकी
6- अगस्त 2021 तक इस प्रोजेक्ट में 430 करोड़ रुपये हुए हैं खर्च
7- मेरठ की फर्म मैसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन ने किया है निर्माण कार्य
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अलीगढ़-पलवल स्टेट हाईवे पर खैर और जट्टारी में अब तक बाईपास का निर्माण नहीं हुआ है। बाईपास नहीं बनने से स्टेट हाईवे का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। सैकड़ों वाहन रोजाना खैर और जट्टारी में जाम में फंस रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी 14 सितंबर को इसी हाईवे पर स्थित लोधा गांव में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय की जमीन पर विवि और अंडला में बन रहे डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर अलीगढ़ नोड का शिलान्यास करेंगे। इसके बावजूद प्रशासनिक तंत्र में इन दोनों बाईपास को लेकर कोई सक्रियता नहीं दिख रही है। आलम ये है कि बीते चार वर्ष में इस हाईवे का काम पूरा नहीं हुआ है, जिससे इस क्षेत्र के निवेशक भी चिंतित हैं। 14 सितंबर को पीएम मोदी और सीएम योगी के समक्ष ये मुद्दा उठ सकता है।
लगभग 10 किमी लंबे खैर बाईपास के लिए 100 करोड़ का प्रस्ताव शासन के पास मंजूरी के लिए विचाराधीन है। जट्टारी बाईपास के लिए लगभग 60 करोड़ रुपये की दरकार है। जट्टारी बाईपास का अब तक विस्तृत प्रस्ताव नहीं बन पाया है। इन दोनों बाईपास को छोड़ दें तो स्टेट हाईवे लगभग तैयार हो चुका है। इसी हाईवे पर ही अलीगढ़ से पलवल की ओर चलते वक्त सबसे पहले बाईपास चौराहे पर श्री खेरेश्वर धाम, ल्हौसरा में ट्रांसपोर्ट नगर, लोधा में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय, अंडला में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, इंडियन बॉटलिंग प्लांट, बीज निगम का गोदाम, कई बड़े कॉलेज और अन्य संस्थान है। महायोजना 2021-31 में इसी मार्ग पर भविष्य के विकास की परिकल्पना शामिल हैं, लेकिन इन दो बाईपास ने विकास की गति को धीमा कर रखा है।
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लोक निर्माण विभाग के अधिकारी कहते हैं कि उन्होंने स्टेट हाईवे बना दिया है, बाईपास के बारे में शासन से मंजूरी का इंतजार है। पूर्व में इस मार्ग को नेशनल हाईवे अथारिटी (एनएचएआई) को सौंपने की बात शुरू हुई थी। लेकिन ये शर्त लगा दी गई कि निर्माण करने वाले ठेकेदार से संबंधित हाईवे का एक साल का मरम्मत का कार्य पूरा कराया जाए, जैसा कि अनुबंध की शर्तों में शामिल है। इसके बाद ही वो इस हाईवे को अपने नियंत्रण में लेंगे। इससे पहले नहीं। बस, इसके बाद से बाईपास प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में है।
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इधर, शासन से बाईपास की मंजूरी न मिलने की सटीक वजह तो कोई अधिकारी नहीं बता रहा, लेकिन डिप्टी सीएम एवं पीडब्ल्यूडी मंत्री केशव प्रसाद मौर्य कह चुके हैं कि प्रदेश सरकार से धन आवंटन लेने वाली योजनाओं को समय से पूरा किया जाए। उन्हें अधूरा न छोड़ा जाए। वहीं, जिले के नोडल अधिकारी पीब्डब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव नितिन रमेश गोकर्ण ही हैं। इसके बाद भी ये काम अधूरा है।
खैर बाईपास में शामिल गांव
खैर बाईपास में पलवल की ओर से चमन की नगरिया, नगोला, मानपुर खुर्द, संग्रामपुर, खैर, बिरौला, लोहागढ़, नयाबांस गांव शामिल हो रहे हैं। यहां पर पीडब्ल्यूडी ने किसानों से मौजूदा सर्किल रेट से दोगुने में जमीन लेने की सहमति बना ली थी। तकरीबन 95 किसान जमीन देने के लिए राजी हैं, जो आए दिन पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को फोन कर जमीन लेने की पेशकश करते हैं। इस बाईपास के लिए 26 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण और 75 करोड़ रुपये निर्माण लागत आंकी गई है। इस सौ करोड़ के प्रोजेक्ट की मंजूरी का इंतजार है। जट्टारी का इस तरह का विस्तृत प्रस्ताव अभी तक नहीं बना है।
67.50 किमी लंबे हाईवे का चार साल का अधूरा सफर
1- वर्ष 2016-17 में हाईवे निर्माण को मंजूरी, चार साल हो चुके हैं
2- एक साल पेड़ कटवाने, खंभे और ट्रांसफार्मर हटाने में गुजर गया
3- 2018-19 में निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ी, 52 किमी तैयार
4- 22 मीटर चौड़े हाईवे पर खुले में ढाई व आबादी में आधा मीटर डिवाइडर
5- खैर में 10 और जट्टारी में 5.5 किमी लंबा बाईपास बनना बाकी
6- अगस्त 2021 तक इस प्रोजेक्ट में 430 करोड़ रुपये हुए हैं खर्च
7- मेरठ की फर्म मैसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन ने किया है निर्माण कार्य