अलीगढ़ : क्या उमर से ही जुड़े हैं भाई-बहन के धर्म परिवर्तन के तार?
पार्षद इस मामले में साक्ष्य संकलित कर कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुटे हैं और शासन प्रशासन से इस मामले में उमर संगठन से जोड़कर जांच की मांग की है।
विस्तार
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र भाई व पूर्व छात्रा बहन के धर्म परिवर्तन के तार कहीं उमर गौतम के संगठन से ही तो नहीं जुड़े। यह तथ्य दो दिन में भाजपा पार्षद के स्तर से की गई जांच में उजागर हो रहे हैं। सामने आया है कि पिता की मौत के बाद इस परिवार पर गैर समुदाय के कुछ लोगों की खूब आर्थिक मेहरबानियां हुई हैं। संगीत के शौकीन युवक को संगीत सीखने के नाम पर विदेश तक भेजा गया, जबकि इस परिवार के ऐसे आर्थिक हालात नहीं थे। पार्षद पुष्पेंद्र सिंह जादौन अब इनकी मां के संपर्क में हैं। हालांकि मां अब बच्चों के साथ ही रहने की बात कह रही हैं। मगर पार्षद इस मामले में साक्ष्य संकलित कर कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुटे हैं और शासन प्रशासन से इस मामले में उमर संगठन से जोड़कर जांच की मांग की है।
मां पार्षद के संपर्क में, पर बच्चों के फैसले के साथ
पार्षद पुष्पेंद्र सिंह जादौन ने बताया कि बुधवार से मामला सुर्खियों में आने के बाद वे इन दोनों भाई-बहनों की मां के लगातार संपर्क में हैं। उनसे फोन पर कई बार बात हुई है। प्रयास किया है उन्हें समझाने का तो वे उधर से अब यही कहती हैं कि जैसे भी हैं, अब ठीक हैं। बच्चों के साथ ही रहना उचित समझ रही हैं। मगर अब वे अपना नैय्यर अपार्टमेंट वाला फ्लैट बिकवाने में पार्षद पुष्पेंद्र की मदद चाहती हैं। उन्होंने पार्षद से कहा है कि वे अब इस पचड़े में न पड़ें। बच्चों के साथ खुश हैं। बच्चों ने अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन किया है। वे बच्चों के फैसले के साथ हैं। इतना भी स्वीकारा है कि बेटी बेटा, बहू व दामाद के साथ वे अलीगढ़ में ही रह रही हैं। मगर उन्होंने पार्षद को यह नहीं बताया कि कहां रह रहे हैं।
आखिर कैसे खरीदा मकान, कैसे गया विदेश
पार्षद बताते हैं कि 2017 में पिता की मौत के पहले तक यह परिवार मिसगिल कंपाउंड में किराये पर रहता था। बच्चे एएमयू में ही पढ़ रहे थे। इनमें से बेटा अभी पीएचडी कर रहा है। उस समय भी उनके घर गैर समुदाय के लोगों का आना जाना था। उस समय तो दोस्ती की बात कही जाती थी। मगर पिता की मौत के बाद अचानक इस परिवार ने नैय्यर अपार्टमेंट में फ्लैट खरीद लिया। सवाल खड़ा हो रहा है कि फ्लैट किस मदद से खरीदा। अपार्टमेंट के लोगों से पता चला है कि यहां भी हर दिन गैर समुदाय के लोगों की आवाजाही थी। बेटा चूंकि संगीत सीखना चाहता था। इसलिए उसका पासपोर्ट बना और उसने दो-तीन विदेश यात्राएं भी कीं। सवाल खड़ा होता है कि किसकी मदद से यह सब हुआ। प्राइवेट नौकरी करते पिता के समय में आर्थिक हालात इतने अच्छे नहीं थे। अचानक से यह सब कैसे हुआ और फिर पिछले वर्ष दोनों ने दूसरे धर्म में शादी कर अपना धर्म भी बदल लिया।
यह सब उमर के संगठन और उनके यहां आने वाले दूसरे समुदाय के लोगों की ओर ही इशारा कर रहा है। इस मामले में मेरी अधिकारियों के स्तर पर व अपने संगठन में भी उच्च स्तर पर बात चल रही है। कुछ साक्ष्य भी संकलित करने का काम शेष है। इसके लिए शुक्रवार को कुछ लोग मिलने भी आ रहे हैं, जो पुराने तथ्य फोटो वीडियो के साथ लाएंगे। इसके बाद हम कानूनी रूप से कार्रवाई कराएंगे और इस परिवार की घर वापसी का प्रयास करेंगे। चाहे न्यायालय क्यों न जाना पड़े। वहीं इस प्रकरण में उमर संगठन से जोड़कर जांच होना भी जरूरी है।
- पुष्पेंद्र सिंह जादौन, पार्षद