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अलीगढ़ : संस्कृत से दूरी.. उर्दू लगी प्यारी
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इकराम वारिस
संस्कृत भाषा के बढ़ावे को लेकर राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक खासी फिक्रमंद है। संस्कृत का प्रचार-प्रसार करने के लिए प्रदेश में ऑनलाइन संस्कृत कक्षाएं और कार्यशालाएं भी हुईं लेकिन इसके परिणाम उम्मीद के मुताबिक सामने नहीं आए। आलम यह है कि जिले में सीबीएसई 12वीं में वैकल्पिक विषय के तौर पर एक भी छात्र-छात्रा ने संस्कृत विषय को नहीं चुना, जबकि 142 छात्रों ने उर्दू से जरूर नाता जोड़ा है।
सीबीएसई (सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी) के 12वींका परीक्षा परिणाम कुछ दिनों में आने वाला है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 12वीं के छात्र-छात्राओं ने संस्कृत से दूरी बनाई है। 12वीं के छात्र-छात्राओं ने वैकल्पिक विषय के रूप में संस्कृत नहीं ली। 12वीं की परीक्षा में जिले 5504 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इनमें से एक ने भी संस्कृत विषय को वैकल्पिक विषय के रूप में नहीं चुना, जबकि 10वीं में पंजीकृत 7379 में से 23 छात्र-छात्राओं ने संस्कृत की परीक्षा दी थी। 12वीं में 142 छात्र-छात्राओं ने उर्दू को वैकल्पिक विषय के रूप में लिया था। इनमें दो परीक्षार्थी गैरहाजिर थे।
इसमें ज्यादा रही रुचि
सीबीएसई स्कूल की सिटी कोआर्डिनेटर आरती झा ने बताया कि 12वीं में वैकल्पिक विषय के रूप में छात्र सबसे ज्यादा फिजिकल एजूकेशन लेते हैं, क्योंकि इसमें नंबर ज्यादा हासिल करने का मौका होता है। इसके बाद कंप्यूटर साइंस, आईटी वैकल्पिक विषय के रूप में चुनते हैं।
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संस्कृत पढ़ने वाले बच्चे आएंगे तो शिक्षक रखे जाएंगे : झा
सीबीएसई स्कूल, अलीगढ़ सिटी कोआर्डिनेटर आरती झा ने बताया कि अगर 20-25 बच्चे संस्कृत को वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ने के लिए आवेदन करते हैं तो सीबीएसई से अनुमति लेने के बाद विषय को शुरू किया जा सकता और शिक्षक की नियुक्ति की जा सकती है। जब एक-दो आवेदन आते हैं तो स्कूल वाले संस्कृत विषय न होने की जानकारी देते हैं। संस्कृत लेने वालों की मानक के अनुरूप संख्या 40 होगी तो संबंधित स्कूल संस्कृत पढ़ाने के लिए शिक्षक नियुक्त कर सकता है।
संस्कृत हो या अन्य कोई भाषा। अगर उसे पढ़ने वाले बच्चे आएंगे तो उन्हें जरूर पढ़ाया जाएगा। बशर्ते, बच्चों की संख्या उतनी होनी चाहिए, जितना सीबीएसई का मानक है। स्कूल में संबंधित विषय के शिक्षक की नियुक्ति होगी। संस्कृत लेना न लेना बच्चों और उनके अभिभावकों की मर्जी है।
-आरती मित्तल, डायरेक्टर, मदर्स टच सीनियर सेकेंडरी स्कूल
मेरे स्कूल में 12वीं में 78 बच्चों ने उर्दू को मुख्य और वैकल्पिक विषय के रूप में ले रखा था। बाकी 67 बच्चों ने अलग-अलग स्कूलों में उर्दू को वैकल्पिक के रूप में लिया था। उर्दू हिंदुस्तानी भाषा है। यहीं पैदा हुई और यहीं पली-बढ़ी। शीरीं जुबान होने के चलते उर्दू सबकी चहेती भाषा है।
-डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी, संयुक्त सचिव, अलबरकात पब्लिक स्कूल
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संस्कृत भाषा के बढ़ावे को लेकर राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक खासी फिक्रमंद है। संस्कृत का प्रचार-प्रसार करने के लिए प्रदेश में ऑनलाइन संस्कृत कक्षाएं और कार्यशालाएं भी हुईं लेकिन इसके परिणाम उम्मीद के मुताबिक सामने नहीं आए। आलम यह है कि जिले में सीबीएसई 12वीं में वैकल्पिक विषय के तौर पर एक भी छात्र-छात्रा ने संस्कृत विषय को नहीं चुना, जबकि 142 छात्रों ने उर्दू से जरूर नाता जोड़ा है।
सीबीएसई (सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी) के 12वींका परीक्षा परिणाम कुछ दिनों में आने वाला है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 12वीं के छात्र-छात्राओं ने संस्कृत से दूरी बनाई है। 12वीं के छात्र-छात्राओं ने वैकल्पिक विषय के रूप में संस्कृत नहीं ली। 12वीं की परीक्षा में जिले 5504 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इनमें से एक ने भी संस्कृत विषय को वैकल्पिक विषय के रूप में नहीं चुना, जबकि 10वीं में पंजीकृत 7379 में से 23 छात्र-छात्राओं ने संस्कृत की परीक्षा दी थी। 12वीं में 142 छात्र-छात्राओं ने उर्दू को वैकल्पिक विषय के रूप में लिया था। इनमें दो परीक्षार्थी गैरहाजिर थे।
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इसमें ज्यादा रही रुचि
सीबीएसई स्कूल की सिटी कोआर्डिनेटर आरती झा ने बताया कि 12वीं में वैकल्पिक विषय के रूप में छात्र सबसे ज्यादा फिजिकल एजूकेशन लेते हैं, क्योंकि इसमें नंबर ज्यादा हासिल करने का मौका होता है। इसके बाद कंप्यूटर साइंस, आईटी वैकल्पिक विषय के रूप में चुनते हैं।
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संस्कृत पढ़ने वाले बच्चे आएंगे तो शिक्षक रखे जाएंगे : झा
सीबीएसई स्कूल, अलीगढ़ सिटी कोआर्डिनेटर आरती झा ने बताया कि अगर 20-25 बच्चे संस्कृत को वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ने के लिए आवेदन करते हैं तो सीबीएसई से अनुमति लेने के बाद विषय को शुरू किया जा सकता और शिक्षक की नियुक्ति की जा सकती है। जब एक-दो आवेदन आते हैं तो स्कूल वाले संस्कृत विषय न होने की जानकारी देते हैं। संस्कृत लेने वालों की मानक के अनुरूप संख्या 40 होगी तो संबंधित स्कूल संस्कृत पढ़ाने के लिए शिक्षक नियुक्त कर सकता है।
संस्कृत हो या अन्य कोई भाषा। अगर उसे पढ़ने वाले बच्चे आएंगे तो उन्हें जरूर पढ़ाया जाएगा। बशर्ते, बच्चों की संख्या उतनी होनी चाहिए, जितना सीबीएसई का मानक है। स्कूल में संबंधित विषय के शिक्षक की नियुक्ति होगी। संस्कृत लेना न लेना बच्चों और उनके अभिभावकों की मर्जी है।
-आरती मित्तल, डायरेक्टर, मदर्स टच सीनियर सेकेंडरी स्कूल
मेरे स्कूल में 12वीं में 78 बच्चों ने उर्दू को मुख्य और वैकल्पिक विषय के रूप में ले रखा था। बाकी 67 बच्चों ने अलग-अलग स्कूलों में उर्दू को वैकल्पिक के रूप में लिया था। उर्दू हिंदुस्तानी भाषा है। यहीं पैदा हुई और यहीं पली-बढ़ी। शीरीं जुबान होने के चलते उर्दू सबकी चहेती भाषा है।
-डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी, संयुक्त सचिव, अलबरकात पब्लिक स्कूल