अलीगढ़ नगर निगम: 130 बरस में नगर पालिका से निगम तक का सफर, इतने सालों में सिर्फ दो महिलाएं बनीं महापौर
अलीगढ़ में शहरी प्रशासन की शुरुआत सन 1804 में अलीगढ़ को जिला बनाकर की गई। कर्नल रसल पहले कलक्टर बनाए गए। इसी के साथ शहर में नगरीय प्रशासन की नींव पड़ गई। इसके बाद 1883 से 90 के बीच नगर पालिका गठित हुई। मगर 1893 में अंग्रेज अफसर जेएम हैरिसन अलीगढ़ नगर पालिका के पहले प्रशासक नियत किए गए।
विस्तार
दौर निकाय चुनाव का है और नगरीय प्रशासन की बात करें तो हमारा अलीगढ़ शहर 130 बरस के नगरीय प्रशासन काल या सियासी सफर में लगातार बदल रहा है। अंग्रेजी हुकूमत के समय में तब एक
दौर था, इक्के-तांगे लोकल ट्रांसपोर्ट का मुख्य साधन थे। जिसकी गवाही आज भी रेलवे रोड पर तांगा स्टैंड देता है। अब आजाद भारत में हमारे शहर में ई-बस फर्राटा भर रही हैं और सारसौल पर इलेक्ट्रिक बस स्टैंड बनकर तैयार हो गया है। मतलब जैसे-जैसे दौर बदला तो विकास संसाधन भी बदले हैं। लोगों को आने वाले नगरीय प्रशासन तंत्र से और भी उम्मीदें हैं।
ये है अलीगढ़ में नगरीय प्रशासन का इतिहास
अलीगढ़ शहर के नगरीय प्रशासन के इतिहास पर गौर करें तो मराठा साम्राज्य का हिस्सा रहे अलीगढ़ में शहरी प्रशासन की शुरुआत सन 1804 में अलीगढ़ को जिला बनाकर की गई। कर्नल रसल पहले कलक्टर बनाए गए। इसी के साथ शहर में नगरीय प्रशासन की नींव पड़ गई। इसके बाद 1883 से 90 के बीच नगर पालिका गठित हुई। मगर 1893 में अंग्रेज अफसर जेएम हैरिसन अलीगढ़ नगर पालिका के पहले प्रशासक नियत किए गए। इन तथ्यों की गवाही 1910 के गजेटियर में है।
कभी अंग्रेजी फौज का पड़ाव था अलीगढ़
इससे पहले अलीगढ़ किला, जिसमें आज एएमयू का बॉटनिकल गार्डन है, इसमें मराठा सैनिकों (जिसमें फ्रांसीसी भी शामिल थे) के फौजी सामान का जमावड़ा रहता था। यह एक तरह का सैन्य पड़ाव हुआ करता था। इसके प्रवेश मार्ग पर एक पत्थर लगा है, जिसमें अंग्रेजों की फतह और फ्रांसीसी सैनिक अधिकारियों की शहादत का जिक्र है। 1857 के गदर का प्रभाव भी अलीगढ़ पर पड़ा।
हथकड़ी के कारखाने से डिफेंस कॉरिडोर तक पहुंचा शहर
नगरीय प्रशासन की शुरुआत से बहुत पहले ही अलीगढ़ में रेलवे लाइन आ चुकी थी। दिल्ली से हावड़ा जाने वाला मुख्य ट्रैक अलीगढ़ होकर ही गुजरता है। रेलवे से कनेक्टिविटी मिलने के बाद अलीगढ़ का विकास बहुत तेजी से हुआ। अंग्रेजों ने हथकड़ी बनाने का कारखाना अलीगढ़ में लगाया और इसी के साथ यहां पर ताला उद्योग की बुनियाद पड़ी। जिला बनने के बाद यहां प्रशासन, पुलिस और न्यायपालिका ने अपना काम करना शुरू किया। सीमेंट की सड़क सबसे पहले रेलवे रोड पर बनाई गई। पुराने शहर को सिविल लाइंस से जोडऩे को कठपुला बना। जयगंज में बिजली पोल लगाकर विद्युतीकरण शुरू हुआ। वही अलीगढ़ आज ताला-हार्डवेयर और शिक्षा का मुख्य केंद्र बन चुका है। आने वाले समय में डिफेंस कॉरिडोर के दम पर उद्योग का नया हब होगा।
सर्वाधिक मुस्लिमों, सिर्फ दो महिलाओं ने संभाली शहर की कमान
शहर की बात करें तो आधिकारिक रूप से 1893 में शहर को नगर पालिका का दर्जा मिला। इसके बाद करीब 100 वर्ष तक यह नगर पालिका ही रही। इसको नगर निगम बनाने का श्रेय 1995 में उत्तर
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को जाता है। इस सफर में 25 अंग्रेज शासक रहे। इसके बाद नगर पालिका बनने पर सर्वाधिक मुस्लिमों ने कमान संभाली है। वहीं महिलाओं की बात करें तो
अब तक सिर्फ दो बार कमान महिलाओं ने संभाली है।
नगरीय प्रशासन की ये भी खास बातें
- पहला बिजली का खंभा मोहल्ला जयगंज में लगाया गया था
- थानों के बाहर घोड़ों को पानी पिलाने वाली हौदियां बनी थीं
- तालों के व्यापार का बड़ा केंद्र था, तब सराय संख्या 84 थी
- शहर को सिविल लाइंस से जोडऩे को कठपुला पहला पुल
- तांगे लोकल ट्रांसपोर्ट का साधन, तांगा स्टैंड अभी भी मौजूद
बदलाव ये भी
किसी जमाने में शहर की सड़कों पर उड़ती धूल को दबाने के लिए पीठ पर मशक लादकर भिश्तियों द्वारा छिड़काव किया जाता था। करीब तीन दशक पहले मशक का चलन बंद हो गया और आज
स्प्रिंकलर नामक मशीन से छिड़काव होता है। इसी तरह शहर में विद्युतीकरण को भूमिगत करने की तैयारी है।
नगर पालिका से नगर निगम तक
- 1893 में पहली बार शहर नगर पालिका बना, जेएम हैरिसन मनोनीत प्रशासक बने।
- 1 जून 1921 को अब्दुल समद खां अध्यक्ष बने
- 1923 में एम ख्वाजा दूसरे अध्यक्ष बने
- 1925 में सोहन लाल बीए अध्यक्ष बने
- 1931 में अब्दुल खालिक अध्यक्ष बने
- 1940 में शिव प्रसाद अध्यक्ष बने
- 1940 में ही अब्दुल मजीद ख्वाजा अध्यक्ष बने
- 1945 में एलएन माथुर अध्यक्ष बने
- 1945 में ही अब्दुल मुफीद खां शेरवानी अध्यक्ष
- 1952 में सुपरसीट होकर प्रशासन ने कार्य संभाला
- 1988 तक प्रशासकों ने ही बोर्ड चलाया
- 1988 में ओपी अग्रवाल अध्यक्ष बने
- 1995 में अलीगढ़ को नगर निगम का दर्जा
- 1996 में आशुतोष वाष्र्णेय मेयर बने
- 2002 में सावित्री वाष्र्णेय महापौर बनीं
- 2007 में आशुतोष वाष्र्णेय फिर महापौर बने
- 2012 में शकुंतला भारती महापौर बनीं
- 2017 में मो.फुरकान मेयर बने