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Aligarh News: एआई की सलाह पर दवा, डॉक्टर की जगह चैटबॉट पर भरोसा
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प्रतीकात्मक फोटो
- फोटो : Archive
बुखार, सिरदर्द, पेट दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर कुछ लोग डॉक्टर की जगह एआई चैटबॉट से सलाह ले रहे हैं। लक्षण बताकर एआई से दवा पूछते हैं और खुद ही इलाज शुरू कर देते हैं। विशेषज्ञों ने इसे स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा बताया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इंटरनेट या एआई सामान्य जानकारी दे सकता है, लेकिन बीमारी का सही निदान और इलाज डॉक्टर की सलाह से ही तय होना चाहिए। अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन के जिला महासचिव राजेंद्र चौधरी ने बताया कि गूगल या एआई पर लक्षण पढ़कर खुद बीमारी तय करना सुरक्षित नहीं है।
उन्होंने बताया कि एक जैसे लक्षण कई अलग-अलग बीमारियों में दिखाई दे सकते हैं। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है। एआई बुखार के बारे में दवा की जानकारी दे सकता है, लेकिन बुखार किस कारण हुआ, यह तय नहीं कर सकता। दवा की खुराक और अवधि भी मरीज की स्थिति के अनुसार अलग होती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेना उचित नहीं है।
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जिलाध्यक्ष नितिन शर्मा ने कहा कि मरीजों को अपनी मर्जी से दवा नहीं लेनी चाहिए। मेडिकल स्टोर संचालक को दवाओं की जानकारी होती है, लेकिन गंभीर बीमारी का इलाज अपने स्तर से करना उचित नहीं है।
गूगल पर बीमारी खोजी, मेडिकल स्टोर से दवा ली :
मोबाइल पर बीमारी के लक्षण खोजने के बाद कई लोग सीधे मेडिकल स्टोर पहुंचकर दवा लेने लगते हैं। कुछ लोग पुराने परचे या पहले इस्तेमाल की गई दवा भी दोबारा शुरू कर देते हैं। दवा की खुराक, अवधि और दूसरी दवाओं के साथ उसके इस्तेमाल का ध्यान नहीं रखने से परेशानी बढ़ सकती है।
जिले में 3000 मेडिकल स्टोर
जिले में दवा की थोक और फुटकर करीब 3000 दुकानें हैं। इनमें फुटकर दुकानों पर फार्मासिस्ट बैठते हैं।
डॉक्टर की सलाह जरूरी :
जेएन मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष और डीन प्रो. एमयू रब्बानी ने बताया कि इंटरनेट से स्वास्थ्य संबंधी सामान्य जानकारी हासिल की जा सकती है। इसे चिकित्सकीय निदान का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। लगातार बने रहने वाले, बढ़ते या गंभीर लक्षणों में खुद दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, इंटरनेट या एआई सामान्य जानकारी दे सकता है, लेकिन बीमारी का सही निदान और इलाज डॉक्टर की सलाह से ही तय होना चाहिए। अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन के जिला महासचिव राजेंद्र चौधरी ने बताया कि गूगल या एआई पर लक्षण पढ़कर खुद बीमारी तय करना सुरक्षित नहीं है।
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उन्होंने बताया कि एक जैसे लक्षण कई अलग-अलग बीमारियों में दिखाई दे सकते हैं। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है। एआई बुखार के बारे में दवा की जानकारी दे सकता है, लेकिन बुखार किस कारण हुआ, यह तय नहीं कर सकता। दवा की खुराक और अवधि भी मरीज की स्थिति के अनुसार अलग होती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेना उचित नहीं है।
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जिलाध्यक्ष नितिन शर्मा ने कहा कि मरीजों को अपनी मर्जी से दवा नहीं लेनी चाहिए। मेडिकल स्टोर संचालक को दवाओं की जानकारी होती है, लेकिन गंभीर बीमारी का इलाज अपने स्तर से करना उचित नहीं है।
गूगल पर बीमारी खोजी, मेडिकल स्टोर से दवा ली :
मोबाइल पर बीमारी के लक्षण खोजने के बाद कई लोग सीधे मेडिकल स्टोर पहुंचकर दवा लेने लगते हैं। कुछ लोग पुराने परचे या पहले इस्तेमाल की गई दवा भी दोबारा शुरू कर देते हैं। दवा की खुराक, अवधि और दूसरी दवाओं के साथ उसके इस्तेमाल का ध्यान नहीं रखने से परेशानी बढ़ सकती है।
जिले में 3000 मेडिकल स्टोर
जिले में दवा की थोक और फुटकर करीब 3000 दुकानें हैं। इनमें फुटकर दुकानों पर फार्मासिस्ट बैठते हैं।
डॉक्टर की सलाह जरूरी :
जेएन मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष और डीन प्रो. एमयू रब्बानी ने बताया कि इंटरनेट से स्वास्थ्य संबंधी सामान्य जानकारी हासिल की जा सकती है। इसे चिकित्सकीय निदान का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। लगातार बने रहने वाले, बढ़ते या गंभीर लक्षणों में खुद दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।