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मंजू हत्याकांड: 20 साल पुराने मामले में एक और दोषी को पांच साल कैद, किशोरी ने कहा था- इसे नहीं मुझे मार डालो
Fri, 18 Sep 2026 02:15 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Fri, 18 Sep 2026 02:15 PM IST
सार
मंजू ने विपिन को पीटते देख कहा था कि इसे मत मारो मुझे मार डालो, जिसके बाद आरोपियों ने उसकी पीट-पीटकर और गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इस केस में 4 सह-अभियुक्तों को 2019 में ही सजा हो चुकी है।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
अलीगढ़ में विजयगढ़ थाना क्षेत्र के गांव परौरी में करीब 20 वर्ष पहले हुए चर्चित मंजू हत्याकांड में अदालत ने दोषी संतोष को पांच वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-1 विपिन कुमार-द्वितीय ने कहा कि जुर्माना न भरने पर दोषी को दो महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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घटना 26 सितंबर 2006 की रात करीब 9 बजे की है। गांव परौरी में कुछ लोग विपिन नाम के युवक को पीटते हुए खींचकर ले जा रहे थे। शोर सुनकर लाखन सिंह की 16 वर्षीय बेटी मंजू वहां आ गई। उसने गिड़गिड़ाते हुए हमलावरों से कहा कि विपिन को मत मारो, बल्कि इसके बजाय मुझे मार डालो। इस पर हमलावरों ने मंजू पर ही लात-घूंसों और डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने और गला घोंटे जाने से मंजू की मौके पर ही मौत हो गई। जिला अस्पताल के डॉ. एसके वार्ष्णेय ने पोस्टमार्टम किया था। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मृतका के शरीर पर चोट के कई निशान थे। उसका गला इस कदर घोंटा गया था कि गले की हड्डी (हायड बोन) टूट गई थी।
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दोषी ठहराए जा चुके हैं सह-अभियुक्त
इस मामले में फगुनी, रूपवती, धर्मपाल और बैनामी समेत कई चश्मदीद गवाहों की गवाही महत्वपूर्ण रही। हत्याकांड के सह-अभियुक्त रहे लाखन सिंह, रमेशचंद्र, निहाल उर्फ नहना और कालू उर्फ जयराम को पहले ही 25 मई 2019 को दोषी ठहराया जा चुका है। साक्ष्यों और गवाहों के विश्लेषण के बाद अब अदालत ने आरोपी संतोष को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। फैसला आने के बाद दोषी को न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया गया।
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