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अलीगढ़: डीएस कॉलेज के शिक्षकों पर नाज करते थे कल्याण सिंह

Mon, 23 Aug 2021 01:42 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 23 Aug 2021 01:42 AM IST
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Aligarh: Kalyan Singh used to take pride in the teachers of DS College
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान-हिमाचल के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह प्रतिष्ठित डिग्री कॉलेजों में शुमार डीएस कॉलेज के शिक्षकों पर नाज करते थे। आज से चार साल पहले डीएस कॉलेज में कल्याण सिंह डिजिटल लाइब्रेरी के उद्घाटन के लिए बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे।
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यहां मंच से उन्होंने कहा था कि इस जगह तक पहुंचने में डीएस कॉलेजों के शिक्षकों की काफी प्रेरणा रही। उन्होंने कहा था कि वह कॉलेज और इसके शिक्षकों पर गर्व महसूस करते हैं। कल्याण सिंह ने मंच से स्वयं शिक्षकों के नाम लेकर उनका आभार भी जताया था।
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बता दें कि कल्याण सिंह ने डीएस (धर्म समाज) डिग्री कॉलेज से 1960-62 में अर्थशास्त्र से एमए की पढ़ाई की थी। इससे पहले बीए की शिक्षा भी यहीं से प्राप्त की। दो जनवरी 2017 को डीएस कॉलेज में स्थापित डिजिटल लाइब्रेरी के उद्घाटन के लिए तत्कालीन राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे।
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यहां मंच से लोगों को संबोधित करते हुए कल्याण सिंह ने सबसे पहले कॉलेज के शिक्षण व्यवस्था की प्रशंसा की। इसके बाद यहां के शिक्षकों का नाम लेकर उनके संस्मरण सुनाए थे। उन्होंने कहा था कि वह जो कुछ भी हैं, शिक्षकों की ही बदौलत हैं। उन्हें अपने शिक्षकों पर गर्व था।
डीएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हेमप्रकाश ने कहा कि हमें गर्व है कि हमारे संस्थान से ऐसी सख्शियत शिक्षा प्राप्त करके निकली। जिनको श्रद्धांजलि देने के लिए सर्व समाज के लोग उत्साहित हैं। कल्याण सिंह के जीवन से युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए।
नकल पर कसी नकेल को साध नहीं पाई थीं अन्य सरकारें
डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष व शिक्षाविद रक्षपाल सिंह ने कल्याण सिंह से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए कहा कि उनके द्वारा नकल पर लगाई गई नकेल को अन्य सरकारें साध नहीं पाईं। जिसका खामियाजा आज की युवा पीढ़ी में देखने को मिल रहा है।
डॉ. रक्षपाल सिंह ने बताया कि कल्याण सिंह एक कर्मठ और सक्रिए नेता थे। जनता पार्टी की सरकार में वे स्वास्थ्य मंत्री भी रहे थे। कल्याण सिंह एक प्रभावशाली वक्ता थे, इसको सभी मानते हैं। जिस सक्रियता के साथ उन्होंने भाजपा में कार्य किया। उसके बाद जब वह प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो नकल पर नकेल कस दी थी।

नकल को उन्होंने पूरी तरह से समाप्त किया तो हाईस्कूल का परिणाम 14-15 प्रतिशत तक ही रह गया था, लेकिन दुख इस बात का है कि अन्य सरकारों ने कल्याण सिंह द्वारा कसी नकेल को साधा नहीं। इसका खामियाजा यह है कि आज की युवा पीढ़ी में से कई छात्र-छात्राएं ऐसे भी हैं जो इंटर तो पास कर लेते हैं, लेकिन हिंदी में अपने माता-पिता का नाम ठीक से नहीं लिख सकते हैं।
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