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मेडिकल कॉलेज से संक्रमण फैलने की बात गलत : एएमयू प्रशासन
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जेएन मेडिकल कॉलेज
- फोटो : CITY OFFICE
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन ने जेएन मेडिकल कॉलेज को कोरोना संक्रमण फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने संबंधी आरोपों का खंडन किया है। एएमयू प्रशासन का कहना है कि कुलपति प्रो. तारिक मंसूर स्वयं एक डॉक्टर हैं और उन्होंने कोरोना से जंग के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। मेडिकल कॉलेज पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अग्रणी मेडिकल कॉलेज है, जिसमें कोरोना के अब तक लगभग चार हजार से अधिक टेस्ट मुफ्त किए गए हैं और माइक्रोबायोलोजी विभाग के डाक्टर 24 घंटे कार्य करके दो सौ से अधिक टेस्ट प्रतिदिन कर रहे हैं।
यहां अलीगढ़ के अलावा आगरा, मथुरा, बुलंदशहर, हाथरस, मुरादाबाद, संभल, एटा, कासगज, रामपुर एवं अन्य जनपदों के टेस्ट सैंपल जॉच के लिए भेजे जाते हैं। मेडिकल कालेज के ट्रामा सेंटर में कार्यरत डॉक्टर एवं स्वास्थय कर्मियों को पीपीई किट प्रदान की गई है। मेडिकल कॉलेज के संक्रमित होने की खबर निराधार व सत्यता से परे है, क्योंकि यहां के 80 से अधिक डाक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मियों के टेस्ट कराये गये हैं, जो निगेटिव आए हैं। इसके अतिरिक्त पीडियाट्रिक सर्जरी वार्ड में भर्ती पांच मरीजों की जांच रिपोर्ट भी निगेटिव आई है।
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. शाहिद सिद्दीकी ने बताया कि संक्रमण के जितने भी रोगी गंभीर अवस्था में आए थे, उनका तुरंत उपचार कराना जरूरी था। जांच के बाद ही कोरोना होने या न होने का पता चलता है। रिपोर्ट आते ही जिला प्रशासन को सूचित कर दिया जाता है। इसके अलावा कोरोना का जो भी रोगी मेडिकल कालेज में आया, उसका पहले इलाज शहर के किसी प्राइवेट अस्पताल में हुआ था। किस प्राइवेट अस्पताल से कोरोना फैल रहा है, यह जांच का विषय है। मेडिकल कालेज को एल टू कोविड-19 अस्पताल का दर्जा दिया गया है।
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यहां अलीगढ़ के अलावा आगरा, मथुरा, बुलंदशहर, हाथरस, मुरादाबाद, संभल, एटा, कासगज, रामपुर एवं अन्य जनपदों के टेस्ट सैंपल जॉच के लिए भेजे जाते हैं। मेडिकल कालेज के ट्रामा सेंटर में कार्यरत डॉक्टर एवं स्वास्थय कर्मियों को पीपीई किट प्रदान की गई है। मेडिकल कॉलेज के संक्रमित होने की खबर निराधार व सत्यता से परे है, क्योंकि यहां के 80 से अधिक डाक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मियों के टेस्ट कराये गये हैं, जो निगेटिव आए हैं। इसके अतिरिक्त पीडियाट्रिक सर्जरी वार्ड में भर्ती पांच मरीजों की जांच रिपोर्ट भी निगेटिव आई है।
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मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. शाहिद सिद्दीकी ने बताया कि संक्रमण के जितने भी रोगी गंभीर अवस्था में आए थे, उनका तुरंत उपचार कराना जरूरी था। जांच के बाद ही कोरोना होने या न होने का पता चलता है। रिपोर्ट आते ही जिला प्रशासन को सूचित कर दिया जाता है। इसके अलावा कोरोना का जो भी रोगी मेडिकल कालेज में आया, उसका पहले इलाज शहर के किसी प्राइवेट अस्पताल में हुआ था। किस प्राइवेट अस्पताल से कोरोना फैल रहा है, यह जांच का विषय है। मेडिकल कालेज को एल टू कोविड-19 अस्पताल का दर्जा दिया गया है।
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