Aligarh: शादी में मिले धोखे और पुलिस की प्रताड़ना से आहत युवक ने की आत्महत्या, पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
खैर रोड गोविंद नगर का 35 वर्षीय मजदूर अनुसूचित जाति का युवक रवि अपनी मां देवी व भाई मोनू संग रहता था। करीब 11 माह पहले रवि की शादी इलाके की महिला गुलाबो देवी ने पश्चिम बंगाल के अमितपुर अचल मालदा की प्रतिमा संग कराई गई। गुलाबो ने प्रतिमा को अपनी रिश्ते की बहन की बेटी बताया। मगर 26 मई को प्रतिमा गुलाबो की बेटी की शादी में शामिल होने गई। वहीं से गायब हो गई।
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अलीगढ़ में शादी में मिले धोखे के बाद महानगर के देहली गेट क्षेत्र के गोविंद नगर के एक युवक ने दिवाली की पांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इसे लेकर युवक की बूढ़ी मां ने थाना पुलिस पर उत्पीड़न और शादी कराने वाली महिला को जिम्मेदार ठहराया है। मंगलगवार शाम पोस्टमार्टम के बाद जब शव घर पहुंचा तो परिवार व मोहल्ले के लोग भड़क गए और पहले उन्होंने खैर रोड पर जाम लगाया। बाद में शव थाने की दहलीज पर रखकर थाने का घेराव करते हुए देहली गेट चौराहे पर जाम लगाया।
देर शाम तक चले हंगामे के बाद एडीएम सिटी ने जिम्मेदार महिला पर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मुकदमा दर्ज कराया और इंस्पेक्टर देहली गेट व चौकी प्रभारी को लाइन हाजिर करते हुए मजिस्ट्रेटी जांच की घोषणा की। तब जाकर हंगामा शांत हुआ। इसके बाद शव को थाने से अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया।
बता दें कि खैर रोड गोविंद नगर का 35 वर्षीय मजदूर अनुसूचित जाति का युवक रवि अपनी मां देवी व भाई मोनू संग रहता था। करीब 11 माह पहले रवि की शादी इलाके की महिला गुलाबो देवी ने पश्चिम बंगाल के अमितपुर अचल मालदा की प्रतिमा संग कराई गई। गुलाबो ने प्रतिमा को अपनी रिश्ते की बहन की बेटी बताया। मगर 26 मई को प्रतिमा गुलाबो की बेटी की शादी में शामिल होने गई। वहीं से गायब हो गई।
खुद रवि उसे वहां छोड़कर आया था। जब वह उसे लेने पहुंचा तो गुलाबो ने कहा कि वह तो यहां से घर जाने की कहकर चली गई। फिर उसे धमकाया कि तुमने उसे गायब कर दिया है। अब तुम्हारे खिलाफ मुकदमा होगा। बाद में प्रतिमा के भाई की तहरीर पर 5 अक्तूबर को गुमशुदगी तहरीर देहली गेट में दर्ज करा दी गई। इसकी जांच कर रहे दरोगा मुकेश चौधरी पर आरोप है कि वे कभी रवि को थाने बुलाकर पीटते थे और कभी रवि की मां को बुलाकर धमकाते थे। अक्सर घर आकर भी अभद्रता किया करते थे। वहीं खुद रवि द्वारा अपनी गुमशुदगी को लेकर दी गई तहरीर पर कोई संज्ञान नहीं लिया।
इसी सब से रवि बेहद परेशान था। सोमवार रात दिवाली का पूजन करने के बाद रवि ने रात को आत्महत्या कर ली। सुबह परिवार वालों ने जब रवि का शव लटका देखा तो पुलिस को खबर दे दी। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। शाम करीब 4 बजे पोस्टमार्टम के बाद शव जब घर पहुंचा तो उसकी मां ने इसे पुलिस उत्पीड़न व गुलाबो देवी द्वारा परेशान किए जाने के कारण आत्महत्या करार देकर आरोप लगा दिया। इसे लेकर पब्लिक बिफर गई और खैर रोड लाल मस्जिद पर शव रखकर जाम लगा दिया। इस सूचना पर इलाका पुलिस व सीओ पहुंचे। उन्हें वे समझाने में लगे थे। इस दौरान सीओ से अभद्रता व धक्का मुक्की करते हुए पब्लिक शव को रिक्शे में लादकर देहली गेट थाने ले आई और थाने की दहलीज पर शव रखकर थाना घेर लिया।
साथ में चौराहे पर जाम लगा दिया। इस बीच वहां आम आदमी पार्टी की मोनिका थापर, बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रतनदीप सिंह आदि के नेता पहुंच गए। परिवार के साथ खड़े होकर पुलिस पर कार्रवाई, 10 लाख रुपये मुआवजा आदि मांग करने लगे। पुलिस द्वारा समझाने का प्रयास किया गया तो वहां पुलिस से अभद्रता नोकझोंक के साथ पुलिस विरोधी नारेबाजी शुरू हो गई। इसी बीच वहां भाजपा महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत, पूर्व मेयर शकुंतला भारती, संजू बजाज आदि पहुंच गए। उन्होंने पुलिस व पब्लिक से वार्ता की। देर रात करीब 8 बजे तय हुआ कि इंस्पेक्टर डीके सिसौदिया, दरोगा मुकेश को लाइन हाजिर कर मामले में मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाएगी। साथ में गुलाबो देवी पर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मुकदमा दर्ज किया गया। तब जाकर हंगामा व जाम हटा।
शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। एसपी सिटी कुलदीप सिंह गुणावत ने बताया कि महिला के लापता होने के मामले में पुलिस जांच के दौरान पुलिस पर आरोप लगा है। हालांकि पूछताछ के लिए मां-बेटे को थाने बुलाया गया था। फिर भी जो आरोप हैं, उनके अनुसार जांच कराई जा रही है। फिलहाल गुलाबो देवी पर मुकदमा, इंस्पेक्टर व दरोगा को लाइन हाजिर किया गया है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार आगे कार्रवाई तय होगी।
इस प्रकरण में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। एसपी सिटी स्तर से मिली प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर इंस्पेक्टर डीके सिसौदिया व दरोगा मुकेश चौधरी को लाइन हाजिर कर दिया गया है। बाकी पूरे मामले में एसपी यातायात को जांच सौंपी गई है। - कलानिधि नैथानी, एसएसपी
ये निकाय चुनाव की आहट ही मानी जा रही है। तीन दिन पहले अनुसूचित युवक की पिटाई के मामले की तर्ज पर मंगलवार को भी देहली गेट पर अनुसूचित जाति के युवक की मौत के मुद्दे ने तूल पकड़ा। खबर पर कुछ ही देर में वहां आम आदमी, बसपा के नेता पहुंच गए। पीछे सत्ताधारी भाजपा के लोग भी नहीं रहे और कुछ ही देर में वे भी पहुंच गए। सभी ने एक साथ खड़े होकर परिवार का समर्थन किया। शायद यही दबाव की वजह रही कि पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी तीन दिन पुराने घटनाक्रम को याद कर कुछ देर के हंगामे पर पुलिस पर कार्रवाई को तैयार हो गए। अन्यथा लोग चिल्लाते रहते हैं, मगर अधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेंगती।
पांच माह बाद गुमशुदगी, पुलिस पर जमकर गुस्सा
इस घटना में पुलिस के प्रति लोगों में जबरदस्त गुस्सा था। कहना था कि मई माह में प्रतिमा देवी गायब हुई। उसके बाद रवि ने थाने जाकर तहरीर दी। मगर उसके कहने पर गुमशुदगी दर्ज नहीं की। पांच माह बाद उल्टा पश्चिम बंगाल से आए प्रतिमा के भाई की तहरीर पर गुमशुदगी दर्ज कर ली। इसके बाद रवि को थाने बुलाकर पीटा गया। उसकी मां से अभद्रता की गई। हर बार रवि व उसकी मां कहते रहे कि गुलाबो से पूछो, वहीं से प्रतिमा गायब हुई है। मगर पुलिस ने एक न सुनी। उल्टा 23 अक्तूबर को दरोगा ने उसके घर जाकर मां से अभद्रता कर दी। बेटे को जेल भेजने की धमकी दे दी। इसी से आहत होकर रवि ने यह कदम उठाया।