अब ‘सकल राष्ट्रीय खुशहाली’ की ओर कदम बढ़ा रही दुनिया
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अब ‘सकल राष्ट्रीय खुशहाली’ की ओर कदम बढ़ा रही दुनिया
कौशल कुमार ओझा
अलीगढ़। वैश्वीकरण के मौजूदा दौर में किसी भी राष्ट्र के विकास का सूचक ‘सकल राष्ट्रीय उत्पाद’ को माना जाता है, ऐसे में कोई ‘सकल राष्ट्रीय खुशहाली’(जीएनएच) की बात करे तो हैरानी स्वाभाविक है। लेकिन यह सिद्धांत छोटे से पड़ोसी देश भूटान ने दिया है। इसे दुनिया के कई देश आदर्श मॉडल के रूप में अपना रहे हैं।
11 वें अंतरराष्ट्रीय सकल राष्ट्रीय खुशहाली (ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस) सम्मेलन का आयोजन इस वर्ष भूटान के पारो शहर में 3 से 6 नवंबर के बीच होने जा रहा है। इसमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के शोध छात्र फैसल हसन रिजवी को भी शोध पत्र के साथ बुलाया गया है। वे भारत भूटान पर आधारित तुलनात्मक शोध प्रस्तुत करेंगे। इस सम्मेलन में 50 देशों के करीब दो हजार से अधिक लोग भाग ले रहे हैं। फैसल ने बताया कि अमेरिकी सरकार ने मूल रूप से भूटान के ‘ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस’ के सिद्धांत को अपनी प्राथमिकता के तौर पर स्वीकार किया। पूरे विश्व में भूटान के इस सिद्धांत पर शोध हो रहे हैं। यूएई में दुबई सरकार ने अपने प्रशासनात्मक ढांचे में हैप्पीनेस इंडेक्स को 2014 में ही शामिल किया था। इसकी प्रेरणा उसे भूटान से मिली थी। ज्ञात हो की भूटान को दुनिया का सबसे खुशहाल देश का दर्जा प्राप्त है।