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Aligarh Police: सजा कराने में जिला टॉप पर, मगर मुकदमों की पैरवी में है कमजोर
Tue, 20 Aug 2024 04:12 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Tue, 20 Aug 2024 04:12 PM IST
सार
अलीगढ़ जिले में उन मुकदमों पर पुलिस का ध्यान नहीं, जिनमें आरोपी बरी हो जाते हैं। इस बात की गवाही हाईकोर्ट में की जाने वाली अपील के आंकड़े दे रहे हैं। पिछले चार माह में साठ से अधिक उन संगीन अपराधों में अपील की गई है, जिसमें साक्ष्य थे और गवाह भी नहीं टूटे।
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अपराध
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ऑपरेशन कन्विक्शन की एक वर्ष की समीक्षा में अलीगढ़ जिला सबसे ज्यादा सजा कराने में प्रदेश में पहले स्थान पर आया। मगर पुलिस की लचर विवेचना और कमजोर साक्ष्यों के चलते आए दिन संगीन अपराधों के मुकदमों में अपराधी छूट रहे हैं। इसी का परिणाम है कि पिछले करीब चार माह में साठ से अधिक मुकदमों में अभियोजन की ओर से हाईकोर्ट में अपील की गई है।
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प्रदेश भर में ऑपरेशन कन्विक्शन चलाया जा रहा है, जिसमें पुलिस को संगीन मुकदमे चिह्नित करने होते हैं। फिर उनमें मजबूत पैरवी, समय पर गवाहों को पेश कराना, साक्ष्य पेश कराना आदि जिम्मेदारी होती है। अभियोजन स्तर से उन मुकदमों में मजबूत पैरवी की जाती है। इस ऑपरेशन का जुलाई में परिणाम जारी हुआ तो अलीगढ़ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। परिणाम आने के बाद जिला पुलिस ने खुद की पीठ ठोंकी और अभियोजन अधिवक्ता भी खुश नजर आए।
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मगर इसके विपरीत जिले में उन मुकदमों पर पुलिस का ध्यान नहीं, जिनमें आरोपी बरी हो जाते हैं। इस बात की गवाही हाईकोर्ट में की जाने वाली अपील के आंकड़े दे रहे हैं। पिछले चार माह में साठ से अधिक उन संगीन अपराधों में अपील की गई है, जिसमें साक्ष्य थे और गवाह भी नहीं टूटे। मगर पुलिस की लचर विवेचना से अपराधी को संदेह का लाभ मिला।
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डीजीसी फौजदारी चौ. जितेंद्र सिंह बताते हैं कि हमारे स्तर पर मुकदमों में सजा कराने का हर संभव प्रयास होता है। मगर जिन मुकदमों में गवाह पक्षद्रोही होते हैं। उनमें अपील पर कम ध्यान दिया जाता है। हां, मजबूत साक्ष्य और मजबूत गवाही के बावजूद मुकदमे में अपराधी अगर बरी हुआ है तो उसमें हमारे स्तर से अपील हाईकोर्ट में की जाती है। साठ से अधिक मुकदमे पिछले समय में अपील में भेजे गए हैं।
ये हैं कुछ ऐसे मामले
- टप्पल क्षेत्र का बहुचर्चित ज्ञानचंद्र शर्मा ज्ञानी हत्याकांड अगस्त 2014 में हुआ था। राजनीतिक रंजिश में हुई हत्या में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सहित नौ आरोपियों को इस वर्ष मार्च में बरी कर दिया। अदालत के आदेश में साफ था कि पुलिस की कहानी के अनुसार, सियासी रंजिश और शूटरों से जुड़ी कहानी से आरोप साबित न हो सका।
- इगलास के तोछीगढ़ के पास फरवरी 2007 में ट्रक चालक व क्लीनर की हत्या कर डकैती को अंजाम दिया गया। पुलिस ने खुलासा कर चार्जशीट दायर की। बदमाशों को मुठभेड़ में पकड़ना दिखाया। इस मुकदमे का ट्राॅयल लंबे तक चला और जुलाई में सभी आठ आरोपी बरी कर दिए गए। इसमें भी पुलिस की कहानी अपराध को साबित नहीं कर सकी।
- क्वार्सी के रामघाट रोड इलाके की बाइकर्स गैंगवार से जुड़ी रंजिश में जुलाई 2017 में देवसैनी के रामकिशन रामू की गोली मारकर हत्या की गई थी। पुलिस ने रोबिन प्रधान सहित पांच आरोपियों पर चार्जशीट दायर की। गवाही भी मजबूत हुई। मगर पुलिस कहानी इस मुकदमे में भी आरोपियों को दोषी करार न दिला सकी और सभी पिछले माह बरी हो गए।
- जवां में नवंबर 2015 में इकलौठ कल्लूपुर के रामवीर की हत्या का एक मुकदमा पिछले माह छूटा है, जिसमें नामजदों के खिलाफ मजबूत गवाही के बावजूद अदालत ने पुलिस की कमजोर कहानी व कमजोर साक्ष्यों के चलते संदेह के आधार पर आरोपी बरी किए हैं।