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अलीगढ़: उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ का व्रत पूरा हुआ
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अलीगढ़: टीकाराम मंदिर में छठ पूजा पर उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पूजा करतीं महिलाएं।
- फोटो : CITY OFFICE
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
बुधवार दोपहर से शुरू हुआ छठ मैया का व्रत शनिवार सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देकर पूरा हुआ। सुबह से ही व्रत करने वाली महिलाओं ने छठ मैया के गीत गाते हुए अर्चना शुरू कर दी थी। इसके बाद सूर्योदय होने पर पानी में खड़े होकर अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया और प्रसाद बांटा। अर्घ्य देने के लिए सूप में ठेकुआ पूड़ी, खीर, फल, चावल के पिठ्ठे, मालपुआ, सूजी का हलवा, शहद, पान सुपारी, कपूर, चंदन और मिठाई रखी गई थी। बांस की टोकरी में पूजन सामग्री थी। जिसमें चावल, लाल सिंदूर, दीपक, नारियल, हल्दी, गन्ना, सुतनी, सब्जी और शकरकंद रखा गया था।
कोरोना संक्रमण काल के कारण इस बार सभी स्थानों पर बहुत कम ही लोग सार्वजनिक पूजा में शामिल हुए। जो जहां रह रहा था, वहीं पर पूजा की। टीकाराम मंदिर में केवल स्थानीय परिसर के लोगों ने पूजा अर्चना की। यहां हर वर्ष 15-20 फुट लंबे बनने वाले कत्रिम घाट की लंबाई इस बार पांच-छह फुट तक सिमट गई थी।
बदरबाग और नौरंगाबाद में भी सीमित संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए। दर्जनों लोगों ने घरों में ही बाथ टब, प्लास्टिक टब में ही खड़े होकर अर्घ्य दिया। अर्घ्य देकर पूजन करने, प्रसाद चढ़ाने के बाद व्रत धारण करने वाली महिलाओं ने जल ग्रहण किया। प्रसाद प्राप्त किया। इसके बाद प्रसाद परिवार के अन्य लोगों को बांटा गया। यही प्रसाद अब परिवार, रिश्तेदार और दोस्तों को बांटा जाएगा।
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चार दिन चला व्रत
18 नवंबर को नहाय खाय
19 नवंबर को खरना
20 नवंबर को संध्या अर्घ्य
21 को हुआ सूर्य अर्घ्य
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बुधवार दोपहर से शुरू हुआ छठ मैया का व्रत शनिवार सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देकर पूरा हुआ। सुबह से ही व्रत करने वाली महिलाओं ने छठ मैया के गीत गाते हुए अर्चना शुरू कर दी थी। इसके बाद सूर्योदय होने पर पानी में खड़े होकर अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया और प्रसाद बांटा। अर्घ्य देने के लिए सूप में ठेकुआ पूड़ी, खीर, फल, चावल के पिठ्ठे, मालपुआ, सूजी का हलवा, शहद, पान सुपारी, कपूर, चंदन और मिठाई रखी गई थी। बांस की टोकरी में पूजन सामग्री थी। जिसमें चावल, लाल सिंदूर, दीपक, नारियल, हल्दी, गन्ना, सुतनी, सब्जी और शकरकंद रखा गया था।
कोरोना संक्रमण काल के कारण इस बार सभी स्थानों पर बहुत कम ही लोग सार्वजनिक पूजा में शामिल हुए। जो जहां रह रहा था, वहीं पर पूजा की। टीकाराम मंदिर में केवल स्थानीय परिसर के लोगों ने पूजा अर्चना की। यहां हर वर्ष 15-20 फुट लंबे बनने वाले कत्रिम घाट की लंबाई इस बार पांच-छह फुट तक सिमट गई थी।
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बदरबाग और नौरंगाबाद में भी सीमित संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए। दर्जनों लोगों ने घरों में ही बाथ टब, प्लास्टिक टब में ही खड़े होकर अर्घ्य दिया। अर्घ्य देकर पूजन करने, प्रसाद चढ़ाने के बाद व्रत धारण करने वाली महिलाओं ने जल ग्रहण किया। प्रसाद प्राप्त किया। इसके बाद प्रसाद परिवार के अन्य लोगों को बांटा गया। यही प्रसाद अब परिवार, रिश्तेदार और दोस्तों को बांटा जाएगा।
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18 नवंबर को नहाय खाय
19 नवंबर को खरना
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