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अलीगढ़: बारिश से करोड़ों रुपये कीमत की ईंटें बारिश से बर्बाद

Mon, 16 Nov 2020 11:27 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 16 Nov 2020 11:27 PM IST
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Aligarh: Bricks worth crores ruined due to rain
अलीगढ़: कौड़ियागंज बीडीके ग्रुप में बारिश से लाखों रुपये कीमत ईंटें खराब हो गईं। - फोटो : CITY OFFICE
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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रविवार शाम को हुई बारिश से ईंट भट्ठा संचालकों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो गया है। जिससे अधिकांश भट्ठा संचालकों की दिवाली तनाव में गुजरी है। गोवर्धन पूजा के दिन हुई बारिश ने सभी को घाटा दिया है। जिले के 423 भट्ठों में वर्तमान में लगभग तीन सौ में पथाई और फुकाई का काम चल रहा है। बाकी में भी काम जल्द शुरू हो जाएगा। 300 भट्ठों में हरेक पर लगभग डेढ़ लाख कच्ची ईंटें खराब हुई हैं। कुछ पूरी तरह से खत्म हो गई, कुछ जम गईं तो कुछ बह गईं। कुछ की शक्ल खराब हो गई है। लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये का नुकसान बताया जा रहा है। हालांकि सरकारी स्तर पर इसका कोई आकलन नहीं हो रहा है।
ईंट कारोबार पर असर
1-अलीगढ़ जिले में वर्तमान में 300 ईंट भट्ठे उत्पादन कर रहे।
2-सालाना एक भट्ठे पर औसतन 60-70 लाख ईंटों का उत्पादन।
3-300 ईंट भट्ठों पर इस वक्त फुकाई हो रही है, पथाई भी जारी।
4-कच्ची ईंटें बारिश से खराब हुईं, इसकी कीमत लगभग एक हजार रुपये।
5-750 रुपये पथाई, रेता, मिट्टी मिला कर 1000 रुपये में तैयार होती है एक हजार कच्ची ईंटें।
6-एक भट्ठे पर लगभग डेढ़ से दो लाख कच्ची ईंटें भीग कर खराब हुईं।
7-कुछ ईंटें बिल्कुल खराब हो गई तो कुछ की शक्ल (बिझोड़) बदल गई।
8-अक्तूबर से जून तक भट्ठों का सीजन, कोहरे में सूख नहीं पाती हैं ईंटें।
9-25 ईंटों के चट्टे (पाये) वाले भट्ठों को सालाना दो लाख रुपये रायल्टी देनी होती है।
10-जिले के 300 भट्ठों में लगभग साढ़े चार करोड़ ईंटें खराब हुई, तकरीबन इतना ही नुकसान।
11-नौ भट्ठों में साढ़े छह करोड़ ईंट सालाना केवल बीडीके ग्रुप का उत्पादन।
12-4500 से 5600 रुपये प्रति हजार तक वर्तमान में ईंटों का भाव, गुणवत्ता आधारित।
जिले के तकरीबन 300 ईंट भट्टों में उत्पादन हो रहा है। हरेक भट्ठे पर औसतन डेढ़ लाख ईंटे खराब हुई हैं। जिससे रविवार शाम को हुई बारिश में लगभग छह करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। सरकार को इस वक्त भट्ठा संचालकों की मदद करनी चाहिए। जिस तरह से कारखानों में नुकसान की भरपाई सरकार किसी न किसी तरह से मदद दे रही है। उसी तरह से इस उद्योग को मदद की दरकार है। जिससे ईंटों का भाव स्थिर रह सके और आम आदमी आसानी से मकान बनवा सके। नहीं तो ईंटों के दाम बढ़ते चले जाएंगे।
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-विशाल गर्ग, बीडीके ग्रुप कौडिय़ागंज।
जिले में लगभग 423 ईट भट्ठे हैं। जिसमें वर्तमान में 300 में उत्पादन चल रहा है। मजदूरों की शत प्रतिशत उपलब्धता हो गई है, लेकिन इस बारिश से बहुत नुकसान हो गया है। सरकार इसमें कोई रियायत दे तो कुछ राहत मिल सकती है। इस बारिश से कुल उत्पादन बीस फीसदी कम हो जाएगा। अभी सर्दी में कोहरे ईंटे सूख नहीं पाएंगी। ऐसे में हरेक भट्ठे पर दस-दस लाख ईंटों का उत्पादन कम हो जाएगा। ऐसे में नई ईंट आराम से उपलब्ध नहीं होगी। एक तरफ सरकारें लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की बाते करते हुए योजनाएं बनाती है, लेकिन आम आदमी के मकान की सबसे जरूरी चीज ईंटों के उद्योग को नुकसान में कोई रियायत नहीं मिलती है जिससे इसका दाम बढ़ता जा रहा है। अगर सरकार एक नीति बना दें तो ईंट के दाम बढऩे से रोके जा सके।
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-जनकपाल सिंह अध्यक्ष, ईंट निर्माता समिति अलीगढ़।
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